सरकार बदलने पर भी रिश्ते मजबूत रहेंगे: राॅनमल्का
| Agency - 10 May 2019


दिल्ली। इजराइल के राजदूत रॉन मल्का ने कहा कि भारत और इजरायल के बीच सहयोग तेज गति से बढ़ रहा है और सरकार में बदलाव होने पर भी द्विपक्षीय संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
बातचीत के दौरान इजरायली राजदूत से पूछा गया कि क्या अगर राजग गठबंधन लोकसभा चुनाव में सत्ता बरकरार रखने में विफल रहता है तो द्विपक्षीय संबंधों पर कोई असर पड़ेगा. उन्होंने कहा, ‘‘मुझे कोई कारण नहीं दिखता है कि इसे क्यों बदलना चाहिए. यह दो देशों के बीच का रिश्ता है. यह रिश्ता बढ़ रहा है और आगे बढ़ रहा है, सत्ता में कौन है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
ध्यान रहें दिवाली पर इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारतीयों का ध्यान अपनी ओर खींचते हुए विशेष और अनोखी बधाई दी थी। बधाई में भारतवासियों के साथ-साथ विशेष रूप से अपने दोस्त पीएम मोदी का जिक्र किया था. लेकिन खास बात यह थी कि यह जिक्र सिर्फ अंग्रेजी में ही नहीं किया, बल्कि भारत की राजभाषा हिंदी में भी किया था.  बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत को बधाई देने के लिए हिंदी का इस्तेमाल किया था। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हिंदी में ट्वीट किया था, इजराइल के लोगों की ओर से, मैं अपने प्यारे दोस्त पीएम नरेंद्र मोदी और भारत के लोगों को दिवाली की शुभकामनाएं देना चाहता हूं. रोशनी के इस चमकदार त्योहार से आपको खुशी और समृद्धि मिले. हमें बेहद खुशी होगी अगर आप इस ट्वीट का उत्तर, उस शहर के नाम से दें जहां आप यह त्योहार मना रहे हैं।
नीरव मोदी अभी जेल में ही रहेंगे
लंदन। ब्रिटेन की एक अदालत ने भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी की जमानत याचिका लगातार तीसरी बार खारिज कर दी। नीरव मोदी भारत में पंजाब नेशनल बैंक के साथ करीब 14 हजार करोड़ तक की बैंक धोखाधड़ी और मनी लांड्रिंग मामले का आरोपी है।
लंबी सुनवाई के दौरान बैरिस्टर क्लेयर मोंटगोमेरी ने न्यायाधीश से कहा कि वैंड्सवर्थ जेल मे स्थितियां रहने योग्य नहीं हैं. मोदी किसी भी शर्त को मानने को तैयार हैं जो उन पर लगायी जाएंगी. हालांकि, न्यायाधीश इन दलीलों से सहमत नहीं हुईं। जज आर्बुथनॉट ने कहा कि धोखाधड़ी की राशि बहुत ज्यादा है और ऐसे में 20 लाख पौंड की जमानत राशि नाकाफी है. यदि उन्हें जमानत दे दी गयी तो वह आत्मसमर्पण करने में असफल रहेंगे इसलिए अदालत ने मोदी को जमानत देने से इनकार कर दिया। इससे पहले भारत की ओर से दलील रखते हुए क्राउन प्रासिक्यूशन सर्विस ने कहा कि मोदी को जमानत नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि बचाव पक्ष ने जो सबूत पेश किए हैं वे परिस्थितियों में किसी तरह का बदलाव नहीं दर्शाते हैं।

ईरान ने दी धमकी
लंदन। ईरान ने कहा कि वह यूरेनियम संवर्धन अगले 60 दिनों में शुरू कर देगा अगर यूरोपियन देशों ने परमाणु समझौते के मसले पर मदद नहीं की. ईरान के इस बयान पर अमेरिका ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा कि ईरान ने 2015 के परमाणु समझौते पर जानबूझकर इस तरह का बयान दिया है।
अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने ईरान के इस कदम को परमाणु समझौते को लेकर अस्पष्ट बताया है। माइक पोम्पिओ ने कहा कि इससे यह पता नहीं चलता है कि ईरान परमाणु समझौते को लागू करेगा या नहीं। इससे पहले ईरान ने कहा कि वह परमाणु समझौते पर तब तक पूरी तरह से अमल नहीं करेगा जब तक कि उसे यूरोपियन देशों के द्वारा मदद नहीं की जाती है. बता दें कि यूरोपियन देशों ने ईरान को मदद की घोषणा की थी लेकिन अमेरिका के परमाणु डील से बाहर हटने और ईरान पर अनेक तरह के प्रतिबंध लगाने से उसे यह मदद नहीं मिल रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने ब्रिटेन के विदेश मंत्री जेरेमी हंट से मुलाकात की. मुलाकात के बाद उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है जानबूझकर यह अस्पष्ट है. हमें अभी यह देखना होगा कि ईरान के इस कदम का वास्तव में मतलब क्या है।’’
पाक में 20 चीनी नागरिक गिरफ्तार
इस्लामाबाद। पाकिस्तानी लड़कियों को कथित तौर पर बहला-फुसलाकर उनसे फर्जी शादी करने और फिर चीन ले जाकर उन्हें वेश्यावृत्ति में धकेल देने के मामले में 20 से अधिक चीनी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है।
पाकिस्तान सरकार ने हाल में संघीय जांच एजेंसी को निर्देश दिया था कि वह शादी के नाम पर पाकिस्तानी लड़कियों को तस्करी कर चीन ले जाने में शामिल गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई करे जिसके बाद से ही यह गिरफ्तारियां की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि 20 से अधिक चीनी नागरिकों को पाकिस्तान के कई शहरों से गिरफ्तार किया गया है। गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) के मानव तस्करी विरोधी प्रकोष्ठ ने इस्लामाबाद और रावलपिंडी से 14 चीनी नागरिकों को गिरफ्तार किया और तीन महिलाओं को भी उनके पास से पकड़ा है। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार किए गए चीनी नागरिकों के पास से पहली बार अवैध हथियार भी बरामद किए गए हैं।


(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सात सीटों पर चुनाव जीतने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के साथ समझौता करने का बहुत प्रयास किया लेकिन बात नहीं बन पायी। गठबंधन नहीं हो पाने के लिए कौन दोषी है, इस पचड़े में पड़ने की जरूरत नहीं है। यहां पर भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच ही मुख्य मुकाबला हो रहा है। सातों सीटों पर प्रत्याशी धोषित हो चुके हैं। उत्तर-पूर्वी दिल्ली की सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित कांग्रेस की प्रत्याशी हैं तो आम आदमी पार्टी ने दिलीप पांडे को अपना उम्मीदवार बनाया है तो भाजपा ने दिल्ली इकाई के अध्यक्ष पुरबिया तिवारी अर्थात मनोज तिवारी को प्रत्याशी बनाया है। मनोज तिवारी के लिए कह दिया गया कि वह नाचने-गाने वाले हैं और उत्तर -पूर्वी दिल्ली की जनता उन्हें सांसद नहीं बनाएगी। इसपर श्री मनोज तिवारी ने पूर्वांचल के लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ा और कहा पूर्वांचल के लोगों को केजरीवाल और शीला दीक्षित नाचने-गाने वाला बताते हैं, ये तो पूर्वांचल का अपमान है। गोस्वामी तुलसीदास ने भी रामचरित मानस में कहा है कि जद्यपि जग दारूण दुख नाना, सबसे अधिक जाति अवमाना अर्थात जब क्षेत्र अथवा जाति का अपमान किया जाता है, तब जनता उससे ज्यादा उत्तेजित होती है। लोगों का मानना है कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में इसी मायने में मनोज तिवारी भारी पड़ रहे हैं।
दिल्ली में चुनाव प्रचार में तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। आम आदमी पार्टी के दक्षिण दिल्ली से उम्मीदवार राघव चड्ढा हैं। उनका प्रचार फिल्म अभिनेत्री गुलपनाग कर रही हैं। गुलपनाग खुद बाइक चलाती हैं और पीछे राघव चड्ढ़ा को बैठाये रहती हैं। इसी प्रकार उत्तर-पूर्वी दिल्ली से भाजपा उम्मीदवार मनोज तिवारी भोजपुरी के मशहूर गायक है, अभिनेता भी हैं। उनका प्रचार मशहूर हरियाणवी डांसर सपना चैधरी कर रही हैं। सपना चैधरी पहले कांग्रेस में जाने वाली थीं। पियंका गांधी वाड्रा के साथ उनकी तस्वीर भी छपी थी लेकिन बाद में वे भाजपा से जुड़ी है। मनोज तिवारी और सपना चैधरी का सुर-ताल पूर्वी दिल्ली में काफी चर्चित हो रहा है।
इसी क्षेत्र से पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित कांग्रेस की प्रत्याशी है। वे लगातार 15 वर्ष तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रही हैं और 81 वर्ष की उम्र में चुनाव लड़ रही हैं। अब वे सक्रिय कितनी होंगी, ये तो आसानी से समझा जा सकता है लेकिन कांग्रेस में उनका प्रभाव हैं। इसी प्रभाव के चलते उन्होंने आम आदमी पार्टी के साथ समझौता नहीं होने दिया और कपिल सिब्बल नाराज हो गये। दिल्ली की तीन बार मुख्यमंत्री रही शीला दीक्षित क्षेत्र में जन सभाएं कर रही हैं। वे जैसे ही सभास्थल पर पहुंचती हैं, कांग्रेस के स्थानीय नेता लोगों को याद दिलाते हैं कि ये वही शख्सियत हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की शक्ल बदल दी। शीला दीक्षित समर्थको की मदद से मंच पर चढ़ती हैं लेकिन वाणी में ओज है। वे लोगों से कहती हैं कि याद रखिए दिल्ली काम नहीं करने वाली पार्टी को दूसरा मौका नहीं देती है, आपने भाजपा को दूसरा मौका नहीं दिया, इस बार भी यही करना है। दिल्ली का गौरव लौटाने के लिए आप को कांग्रेस पर भरोसा रखना चाहिए फिल्मी सितारे, नाचने-गाने वालों के लिए अपना वोट बर्बाद मत करिए।
उत्त्र-पूर्वी दिल्ली क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार मनोज तिवारी ने भी अपने नेता नरेन्द्र मोदी से जनता को द्रवित करने वाले फार्मूले सीख लिये हैं। हालांकि इस प्रकार की शिक्षा अनुभव से मिलती है। बिहार विधान सभा के जब चुनाव (2016) हो रहे थे, तभी श्री मोदी ने नीतीश कुमार को लेकर कहा था कि उनका डीएनए ठीक नहीं है। नीतीश कुमार जी उस समय  लालू यादव और कांग्रेस के साथ महागठबंधन बनाये हुए थे। डीएनए के बारे में बिहार के जन सामान्य को भले ही जानकारी न हो लेकिन नीतीश कुमार ने इस प्रकार से उसे प्रस्तुत किया था कि बिहार की जनता को लगा कि श्री मोदी ने उसका अपमान किया है। बिहार विधान सभा चुनाव में भाजपा के पराजित होने का मुख्य कारण तो दोनों क्षेत्रीय दलों का एक साथ आना ही था लेकिन नरेन्द्र मोदी की डीएनए वाली टिप्पणी भी प्रभावी रही थी। श्री मोदी ने इससे सीख भी ली और जब गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेता मणि शंकर अय्यर ने श्री मोदी को अपनी हिन्दी अल्पज्ञता के चलते नीच आदमी कह दिया तो श्री मोदी ने गुजरात की पूरी जनता पर इसे लागू कर दिया था। गुजरात के 2017 के विधान सभा चुनाव में राहुल गांधी ने बहुत मेहनत भी की थी और जिग्नेश मेवानी, अल्पेश ठाकोर, जो अब कांग्रेस से अलग हो चुके हैं तथा हार्दिक पटेल को साथ लेकर भाजपा को लगभग घेर लिया था। लेकिन मणिशंकर अय्यर की नीच आदमी वाली टिप्पणी ने बाजी पलट दी थी। श्री मोदी ने लगभग रोते हुए गुजरात में कई जनसभाओं में कहा कि आपके गुजराती को कांग्रेस नीच कहती है, गुजराती क्या कभी नीच हो सकता है? इस तरह श्री मोदी ने सहानुभूति का ऐसा वातावरण बना दिया था जिससे राहुल गांधी के प्रयासों पर पानी फिर गया था। श्री मनोज तिवारी ने भी इस सफल फार्मूले को आजमाया है उन्होंने पूर्वी-उत्तरी दिल्ली में रहने वाले पूर्वाचल के लोगों को इसी तरह के आक्रोश से भर दिया है। कांग्रेस प्रत्याशी शीला दीक्षित से पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने इस प्रकार की टिप्पणी की थी।
दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविन्द केजरी वाल ने अपने प्रत्याशी दिलीप पांडेय के समर्थन में प्रचार करते हुए कहा कि मनोज तिवारी बहुत अच्छा नाचते हैं। दिलीप पांडेय को नाचना नहीं आता, काम करना आता है। इस बार काम करने वाले को वोट देना, नाचने वाले को वोट नहीं देना। अरविन्द केजरीवाल के बयान के कुछ ही घण्टे बाद मनोज तिवारी ने पलटवार किया था। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने केजरीवाल के इस बयान को पूर्वांचल के लोगों का अपमान बताया और कहा मुझे अपशब्द बोलकर श्री केजरीवाल पूर्वांचल के लोगों का अपमान कर रहे है और यही लोग (पूर्वांचल के लोग) इसका नतीजा भी श्री केजरीवाल को बताएंगे।
इस प्रकार उत्तर पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट पर चुनावी जंग काफी रोचक है। ये कोई पहला अवसर नहीं था जब मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने मनोज तिवारी पर विवादित बयान दिया हो। इससे पहले भी दिल्ली में एक जनसभा के दौरान केजरीवाल ने मनोज तिवारी को संबोधित करते हुए कहा था कि तुम होते कौन हो दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने वाले, तुम्हारे बाप की दिल्ली है। श्री मनोज तिवारी हालांकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ही आदर्श नेता के रूप में प्रस्तुत करते हैं श्री मोदी की बातों को ही दोहरा रहे है लेकिन जब हरियाणवी गायिका और नृत्यांगना सपना चैधरी के साथ स्वर और लय के साथ कहते है कि गली-गली में ये मुहूरत है, पांच साल और मोदी की जरूरत है तो विशेष रूप से पूर्वांचल के लोग झूम उठते हैं। यहां पूर्वाचल के मतदाता काफी है। (हिफी)

ममता को सुषमा की सीख
(अशोक त्रिपाठी-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
लोकसभा चुनाव में जब पांच चरणों का मतदान हो चुका है और दो-तिहाई सांसदों का भाग्य भी तय हो चुका होगा, तब नेताओं की बदजुबानी कुछ ज्यादा ही होने लगी है। पूर्वी भारत के राज्य पश्चिम बंगाल में एक बार फिर परिवर्तन की हवाएं तेज हो गयी हैं। इस राज्य की अथवा यह कहें कि यहां के निवासियों का तेवर ही कुछ अलग तरह का होता है। अंग्रेजों ने ईस्ट इंडिया कम्पनी बनाकर जब बंगाल में कदम रखे और साम्राज्यवाद का शिकंजा कसना शुरू किया तो सबसे तीखा विरोध बंगाल से ही हुआ था और ब्रिटिश हुकूमत ने सबसे पहला काम यही किया कि बंगाल के दो टुकड़े कर दिये थे। एक टुकड़ा तो पाकिस्तान के साथ जुड़ गया था जो अब बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है लेकिन दोनों टुकड़ों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वे अपना रास्ता अपने आप चुनते हैं। भारत में बंगाल ने कांग्रेस की सत्ता को बर्दाश्त नहीं किया। वामपंथियों ने भी जब अति कर दी तब ममता बनर्जी को सत्ता सौंपी। अब लोकसभा चुनाव में जनता का मूड फिर बदलता दिख रहा है। इसीलिए ममता बनर्जी भी कभी-कभी उत्तेजित हो जाती हैं। उन्होंने उत्तेजना में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए भी कुछ ऐसा कहा जिससे उनकी आलोचना हो रही है। विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने ममता दीदी को वशीर वद्र का एक शेर सुनाकर सीख देने का प्रयास किया है। विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने ममता बनर्जी से कहा -
दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जाएं तो शर्मिन्दा न हों
यह मामला विशेष रूप से तब चर्चा में आया जब प्रधानमंत्री मोदी ने ममता बनर्जी की सरकार पर तंज करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस सरकार को फिरौती सिंडीकेट चला रहा है। मामला गर्माया पहले से था और श्री मोदी के बारे में सभी जानते हैं कि विरोधी से भी अपने मन की बात कहलवा लेते हैं। वे इस तरह से छेड़ते हैं कि विपक्षी वही भाषा बोलने लगता है, जिससे श्री मोदी उस पर करारा जवाब दे सकें। फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार के साथ एक साक्षात्कार में श्री मोदी ने विपक्षी दलों के नेताओं के साथ संबंधों पर विशेष रूप से दो नेताओं का जिक्र किया। कांग्रेस के गुलामनवी आजाद के बारे में कहा कि मेरे अच्छे मित्र हैं, उनसे अक्सर बातें होती हैं। इसी प्रकार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी के बारे में कहा कि ममता दीदी अक्सर मेरे लिए बंगाली मिठाइयां भेजती हैं, मेरे लिए मनपसंद कुर्ते भी भिजवाती हैं। श्री मोदी ने इसका संदर्भ बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना से जोड़ा और कहा कि शेख हसीना मेरे लिए बांग्लादेश से मेरी पसंद की मिठाइयां भेजती थीं और जब यह जानकारी ममता दीदी को हुई तो उन्होंने भी मिठाइयां भिजवानी शुरू कर दीं।
मोदी जी जानते थे कि चुनाव के समय इस प्रकार की बातें ममता दीदी को उत्तेजित कर सकती हैं और वही हुआ भी। पहले तो ममता बनर्जी ने बंगाल की संस्कृति का हवाला दिया लेकिन जब बंगाली मिठाइयां और कुर्ते राजनीति का रूप लेने लगे तब ममता दीदी का गुस्सा भी सामने आया। उन्होंने कहा था कि अब की बार कंकड़-पत्थर की मिठाई भेजेंगे। श्री मोदी ने भी देख लिया कि लोहा गर्म है तो उन्होंने गत दिनों एक जनसभा में कह दिया तृणमूल कांग्रेस सरकार को फिरौती सिंडीकेट चला रहा है अर्थात ममता बनर्जी दूसरे राजनीतिक दलों के हाथों में खेल रही है। इस पर ममता दीदी का गुस्सा और भड़क उठा। ममता बनर्जी ने पुरूलिया के रघुनाथ पुर में आयोजित जनसभा में कहा - ‘मैं राजनीति में अपना सिर नहीं झुकाउंगी’ जब मोदी ने आरोप लगाया कि तृणमूल सिंडिकेट की पार्टी है, इसकी सरकार केा सिंडीकेट चला रहे हैं, मुझे लगा कि उन्हें (नरेन्द्र मोदी को) लोकतंत्र का एक करारा तमाचा लगना चाहिए।
यहां पर खास बात यह है कि लोकतंत्र का करारा तमाचा लगना चाहिए को मनमाने तरीके से पेश कर दिया गया। मीडिया में भी यही बात सामने आयी कि ममता दीदी कहती हैं कि मोदी को तमाचा लगना चाहिए हालांकि लोकतंत्र के करारे तमाचे से मतलब चुनाव में पराजय भी है। इस प्रकार पश्चिम बंगाल में शब्द बाण ज्यादा तीखे होते चले गये। ममता बनर्जी ने दुर्गा पूजा और अन्य हिन्दू अनुष्ठानों को न करने देने के आरोप का भी जवाब दिया। उन्होंने जनता से सवाल पूछा था कि क्या आप इन आरोपों पर भरोसा करेंगे। जय श्री राम का नारा लगाने वालों को खदेड़ने के आरोप का जवाब देते हुए कहा कि हम नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नारे को मानते हैं। वे जय हिन्द कहते थे। उन्होंने कहा कि जय श्री राम भाजपा का नारा है और वे हर व्यक्ति को यह नारा लगाने के लिए बाध्य करते है ममता बनर्जी ने चुनावी रैलियों में पूछा कि क्या चुनाव आने पर रामचंद्र भाजपा के चुनावी एजेन्ट बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा और नरेन्द्र मोदी जो चाहते है, वही बोलने के लिए किसी को मजबूर नहीं किया जा सकता। ममता ने कहा बंगाल में लोगों का नारा बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का बंदे मातरम और नेता जी सुभाष चंद्र बोस का ‘जय हिन्द’ नारा है। ममता बनर्जी ने बंगाल की संस्कृति की याद दिलायी।
बंगाल की संस्कृति कैसी रही है यह हम पहले ही बता चुके है और श्री नरेन्द्र मोदी भी यह बात जानते हैं। इसलिए पश्चिम बंगाल में भगवा कैसे फहराया जाए, इसके लिए सुनिश्चित रणनीति बनायी गयी है। इस रणनीति को प्रधानमंत्री श्री मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह इस तरह से लागू करते है कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस उसकी गिरफ्त में आ जाती है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसीलिए अपने गुस्से को दबा नहीं पाती हैं। वे कहती है कि मैं आपका नारा क्यों लगाऊं, मैं सड़े हुए मोदी या सड़ी हुई भाजपा का नाम नहीं जपूंगी। ममता बनर्जी कहती हैं कि जब हम दुर्गा पूजा करते हैं तब हम जय माँ दुर्गा कहते हैं और जब हम काली पूजा करते हैं तब हम जय मां काली कहते हैं। हम भाजपा की तरह हमेशा एक ही नारा नहीं देते हैं। इस प्रकार जय श्री राम को भाजपा का नारा बताने और इसी तरह के अन्य बयान देने से यह तो पता चलता ही है कि ममता दीदी को भाजपा व मोदी पर जबर्दस्त गुस्सा है।
इस गुस्से में वह शब्दों पर नियंत्रण भी खो देती है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ममता बनर्जी को आड़े हाथों लेते हुए चेतावनी दी है। उन्होंने कहा आपने (ममता बनर्जी) सारी हदें पार कर दी हैं। आप प्रदेश की मुख्यमंत्री हैं और श्री नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री है। कल आपको उन्हीं से बात करनी है, इसीलिए वशीर वद्र का एक शेर याद दिलाया। निश्चित रूप से यह शेर सभी के लिए एक नसीहत है क्योंकि हम आपा खोकर इस तरह का व्यवहार कर बैठते हैं जिससे बाद में शर्मिन्दा होना पड़ता है। हम ऐसा व्यवहार न करें। राजनीति में तो कहा ही जाता है कि कोई किसी का स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता है। ममता बनर्जी ने तो कांग्रेस के साथ भी सरकार चलायी है और अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार के साथ भी रही हैं। भविष्य में क्या होगा, यह सोचकर दुश्मनी करें ताकि दोस्ती होने पर शर्मिन्दा न होना पड़ा। (हिफी)

अध्याय-18 ;श्लोक 55 से 56द्ध
गीता ज्ञानधारा
(हिफी डेस्क-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
भगवद् गीता भारत के वेदान्त एवं उपनिषदों का सार है। इसमें मनुष्य जीवन के परम उद्देश्य-तत्व ज्ञान की प्राप्ति हेतु ज्ञान योग, कर्म योग, भक्ति योग तथा क्रिया योग का पूर्ण रूप से विवेचन हुआ है। मनुष्य यह समझ सके कि वह केवल यह देह नहीं अपितु आत्मा है जिसका परम लक्ष्य परमानन्द ईश्वर तक पहुंचना है, यही गीता का मूल उद्देश्य है। गीता मनुष्य जीवन की समस्याओं का समाधान भी करती है। इसे पढ़कर मनुष्य गृहस्थ जीवन में रहकर प्रसन्नतापूर्वक अपने कर्तव्यों का पालन करता हुआ अहंकार तिरोहित कर मोक्ष की प्राप्ति भी कर सकता है। प्रस्तुत लेख में भगवद् गीता के अध्याय-18 के श्लोक 55 से 56 का संत ज्ञानेश्वर द्वारा रचित भावार्थ लोकहित में प्रसारित किया जा रहा है।
भक्तया मामभिजानाति यावान्यश्चास्मि तत्त्वतः।
ततो मां तत्त्वतो ज्ञात्वा विशते तदनन्तरम्।।55।।
इस ज्ञान लक्षणात्मक भक्ति के साथ जो मुझसे एकरूप हो जाता है, वह केवल ‘मैं’ हूँ। ज्ञानी मेरी आत्मा है। वह भक्ति उत्तम है, इसलिए मैंने कल्प के प्रारम्भ में भागवत को निमित्त बनाकर ब्रह्मा को उपदेश दिया था। अब ज्ञानी लोग इसे ‘स्वसंविति’ कहते हैं, शैव इसे ‘शक्ति’ कहते हैं और हम इसे ‘परा भक्ति’ कहते हैं। यह भक्ति उस कर्म योगी को मुझसे एकरूप होते समय यही भक्ति का फल मिलता है। और तब उसे अनुभव होता है कि यह पूरा विश्व केवल मेरे अधिष्ठान से भरा हुआ है। तब वैराग्य विवेक के साथ नष्ट हो जाता है, बन्धन और मोक्ष भी नष्ट हो जाता है, और ब्रह्माकार वृत्ति के साथ नष्ट हो जाती है क्योंकि नष्ट करने के लिए और कुछ भी शेष नहीं रहता। जिस प्रकार पृथ्वी, जल, तेज और वायु चारों भूतों को निगलकर, केवल आकाश ही बाकी बच जाता है, उसी प्रकार साधन और साधन की सीमा के उस पार जो निर्मल और निर्दोष तत्व ‘मैं हूँ’ उसके ही साथ मिलकर तथा एक रूप होकर वह पुरूष आत्मानन्द का अनुभव करता है। जो मद्रूप नहीं हुआ है वह मुझे जानभी कैसे सकता है? अद्वैत की स्थिति में कोई क्रिया नहीं होने पर भी मेरी भक्ति की जा सकती है। यह बात केवल अनुभव जन्य है, शब्दों में नहीं समझाई जा सकती। ऐसा पुरूष मौन रहकर ही मेरी स्तुति करता है। जो पुरूष मेरे स्वरूप का बन जाता है उसमें चाहे कभी अहंता का स्फुरण हो तो भी वह सर्वभाव से मुझमें ही समाया रहता है। ऐसा पुरूष यदि कोई कर्म करता है तो कर्म के करने से ‘मैं’ ही उसे मिल जाता हूँ। जब काम करते हुए इस बात का ध्यान ही नहीं आता कि ‘मैं कर्ता हूँ’ इसलिए उसकी सब क्रियाएँ अक्रिया के समान बन जाती हैं। वह जो कुछ बोले वह ‘मेरी’ स्तुति हो जाती है, जो देखे, वह ‘मेरा’ दर्शन हो जाता है, जब चले तो मुझ अद्वय की यात्रा है। पानी में तरंग, कपूर में परिमल और रत्न में तेज जैसे भिन्न नहीं होता, उसी प्रकार ‘मेरा’ भक्त मुझसे ऐक्य पाता है। रस्सी अपने स्वरूप में दिखाई देने पर उसे विश्वास हो जाता है कि सर्पाकार दिखाई देने वाली वस्तु रस्सी ही है। पानी पर उठने वाली तरंगों में पानी के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं है, इस बात को निश्चित रूप से जानकर जो उसके आकार के भुलावे में नहीं आता, उसी प्रकार वह पुरूष भाव से या अभाव रूप से जो कुछ भी ज्ञेय रूप में देखता है उसके सम्बन्ध में वह यही जानता है कि सब कुछ मैं ही हूँ। और यही अनुभव करते हुए वह उन चीजों का उपभोग करता है। वह जानता है कि मैं अजन्मा, जन्म रहित हूँ, मैं नाश रहित हूँ, मैं व्यय रहित हूँ, मै अनादि हूँ, मैं  आनन्दमयहूँ,  मैं अचल हूँ, अच्युत हूँ, अद्वय हूँ, निराकर भी हूँ, और साकार भी हूँ, मैं ईश्य भी हूँ, और ईश्वर भी हूँ, अनादि, अविनाशी, निर्भय आधार और उस पर ठहरने वाली वस्तु भी मैं हूँ, मैं सबका अधिपति हूँ, तथा सर्वत्र अधिष्ठान रूप में उपस्थित तथा सबसे अलग मैं हूँ। मैं सबसे नया तथा सबसे पुराना हूँ, शून्य भी हूँ, और पूर्ण भी हूँ। बड़ा भी मैं हूँ और अणु से भी सूक्ष्म कुछ है, तो वह मैं हूँ। मैं क्रिया रहित हूँ, भेद रहित हूँ। मैं संज्ञा रहित हूँ, और शोक रहित हूँ। व्याप्त होने वाला और व्याप्त करने वाला पुरूषोत्तम मैं ही हूँ। मैं शब्दातीत हूँ एवं कर्ण रहित हूँ। मैं रूप रहित कुल गोत्र रहित हूँ। मैं सर्वत्र, समान रूप से समव्याप्त हूँ और स्वतन्त्र हूँ। सब में श्रेष्ठ परब्रह्म मैं हूँ। द्वैत और अद्वैत से परे जो एकमेवाद्वितीय आत्मा है, वह निःसन्देह मैं ही हूँ, और यह जानने के बाद वह ज्ञान भी वहीं विलीन हो जाता है। जिस प्रकार एक में से एक घटाने पर शेष शून्य रह जाता है, उसी प्रकार ‘है’ और ‘नहीं है’ इस सापेक्ष भावों को घटाने पर जो बच रहा है, वह ‘मैं हूँ।’ ऐसी अवस्था मंे यह एक ब्रह्म है, यह एक आत्मा है, यह एक ईश्वर है, यह कहने का अवकाश ही नहीं रह जाता। उस समय बिना कुछ कहे या मुँह से बिना कोई शब्द निकाले ही खूब जी भर कर ‘नहीं’ कहा जा सकता है और ज्ञान तथा अज्ञान का कोई ज्ञान न होने पर भी उसे अच्छी तरह जाना जाता है। ऐसी स्थिति में बोध से ही बोध को जानना चाहिए, आनन्द से ही आनन्द का उपयोग करना चाहिए और सुख से ही सुख का अनुभव लेना चाहिए। हे अर्जुन! इस प्रकार का कर्म योग की इतनी महिमा है। मैं कर्मयोग के द्वारा ही प्राप्त होता हूँ। एक गुरू होता है और एक शिष्य होता है, लेकिन यह केवल मेरी प्राप्ति का मार्ग जानने के लिए है। पृथ्वी के गर्भ में सम्पत्ति है, काष्ठ में अग्नि विद्यमान है किन्तु वह उसके ही लिए है जो उसे प्राप्त कर सकता है, उसी प्रकार मैं तो वास्तव में स्वयं सिद्ध हूँ किन्तु उपायों से साध्य होता हूँ। हवा सूर्य को ढकने वाले बादलांे को दूर करती है, किन्तु नया सूर्य उत्पन्न नहीं करती। हाथ पानी पर जमी सेवार को दूर कर सकता है किन्तु नए पानी का निर्माण नहीं करता क्योंकि वह स्वतः सिद्ध है, उसी प्रकार आत्म दर्शन में बाधा उत्पन्न करने वाला जो अविद्या का मल है, उसे शास्त्र दूर कर सकते हैं किन्तु मैं सदा स्वयं प्रकाशित और निर्मल ही रहता  हूँ, इसलिए सारे शास्त्र अविद्या का नाश करने में सक्षम हैं। इसके अतिरिक्त उनमें आत्मबोध कराने का सामथ्र्य नहीं हैं उन अध्यात्म शास्त्रों से जब सत्यता सिद्ध करने का प्रसंग आता है तो वे गीता की ही ओर इंगित करते हैं। सूर्य जब पूर्व दिशा को अपने प्रकाश से अलंकृत करता है, तब अन्य सभी दिशाएँ भी अपने आप प्रकाशित हो जाती हैं, उसी प्रकार सारे शास्त्रों के लिए आधारभूत जो गीता है, उसके कारण शेष सभी शास्त्र समर्थ होते हैं। गीता शास्त्र का प्रमुख उद्देश्य है- अविद्या का नाश और मोक्ष की प्राप्ति और दोनों का ही साधन ‘ज्ञान’ है। इसी विषय को इस विशाल ग्रन्थ में अनेक प्रकार से विस्तार में स्पष्ट किया गया है।

सर्वकर्माण्यपि सदा कुर्वाणो मद्व्यपाश्रयः।
मत्प्रसादादवाप्रोति शाश्वतं पदमव्ययम्।।56।।
हे अर्जुन! वह कर्म योगी निष्ठा से मद्रूप होकर मेरे स्वरूप में मिल जाता है। स्वकर्मानुरूपी सुन्दर पुष्पों से मेरी पूजा कर उससे प्राप्त प्रसाद से वह ‘ज्ञान निष्ठा’ प्राप्त कर लेता है। जिसे वह ज्ञान निष्ठा प्राप्त हो जाती है, वहाँ मेरी परम भक्ति सहज ही उल्लासित और अभिव्यक्त होती है और उस भजन भक्ति से वह मेरे साथ समरस होकर नितान्त सुखी होता है और विश्व को प्रकाशित करने वाला जो मैं आत्मा हूँ उसका वह भावपूर्वक अनुसरण करता है। जो बुद्धि, वाचा और मन से मेरा आश्रय लेकर रहता है, वह कभी-कभार निषिद्ध कर्म भी करे, किन्तु जिस प्रकार गंगा के साथ सम्पर्क हो जाने पर गन्दे पानी का और महानदी का प्रवाह मिलकर एक हो जाता है, उसी प्रकार मेरा आश्रय करने वाले भक्त को मेरा यथार्थ ज्ञान हो जाने के बाद उसे शुभ-अशुभ कर्मों का फल नहीं भोगना पड़ता। शुभ-अशुभ का भेद तभी तक रहता है जब तक मेरे सर्वव्यापी प्रकाश की प्राप्ति न हो जाए। और वह सचमुच मोक्ष के पद पर आसीन हो जाता है। यह वह पद है जो देश काल ओर स्वभाव से कभी नष्ट नहीं होता। (हिफी)

 
(हिफी डेस्क-हिन्दुस्तान समाचार फीचर सेवा)
राखी सावंत की विवादास्पद तस्वीर
सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाली राखी सावंत ने पाकिस्तान के झंडे के साथ पोज देते हुए फोटोज पोस्ट की हैं। इसी को लेकर यूजर्स उन्हें ट्रोल करते हुए काफी भला बुरा कह रहे हैं। हालांकि राखी ने अपनी इस तस्वीरों को पोस्ट करते हुए साफ कर दिया है कि है वो अपने देश भारत से प्यार करती हैं. दरअसल राखी इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म धारा-370 की शूटिंग कर रही हैं. ऐसे में उन्होंने सेट से अपनी ये तस्वीरें पोस्ट की है. पाकिस्तान के झंडे के साथ तस्वीर पोस्ट करते हुए राखी ने लिखा, आई लव माई इंडिया लेकिन ये फिल्म धारा 370 में मेरा किरदार है।
राखी ने अपनी इस तस्वीरों को पोस्ट करते हुए साफ कर दिया है कि है वो अपने देश भारत से प्यार करती हैं. दरअसल राखी इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म धारा-370 की शूटिंग कर रही हैं. ऐसे में उन्होंने सेट से अपनी ये तस्वीरें पोस्ट की है. पाकिस्तान के झंडे के साथ तस्वीर पोस्ट करते हुए राखी ने लिखा, आई लव माई इंडिया लेकिन ये फिल्म धारा 370 में मेरा किरदार है। राखी ने मैचिंग गोल्डन नोज पिन और हाथफूल कैरी किया है. इस दौरान उन्होंने रेड लिप्स के साथ बोल्ड मेकअप किया हुआ है. हेयरस्टाइल की अगर बात करें तो राखी ने सेंटर पार्टिंग के साथ बालों को कर्ल करके खुला छोड़ा है। राखी ने इस फिल्म से जुड़ी कई फोटोज और वीडियोज शेयर किए हैं।


ऋतिक-कंगना विवाद गर्म
कंगना रनौत की बहन रंगोली ने ऋतिक रौशन पर निशाना साधा और कहा- अब तू देख बेटा तेरा क्या हाल होगा। दर असल कंगना रनौत और ऋतिक रौशन के बीच विवाद शांत होने का नाम नहीं ले रहा है. दोनों ही कलाकारों की फिल्में एक ही तारीख पर रिलीज होने की वजह से दोनों के रिश्तों की कड़वाहट एक बार फिर सामने आ गई है। 
मेंटल है क्या और सुपर 30 की रिलीज डेट क्लैश होने से नाराज कंगना रनौत की बहन रंगोली ने अपने ट्विटर अकाउंट पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने ऋतिक रौशन पर कंगना के खिलाफ निगेटिव पीआर करने का आरोप लगाया है. कंगना रनौत का पीआर संभालने वाली रंगोली ने लिखा कि ऐसे शख्स से क्या उम्मीद की जा सकती है जो युद्ध के मैदान में मिलने के बजाय पीठ पर वार करना पसंद करता हो. जितना तू और तेरा पीआर गिरेगा, उतना ही... अब तक इस बारे में नहीं सोचती थी मगर अब तू देख...। रंगोली ने इसके बाद लगातार कई सारे ट्वीट्स किए। उन्होंने अपने अकाउंट पर लिखा तू अपने चिल्लर पीआर से ट्वीट करवाते रहे. वो एक इंटरव्यू देगी और तू चारों खाने चित।
रंगोली ने लिखा कि कंगना रनौत ने एकता कपूर को 26 जुलाई को मेंटल है क्या रिलीज नहीं करने के लिए कहा था लेकिन एकता ने कहा था कि एक निर्माता के रूप में उन्हें फिल्म की रिलीज डेट तय करने का अधिकार रखती है. फिर वो अपने बचपन के दोस्त ऋतिक रोशन से मिली थी और फिर दोनों ने मिलकर यह निर्णय लिया।
आम्रपाली का धमाकेदार डांस
भोजपुरी सिनेमा की क्वीन आम्रपाली दुबे अपने डांस और एक्टिंग के लिए जानी जाती हैं। उनके वीडियो सोशल मीडिया पर अक्सर वायरल होते रहते हैं। आम्रपाली दुबे का फिर एक वीडियो गदर काटे हुए है. इस वीडियो में वो एक गाने की शूटिंग कर रही हैं. इस भोजपुरी सॉन्ग पर वो धमाकेदार डांस कर रही हैं. सोशल मीडिया पर खासी एक्टिव रहने वाली आम्रपाली दुबे  ने यह वीडियो अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम पर शेयर किया है. उनके इस डांस वीडियो को अभी तक लाखों लोग देख चुके हैं और इसे देखने का सिलसिला अभी जारी है. कुल मिलाकर आम्रपाली दुबे के डांस वीडियो ने कोहराम मचा दिया है। उन्होंने भवन कॉलेज, मुंबई से स्नातक की उपाधि प्राप्त की. अपनी पढ़ाई के दौरान प्रारंभ में वह एक डॉक्टर बनना चाहती थी, लेकिन बाद में उन्होंने अपने करियर को अभिनय के क्षेत्र में आगे बढ़ाया उन्होंने रहना है तेरी पलकों की छांव में में सुमन के रूप में मुख्य भूमिका निभाई।

अनन्या पांडे ने दिखायी प्रतिभा
स्टूडेंट ऑफ द इयर 2’ की पूरी स्टार कास्ट पॉप्युलर कमीडियन कपिल शर्मा के शो पर फिल्म के प्रमोशन के लिए पहुंची थी। फिल्म के स्टार्स टाइगर श्रॉफ, अनन्या पांडे और तारा सुतारिया कपिल के शो पर जमकर मस्ती करते नजर आए थे। कपिल और बाकी कलाकारों के साथ इन स्टार्स की मस्ती देखकर सभी को काफी मजा आया। की प्रतिभा भी देखने को मिली। कपिल शर्मा ने अनन्या पांडेय से पूछा कि ऐक्टिंग के अलावा आपके पास कोई और टैलंट है। कपिल के इस सवाल पर अनन्या ने जो जवाब दिया वह काफी दिलचस्प था। अनन्या ने कहा कि वह अपनी जीभ से अपने नाक को छू सकती हैं। इस पर कपिल ने अनन्या को क्यूट कहा। इसके बाद अनन्या ने अपनी जीभ से अपने नाक को छूने लगीं। अनन्या के इस टैलंट को देखकर शो पर मौजूद सभी दर्शक हैरान रह गए।
टाइगर ने भी पापा जैकी श्रॉफ और अर्चना पूरण सिंह को लेकर एक मजेदार खुलासा किया। अर्चना ने टाइगर के पिता जैकी श्रॉफ से जुड़ी एक कहानी दर्शकों को सुनाई। अर्चना ने बताया कि कैसे उनके पिता जैकी श्रॉफ के पास उनका 5 रुपया बकाया है। अर्चना ने कहा, ‘जग्गू दादा (जैकी श्रॉफ) किसी मांगने वाले को खाली हाथ नहीं लौटते थे। जब हम संघर्ष कर रहे थे, तब एक दिन एक भिखारी उनके पास आया, तब उन्होंने मुझसे पांच रुपए मांगें और भिखारी को दे दिए।’


Browse By Tags


Related News Articles