फिर भाजपामय हुई दिल्ली
| Agency - 28 May 2019


कांग्रेस की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को अब अपनी-अपनी रणनीति के बारे में फिर से सोचना पड़ेगा। लोकसभा चुनाव के नतीजे बता रहे हैं कि अगर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों के मतों को जोड़ भी लिया जाए तो भी भाजपा के प्रत्याशी पराजित नहीं होते। भाजपा ने 2014 के चुनाव में सातों सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस बार पांच प्रत्याशी दुबारा उतारे गये थे और दो पर नये चेहरे लाये गये। दिल्ली की जनता ने संसद का प्रतिनिधित्व भाजपा को ही सौंपा है। पार्टी ने प्रत्याशी सोच समझकर उतारे थे लेकिन दिल्ली प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी की भूमिका को भी नजरंदाज नहीं किया जा सकता। मनोज तिवारी खुद भी मैदान में थे और उनका मुकाबला भी कांग्रेस की दिग्गज नेता और दिल्ली की तीन बार मुख्यमंत्री रह चुकीं श्रीमती शीला दीक्षित से था। मनोज तिवारी ने श्रीमती शीला दीक्षित को पराजित किया है। दिल्ली फिर भाजपामय हो गयी जबकि प्रदेश में प्रचण्ड बहुमत से सरकार बनाने वाले अरविन्द केजरीवाल की पार्टी-आम आदमी पार्टी को एक भी सांसद नहीं मिला। केजरीवाल को लगता है, इसका आभास चुनाव से पहले हो गया था। उनकी पार्टी और सरकार पर कई आरोप लगे। पार्टी बिखर भी गयी थी। लोकसभा चुनाव में केजरीवाल चाहते थे कि कांग्रेस सीटों पर समझौता करके चुनाव लड़े। कांग्रेस के नेता कपिल सिब्बल और कुछ अन्य समझौते के पक्षधर थे लेकिन राहुल गांधी ने श्रीमती शीला दीक्षित पर भरोसा किया। यह भरोसा गलत साबित हुआ। उधर, भाजपा ने मनोज तिवारी पर भरोसा किया था, वो सही साबित हुआ है। मनोज तिवारी ने दिल्ली की सीट पर 15 वर्षों तक काबिज रहीं श्रीमती शीला दीक्षित को 3 लाख 65 हजार मतों से पराजित किया है।
उत्तर पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट पर माना कि पूर्वांचल के लोग ज्यादा रहते हैं लेकिन श्री मनोज तिवारी के सामने कांग्रेस ने श्रीमती शीला दीक्षित को खड़ा कर दिया था। मनोज तिवारी ने श्रीमती शीला दीक्षित को पराजित करते हुए 56 फीसदी वोट हासिल किये हैं। स्वाभाविक है कि दिल्ली में भाजपा की प्रचण्ड जीत के बाद मनोज तिवारी बहुत उत्साहित हैं। साथ ही वह अपनी आगे की महती भूमिका को भी समझ रहे हैं। उनका लक्ष्य अब दिल्ली विधान सभा के चुनाव में भाजपा को इसी तरह के बहुमत से विजय दिलाना है।
वह कहते हैं कि एक सांसद के रूप में मोदी जी को ही प्रधानमंत्री बनाने के उद्देश्य से भले ही उनकी जीत हुई हो लेकिन दिल्ली भाजपा अध्यक्ष के रूप में उनकी जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ गयी है। मनोज तिवारी की जिम्मेदारी है दिल्ली में भाजपा की सरकार बनवाना। लगभग 20 साल से दिल्ली में भाजपा की सरकार नहीं बन पायी है। मनोज तिवारी ने साफ कहा है कि अब अगला लक्ष्य दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार है। केजरीवाल की सरकार को लेकर श्री तिवारी कहते हैं कि उन्होंने वादे तो बहुत किये लेकिन दिल्ली को दिल्ली नहीं बना सके। दिल्ली अर्थात् देश की राजधानी में जो सुविधाएं जनता को मिलनी चाहिए, वे नहीं मिल पा रही हैं।

 

मनोज तिवारी कहते हैं कि वे दिल्ली को पेरिस अथवा संघाई नहीं बल्कि ऐसी दिल्ली बनाना चाहते हैं जहां लोग बिना प्रदूषण के जी सकें। दिल्ली को साफ-सुथरा बनाना है और लोगों के जीवन में परिवर्तन लाना है। अब 6 महीने बाद ही दिल्ली में विधान सभा चुनाव होने हैं, जिसमें केजरीवाल की सरकार को सत्ता से बेदखल कर भाजपा की डबल इंजन सरकार बनाना है। दिल्ली में विधानसभा चुनाव की चर्चा तेज हो गयी है। आम आदमी पार्टी भी लोकसभा चुनाव का बदला विधान सभा चुनाव में लेना चाहेगी। दिल्ली सरकार के मंत्री गोपाल राय ने पत्रकारों से वार्ता में कहा कि दिल्ली में आज भी केजरीवाल का विकल्प नहीं है। हालांकि आम आदमी पार्टी को जिस तरह से मत मिले हैं, उसके आधार पर तो गोपाल राय की बात आधार हीन लगती है। इसीलिए भाजपा के नेता विजेन्द्र गुप्ता ने जवाब दिया कि आम आदमी पार्टी के नेता इसी तरह का बयान देकर जनता को भ्रमित करने का कार्य  करते हैं। केजरीवाल का कोई विकल्प नहीं है, यह कहना अत्यन्त भ्रामक है। गुप्ता ने कहा कि यह कहकर आप नेता शेख चिल्ली की कहावत को ही चरितार्थ कर रहे हैं। भाजपा विधायक ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने अपने लगभग चार वर्ष के कार्यकाल में दिल्ली के विकास को काफी पीछे धकेल दिया है। इसीलिए भाजपा ने आगामी विधान सभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं और केजरीवाल सरकार की असफलताओं और कुशासन का पर्दाफाश किया जाएगा। यह काम अभी से शुरू होगा क्योंकि भाजपा नहीं चाहती श्री केजरीवाल और उनकी पार्टी के नेता दिल्ली की जनता को भ्रमित करें। विशेष रूप से दिल्ली की जनता को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने का जो सब्जबाग दिखाया जा रहा है, उसकी सच्चाई बताई जाएगी।
दिल्ली के चांदनी चैक से लोकसभा का चुनाव लड़े केन्द्रीय मंत्री डा0 हर्षवर्द्धन सिंह ने मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल पर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के वादे को लेकर ही हमला बोला है। डा0 हर्षवर्द्धन सिंह ने चांदनी चैक सीट से 22800 वोटों से जीत दर्ज की है। इसी सीट से वह दोबारा सांसद बने हैं। दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के बारे में वह कहते हैं कि जब तक दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल मुख्यमंत्री हैं तब तक इसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता। डा0 हर्ष वर्द्धन कहते हैं कि यह बेहद संवेदनशील मामला है और मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए जो व्यक्ति खुद को अराजक तत्व बताने में गर्व महसूस करे, उसके कार्यकाल में अगर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दे दिया गया तो दिल्ली के हालात बेहद खराब हो सकते हैं। डा0 हर्ष वर्द्धन ने यह भी कहा कि भाजपा को दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों पर जिस तरह से विजय मिली है, वो इस बात का ठोस सबूत है कि दिल्ली की जनता ने एक बार फिर भाजपा पर ही भरोसा जताया है और पिछले विधानसभा चुनाव में दिल्ली की जनता भ्रमित हो गयी थी। यही कारण है कि लोकसभा चुनाव मंे राज्य की 70 विधानसभा सीटों में से किसी पर भी आम आदमी पार्टी को बढ़त नहीं मिली।
दिल्ली की सबसे वीआईपी सीट नई दिल्ली से भाजपा की मीनाक्षी लेखा ने 54.77 फीसद मत पाकर अपने निकटतम प्रतिद्वन्दी कांग्रेस के अजय माकन को पराजित किया है। मीनाक्षी लेखी को 504206 मत मिले जबकि कांग्रेस के अजय यादव को 24772 मत ही मिल सके। तीसरे स्थान पर आम आदमी पार्टी के बृजेश गोयल रहे हैं जिनको 150342 मत मिले हैं। आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी बृजेश गोयल के मतों को कांग्रेस प्रत्याशी अजय मानक को मिले मतों में जोड़ दिया जाए तब भी भाजपा की मीनाक्षी लेखी भारी पड़ती हैं। राजनीतिक जानकार कह सकते हैं कि राजनीति में हमेशा दो और दो चार नहीं होते हैं। इसलिए दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन करके चुनाव लड़तीं तो नतीजे कुछ और हो सकते थे। यहां पर भाजपा नेता डा0 हर्षवर्द्धन सिंह की इस बात पर गौर करना होगा कि हमने दिल्ली में घर-घर जाकर मतदाता के दुख-सुख को सुना है। जनता के मन में यह बात बैठ गयी है कि श्री मोदी से बेहतर प्रधानमंत्री आज की तारीख में कोई नहीं है। इसलिए जनता जनार्दन का यह फैसला है। श्री मोदी की नीतियां क्या है। इनके बारे में जनता को जागरुक करने के बारे में मनोज तिवारी की टीम ने कार्य किया है। 

 


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