यूनियन कार्बाइड संदूषण के शिकार डॉव केमिकल से मुफ्त स्वास्थ्य देखभाल, स्वच्छ ऊपर और मुआवजा की मांग
| Agency - 04 Dec 2019

चार स्थानीय संगठनों की अगुआई में यूनियन कार्बाइड के ज़हरीली कचरे से प्रदूषित भूजल के पीड़ितों ने आज परित्यक्त कीटनाशक कारखाने के पास मानव श्रृंखला बनाकर प्रदर्शन किया | भोपाल में यूनियन कार्बाइड हादसे की 35वीं बरसी के पहले इस प्रदर्शन के ज़रिए प्रदूषित भूजल पीड़ितों ने मुफ्त इलाज, प्रदूषित इलाके की ज़हर सफाई और यूनियन कार्बाइड के वर्तंमान मालिक डाव केमिकल कम्पनी से मुआवजा की माँग कि | संगठनों ने मध्य प्रदेश सरकार पर यह आरोप लगाया कि वह कारखाने के प्रदूषित परिसर पर हादसे का स्मारक बनाकर अब तक जारी इस पर्यावरणीय अपराध को दबा देने की कोशिश कर रही है |

 

“1984 तक कीटनाशक कारखाने के अत्यन्त ज़हरीले कचरे को परिसर के अन्दर और 1996 में कारखाने के बाहर असुरक्षित तरीके से दबाने की वजह से ही आज कारखाने से 4 किलोमीटर दूरी तक भूजल रासायनिक ज़हरों से प्रदूषित होना पाया गया है | 1990 से लेकर हाल तक सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा किए गए 16 अध्ययनों में यह पाया गया है कि 30 मीटर से अधिक गहराई और कारखाने से कई किलोमीटर दूर तक भूजल के नमूनों में कीटनाशक, भारी धातु और ऐसे ज़हरीले रसायन मिले हैं जो मानव शरीर में इकट्ठा होते जाते हैं और जिनकी विषाक्तता लम्बे समय तक बनी रहती हैं “ यह कहा रशीदा बी ने जिन्हें उनकी सहयोगी चम्पा देवी शुक्ल के साथ गोल्डमैन पर्यावरण पुरष्कार से नवाजा गया है | 

 

भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा के नवाब खान ने कहा,”भारतीय विष विज्ञान संस्थान, जो केंद्र सरकार की संस्था है, कुल एक लाख की आबादी वाली 42 मुहल्लों के भूजल को प्रदूषित पाया है और इस प्रदूषण फैलना लगातार जारी है | आज भोपाल में जारी इस दूसरा पर्यावरणीय हादसे को ख़त्म करने के लिए सबसे पहले जो काम होना चाहिए वह है कारखाने से 5 किलोमीटर तक की दूरी तक फैले इलाके की वैज्ञानिक जाँच हो | संयुक्त राष्ट्रसंघ की पर्यावरणीय कार्यक्रम (UNEP) के अधिकारियों ने इस तरह की वैज्ञानिक जाँच करने का प्रस्ताव भेजा था पर जब हम तत्कालीन पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर के पास इस प्रस्ताव को लेकर गए तो उन्होंने यह कहकर इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया कि विदेशियों को इस काम में शामिल करना ठीक नहीं होगा | केंद्र सरकार की दो संस्थाओं – केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी शोध संस्थान -  द्वारा भूजल में अत्यन्त ज़हरीले रसायनों की मौजूदगी बताने के बावजूद केंद्र सरकार इस पर्यावरणीय हादसे के बारे में चुप्पी साधे हुए है |”

 

 “प्रदेश सरकार द्वारा 2005 में किए गए एक अध्ययन में यह पाया गया है कि प्रदूषित भूजल पीने वाले रहवासियों में आँख, चमड़ी और श्वसन तथा पाचन तन्त्र की बीमारीयाँ हो रही हैं | इसके बावजूद, और 2012 के सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद 20 साल तक ज़हरीला पानी पीनेवाले 10 हज़ार परिवारों को केंद्र तथा प्रदेश सरकार द्वारा मुफ्त इलाज की सुविधा से वंचित किया जा रहा है |” कहा भोपाल ग्रुप फॉर इन्फोर्मेशन एण्ड एक्शन की सदस्या रचना ढींगरा ने |

 

डाव कार्बाइड के खिलाफ बच्चे की नौशीन खान ने कहा ,”अमरीका और भारत में स्थापित ‘जो प्रदूषण करे वही हर्जाना भरे” के न्यायिक सिद्धान्त के आधार पर प्रदूषित मिट्टी और भूजल को साफ़ करना और प्रदूषण की वजह से सेहत को पहुँचे नुकसान के लिए मुआवजा देना यूनियन कार्बाइड की कानूनी ज़िम्मेदारी है | 2001 में डाव केमिकल ने यूनियन कार्बाइड कम्पनी को खरीद लिया पर उसने गैर कानूनी रवैया अपनाते हुए मिट्टी और भूजल के प्रदूषण की ज़िम्मेदारी लेने से मना कर दिया | यह केंद्र और प्रदेश की सरकारों की ज़िम्मेदारी है कि वे डाव केमिकल से ज़हर सफाई और पीड़ितों के लिए मुआवजा वसूल करे | ऐसा करने के बदले सरकार ने यह योजना बनाई है कि प्रदूषित कारखाना परिसर में हादसे का स्मारक बनाकर प्रदूषण पर पर्दा डाल दिया जाय |


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