अयोध्या विवाद पर आया सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
| Agency - 09 Nov 2019

 

नई दिल्ली। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि विवादित ढांचे की जमीन हिंदुओं को दी जाए। मुसलमानों को मस्जिद के लिए दूसरी जगह मिलेगी। कोर्ट ने इस मामले में निर्माेही अखाड़े का दावा खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान बेंच ने यह फैसला सुनाया। संविधान बेंच के बाकी सदस्यों में जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस वाई चन्द्रचूड, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर भी शामिल थे। संविधान पीठ ने अयोध्या में 2.7 एकड़ विवादित जमीन तीन पक्षकारों यानी सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्माेही अखाड़ा और रामलला विराजमान के बीच बराबर-बराबर बांटने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के सितंबर, 2010 के फैसले को रद्द कर दिया। यह सुनवाई उसी फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर आया है।

   

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि हम आस्था या विश्वास के आधार पर कोई फैसला नहीं कर रहे। इस आधार पर जमीन के टुकड़े के मालिकाना हक का फैसला नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा है कि एएसआई की खुदाई में इस बात के पक्के सबूत मिले हैं कि वहां मंदिर था। मुस्लिम पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि वहां मस्जिद बनाई गई थी। यह मस्जिद कब बनी थी, इसका कोई सबूत नहीं है। यह साबित होता है कि वहां 1856-57 में पूजा होती थी। वहां पूजा के लिए रेलिंग भी मिली है। मुस्लिम पक्ष ने भी माना है कि रेलिंग थी लेकिन उनका कहना है कि रेलिंग हिन्दुओं की पूजा और मुस्लिमों की इबादत के लिए थी। कोर्ट ने कहा कि 1949 में यहां आखिरी बार नमाज पढ़ी गई थी।

आपको बता दें कि अयोध्या विवाद की शुरुआत वर्ष 1950 में हुई थी जब खुदाई में भगवान राम की मूर्तियां विवादित ढांचे में पाई गई थीं। हिंदुओं का दावा था कि यही भगवान राम का जन्मस्थान है और भगवान राम प्रकट हुए हैं जबकि मुस्लिमों ने कहा था किसी ने रात में चुपचाप मूर्तियां वहां रख दीं। यूपी सरकार ने मूर्तियां हटाने का आदेश दिया था। बाद में इसे विवादित स्थल मानकर ताला लगवा दिया गया था।

 

 


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