एतिहाद की बोली से बैंकों को निराशा 
| Agency - 16 May 2019


एतिहाद की बोली से निराश बैंकों ने जेट एयरवेज के लिए दूसरे निवेशकों से बात करना शुरू कर दिया है। बैंकों की ओर से एसबीआई कैप्स ने डार्विन ग्रुप से बातचीत की। डार्विन ग्रुप ने 10 मई को अंतिम दिन बोली सौंपी थी। हालांकि शुरुआती बोली में कंपनी ने हिस्सा नहीं लिया था। डार्विन ग्रुप का दावा है कि उसके पास 14 हजार करोड़ रुपये तक का निवेश करने की क्षमता है। डार्विन ग्रुप का यह भी दावा है कि जेट एयरवेज को फिर से शुरू करने के लिए एतिहाद से भी बातचीत हो रही है। कैप्स ने डार्विन ग्रुप की वित्तीय स्थिति साबित करने के लिए ठोस सबूत पेश करने को कहा है। उसके बाद ही डार्विन ग्रुप को जेट एयरवेज के बही खातों और संपत्तियों की पड़ताल कर अपनी राय बनाने का मौका दिया जाएगा।
जेट एयरवेज के लिए बैंक दूसरी सीधी बोली वाली कंपनियों से भी संपर्क में हैं। दरअसल बैंक जेट एयरवेज के लिए अब सभी तरह के निवेशकों के प्रस्ताव को सुनने के लिए तैयार हैं। दरअसल एतिहाद ने  सौंपी अपनी बोली में ऐसी शर्तें रखी हैं जिसे मानना बैंकों के लिए मुमकिन नहीं लग रह है। ऐसे में अब दूसरे निवेशकों के प्रस्तावों को भी बैंक जांच परख रहे हैं। अब तक डार्विन ग्रुप के अलावा आदि पार्टनर्स और ब्रिटिश कारोबारी जैनसन अन्सवर्थ ने भी हिस्सा खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। बैंक कैपिटल और इंडिगो पार्टनर्स से फिर से बातचीत करने पर विचार कर रहे हैं।
सेंट्रल बैंक पर एनपीए की मार
 सार्वजनिक क्षेत्र के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया  का घाटा वर्ष 2018-19 की चैथी तिमाही में बढ़कर 2,477.41 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। बैंक के फंसे कर्ज के एवज में प्रावधान राशि बढ़ने की वजह से बैंक का घाटा बढ़ा है। बैंक को इससे पहले वर्ष 2017-18 की इसी तिमाही में 2,113.51 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। हालांकि, तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2018) में बैंक को 718.23 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।
केंद्रीय बैंक ने नियामकीय सूचना में यह जानकारी देते हुए कहा कि मार्च में समाप्त तिमाही में उसकी कुल आय पिछले वर्ष की इसी अवधि के 6,301.50 करोड़ रुपये के मुकाबले बढ़कर 6,620.51 करोड़ रुपये हो गई. पूरे वित्त वर्ष 2018- 19 की यदि बात करें तो बैंक का घाटा बढ़कर 5,641.48 करोड़ हो गया। जो कि इससे पिछले वर्ष में 5,104.91 करोड़ था। वर्ष के दौरान बैंक की आय भी एक साल पहले के 26,657.86 करोड़ रुपये से घटकर 25,051.51 करोड़ रुपये रह गई।
बैंक की मार्च 2019 अंत में सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) उसके कुल अग्रिम का 19.29 प्रतिशत रह गई जो कि इससे पिछले वर्ष में 21.48 प्रतिशत थी। बैंक का शुद्ध एनपीए यानी शुद्ध फंसा कर्ज पहले के 11.10 प्रतिशत से घटकर 7.73 प्रतिशत रह गया. वर्ष 2018-19 की मार्च तिमाही के दौरान फंसे कर्ज के एवज में 4,523.57 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया जो कि साल भर पहले की अवधि में 4,832.47 करोड़ रुपये था।

एतिहाद की बोली से निराश बैंकों ने जेट एयरवेज के लिए दूसरे निवेशकों से बात करना शुरू कर दिया है। बैंकों की ओर से एसबीआई कैप्स ने डार्विन ग्रुप से बातचीत की। डार्विन ग्रुप ने 10 मई को अंतिम दिन बोली सौंपी थी। हालांकि शुरुआती बोली में कंपनी ने हिस्सा नहीं लिया था। डार्विन ग्रुप का दावा है कि उसके पास 14 हजार करोड़ रुपये तक का निवेश करने की क्षमता है। डार्विन ग्रुप का यह भी दावा है कि जेट एयरवेज को फिर से शुरू करने के लिए एतिहाद से भी बातचीत हो रही है। कैप्स ने डार्विन ग्रुप की वित्तीय स्थिति साबित करने के लिए ठोस सबूत पेश करने को कहा है। उसके बाद ही डार्विन ग्रुप को जेट एयरवेज के बही खातों और संपत्तियों की पड़ताल कर अपनी राय बनाने का मौका दिया जाएगा।
जेट एयरवेज के लिए बैंक दूसरी सीधी बोली वाली कंपनियों से भी संपर्क में हैं। दरअसल बैंक जेट एयरवेज के लिए अब सभी तरह के निवेशकों के प्रस्ताव को सुनने के लिए तैयार हैं। दरअसल एतिहाद ने  सौंपी अपनी बोली में ऐसी शर्तें रखी हैं जिसे मानना बैंकों के लिए मुमकिन नहीं लग रह है। ऐसे में अब दूसरे निवेशकों के प्रस्तावों को भी बैंक जांच परख रहे हैं। अब तक डार्विन ग्रुप के अलावा आदि पार्टनर्स और ब्रिटिश कारोबारी जैनसन अन्सवर्थ ने भी हिस्सा खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। बैंक कैपिटल और इंडिगो पार्टनर्स से फिर से बातचीत करने पर विचार कर रहे हैं।
सेंट्रल बैंक पर एनपीए की मार
 सार्वजनिक क्षेत्र के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया  का घाटा वर्ष 2018-19 की चैथी तिमाही में बढ़कर 2,477.41 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। बैंक के फंसे कर्ज के एवज में प्रावधान राशि बढ़ने की वजह से बैंक का घाटा बढ़ा है। बैंक को इससे पहले वर्ष 2017-18 की इसी तिमाही में 2,113.51 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। हालांकि, तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2018) में बैंक को 718.23 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।
केंद्रीय बैंक ने नियामकीय सूचना में यह जानकारी देते हुए कहा कि मार्च में समाप्त तिमाही में उसकी कुल आय पिछले वर्ष की इसी अवधि के 6,301.50 करोड़ रुपये के मुकाबले बढ़कर 6,620.51 करोड़ रुपये हो गई. पूरे वित्त वर्ष 2018- 19 की यदि बात करें तो बैंक का घाटा बढ़कर 5,641.48 करोड़ हो गया। जो कि इससे पिछले वर्ष में 5,104.91 करोड़ था। वर्ष के दौरान बैंक की आय भी एक साल पहले के 26,657.86 करोड़ रुपये से घटकर 25,051.51 करोड़ रुपये रह गई।
बैंक की मार्च 2019 अंत में सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) उसके कुल अग्रिम का 19.29 प्रतिशत रह गई जो कि इससे पिछले वर्ष में 21.48 प्रतिशत थी। बैंक का शुद्ध एनपीए यानी शुद्ध फंसा कर्ज पहले के 11.10 प्रतिशत से घटकर 7.73 प्रतिशत रह गया. वर्ष 2018-19 की मार्च तिमाही के दौरान फंसे कर्ज के एवज में 4,523.57 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया जो कि साल भर पहले की अवधि में 4,832.47 करोड़ रुपये था।


Browse By Tags