केंद्र और म.प्र. के‘लॉकडाउन – कोरोना’ संबंधी आदेश
| Agency - 03 Apr 2020

·      केंद्र और म.प्र. के ‘लॉकडाउन – कोरोना’ संबंधी आदेश

·      अस्पष्ट, अधूरे और परस्पर विरोधी !

·      किसानों की, खेतीहरों की सोच ही नहीं झलकती – तो रोजगार की क्या ?

·      आदेशों के अमलसंबंधी स्पष्टता जरूरी है तत्काल !

·      खेतों में खड़ी फसल पहुंचने दे मंडी तक और मजदूरों को खेतों तक !

लॉकडाउन का असर कोरोना के पहले, कोरोना से भी भयावह होने पर आज देश और प्रदेश के किसान, मजदूर, कारीगर, व्यापारी, मछुआरे, कुम्हार........ सब कोई हैरान है | हाथ पर जिनके पेट है, वे भुगत रहे है  बेरोजगारी या कर्जदारी !अनाज, फल, सब्जियाँ, परिवहन की छूट कुछ है कुछ नहीं ऐसी स्थिति में आज तक न होने से खेतों में ही सड़ रही है और मंडीयों को कुछ समय तक भी न खुलने देने से व्यापारी (चंद ही) खरीद रहे हैं जो भी, जितना भी, उसमें MSP याने न्यूनतम समर्थन मूल्य का सरेआम उल्लंघन है | जरूरी है कि MSP का पालन सरल करने का तथा फल, सब्जीयों के लिए भी MSP जाहीर करने का आदेश तत्काल निकाले | मजदूरों का आवागमन पुलिसों से छोटे समूह में भी न होने देने से कैसे निकालेंगे केला, टमाटर या बैंगन ...... कई टेक्टर्स खेती से ? इन मुद्दों पर ना कोई सोच, न आदेश निकला है ! बड़वानी के चंदू भाई यादव को फेंक देना पड़ा ढेर सारा टमाटर यहाँ और मुंबई में इसकी कमी के कारण बेचा जा रहा है टमाटर, 150/- रु. किलो के दाम में | निसरपुर, पिपलूद, एकेक गांव और जिले में केला या सब्जी समय  पर निकाल नहीं पा रहे, व्यापारी समय पर पहुंच नहीं पा रहे ...... उन्होंने पहले ही खरीदा माल बेचा नहीं जाने का कारण दे रहे हैं | व्यापारी 400 /- रु. क्विंटल जितना कम दाम देकर निकालना चाह रहे हैं लाभ, कोरोना से ! बेच नहीं पा रहे तो सड़ रही है ....... गरीबों को बांट बांटकर दे रहे हैं तो भी किसान कर्जदार बनने ही हैं | मध्यप्रदेश के इतने समृद्ध खेती के क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज्स नहीं, न हि खेत उपज पर प्रक्रिया विकेन्द्रित उद्य  मध्यप्रदेश शासन ने रात के समय भी खेतीमाल और दिन में मजदूरों को परिवहन को छूट देने के बारे में स्पष्ट आदेश निकालना जरूरी है | भोपाल कलेक्टर के आदेश अनुसार जिले के अंदर और बाहर फसल कटाई और अन्य कृषि कार्य के लिए आवागमन के पास नायब तहसीलदार से दिये जाने की घोषणा है | फिर अन्य जिलों में भी यह व्यवस्था सहज उपलब्ध होनी चाहिए | माज मजदूरों की विशेषता के आधार पर उपलब्धि नहीं होगी तो भी नहीं निकल पायेगी फसलें ! अगर अनाज और खाद्यान्न ऐसे खत्म होंगे तो कहाँ से आएगा राशन भी और सकस आहार भी ? इटली या अमरिका या चीन से ? हमारे देश की किसानों की बरबादी वैसे भी सूखा,और बाढ़ , बड़े बांध, कई प्रकार से व्हायरस, फर्जी फसल बीमा, और उपज का अनुचित दाम, महंगे कर्जे आदि से हो रही है और भूमि इस सौदे को घाटे में रखकर, बेची – खरीदी और कंपनीयों को कौड़ीमोल के दाम पर हस्तांतरित की जा रही है | इस लॉकडाउन से खेती और आहार, भोजन सुरक्षा ही बरबाद होगी तो क्या किसी व्हायरस के सामने प्रतिकार शक्ति बच पायेगी ? देश के मेहनतकश श्रमदान दे पायेंगे ? जिसका  बैठ जाएगा धंधा, वह निवेश कर पायेगा/ पायेगी उसे फिर से धंधा शुरू करने के लिए ? महिलाएँ अपने परिवारों के बच्चों को बचा पाएंगे कुपोषण से भी  कर्ज क्या, हिम्मत भी देंगे कोई ? किसानों ने आज तक भरी बीमा की राशि किसी व्हायरस में, मिरची हो या सोयाबीन, काम नहीं आयी | कोरोना के संदर्भ में इसपर बात क्यों नहीं करती सरकार ?

          आज सब्जी मंडी कुछ समय तक खोली जा रही है, तो अनाज मंडी क्यों नहीं ? मछली मंडी क्यों नहीं ? हर खाद्यान्न को उपलब्ध करने का आदेश एक और कहीं है लेकिन महाराष्ट्र के जैसा स्पष्ट सभी राज्यों में नहीं है | मध्यप्रदेश शासन कृपया अपना  फर्ज निभाये | नहीं तो लॉकडाउन का जगह जगह लोगों से उल्लंघन मजबूरी से होना और पुलिसों ने लाठीयाँ बरसाना, यही जारी रहेगा, संविधान दिवस (14 अप्रैल) तक ?

          केंद्र शासन से निकले हुए तथा मध्यप्रदेश शासन के आदेशों में ना केवल त्रुटियाँ है बल्कि परस्पर विरोधी घोशनाएँ भी है, और अस्पष्टता भी | इसे तत्काल दूर करना जरूरी है, अन्यथा आदेशों के अमल में न केवल त्रुटियाँ रहेगी बल्कि भ्रष्टाचार भी होगा, जैसा कि नर्मदा घाटी के विस्थापितों ने आज तक भुगता है ! इसके लिए कुछ मुद्दे :

1. 24.3.2020 के मध्यप्रदेश शासन / मुख्यमंत्री आदेश अनुसार

          स्कूल बंद और मध्यान्ह भोजन बंद है तो वह खाद्यान्न, अप्रैल 2020 तक का, PDS       अंतर्गत राशन दुकानों को उपलब्ध कराया जाएगा |                                                   जबकि 26.3.2020 की मुख्य सचिव के आदेश अनुसार मध्यान्ह भोजन की राशि     विद्यार्थीयों के खाते में डाली जाएगी | दोनों में से क्या होगा, कोई स्पष्टता करे |

2. केंद्र शासन के  आदेश अनुसार राशन – उचित मूल्य अनाज, 5 किलो गेहूँ / चावल और 1 किलो दाल आगे के 3 महिनों के लिए मुफ्त मिलेगा | लेकिन जो गरीब होते हुए भी गरीब रेखा के नीचे नहीं माने गये हैं, उनका क्या ? पं. बंगाल, केरल, महाराष्ट्र सभी को दे रहे हैं तो मध्यप्रदेश और पूरे देश में क्यों नहीं ? इसमें अन्त्योदय के तहत, कोई विशेष जैसे रामविलास पासवान जी की 7 किलो प्रति व्यक्ति देने की घोषणा आदि का कोई उल्लेख नहीं है |

3. मध्यप्रदेश शासन के जिलाधिकारी क्या अलग अलग आदेश निकालेंगे ? बड़वानी जिले का आदेश आया है, धार जिले का राहतसंबंधी कोई आदेश नहीं ! अगर है, तो प्रचारित क्यों नहीं ?

मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश के आदेश (26. 3 के) अनुसार मात्र गरीब रेखा के नीचे के परिवारों को एक माह का राशन नि:शुल्क दिया जाएगा |  लेकिन वह भी जून 2020 में ! क्या केंद्र शासन की मदद, जो भी राज्य शासन मंत्रालय द्वारा ही देनी होगी, वह तत्काल मिलेगी, जून तक की ! या केंद्र और राज्य के आदेशों को जोड़कर सुस्पष्ट, सुचरित आदेश प्रचारित करने की जरुरी नहीं है ?

4. राष्ट्रीय खाद्यान्न सुरक्षा के तहत याने BPL / गरीबी रेखा के नीचे के परिवारों को ही केवल मुफ्त राशन की राहत देना सही नहीं है | एक तो BPL सूची में हर राज्य में गडबडीयाँ पायी गयी है और आज की स्थिति में छोटे छोटे फेरीवाले, धूमन्तु व्यापारी भी और छोटे दुकानदार भी हैरान है | महाराष्ट्र, प. बंगाल, केरल जैसे सभी को लाभ क्यों नहीं  ? भले जो मांगने आये, उन्हें दे दिया जाए |

पंचायतों को भ्रष्टाचार मुक्त रखने का सख्त आदेश देकर इस कार्य में लगाया जाये |

5. गांव के ही अंदर खेतों की मेढ बाँधना, पौधा रोपण के लिए गड्डे खोदना, छोटे खेत तालाब बनाना इसका आयोजन करके मनरेगा के तहत हर किसी को काम उपलब्ध करने का आदेश पंचायतों को देकर उसका पालन करवाया जाए | Food far work की योजना हो, नहीं कैश देने की तो अधिक ठीक ! तीन माह का एकत्रित राशन आज देने की बात भी कब, कैसे ?

6. ‘मजदूरों को 1000 /- रु. प्रतिमाह की सहायता राशि’ इस प्रकार से प्रचारित किया गया आदेश प्रत्यक्ष में मात्र संनिर्माण कर्मकार मंडल के अंतर्गत दर्ज मजदूरों को ही यह राशि देने की बात करता है यह अन्याय है | कितने मजदूर है दर्ज ? बाकी मजदूरों का क्या ? सभी श्रमिकों को यह राशि उपलब्ध होना चाहिए, जिन्हें रोजगार नहीं मिल रहा है |

7. अनुसूचित जनजातियों को कौनसी राशि यह स्पष्ट न करते हुए  प्रति परिवार दो महिने की राशि किस योजना से, यह भी स्पष्ट नहीं है, 24.3 के आदेश में ! सहारिया, बैगा, भारिया के अलावा अन्य आदिवासीयों के लिए मुख्य सचिव का (26. 3) का आदेश कुछ नहीं कहता है |

8. और दलितों का क्या ? अनुसूचित जातियों का उल्लेख तक नहीं है | सबसे अधिक मजदूरी तो दलित करते हैं | अनुसूचित जातियों को ‘सहभोजन’ उपलब्ध करवाने का आदेश पंचायतों को दिया जाए  |

 यह सभी गडबड़ीयाँ, अधूरापन, अस्पष्टता तत्काल दूर की जाए | जिलाधिकारी सभी सामाजिक संगठनों से  स्पष्टता और पर्याप्त पर्चे, आदेश की प्रतियों के साथ संवाद और सहभाग लेना शुरू करें |

9.खाद्यान्न में कोरोना के चलते फल सब्जी सबसे महत्व का अन्न है | इनके बेचने वालों की गाडीयां बंद करवाना नहीं होना चाहिए | गाडी के साथ एक बेचने वाला और एक खरीदने वाला दूरी पर खड़ा रहे, यह संभव है |

10. शराब की दुकानें भरसक चलने की जानकारी हैरान करती है | तत्काल उन्हें बंद करवाया जाए | बेरोजगार भक्ष्य बन रहे है और महिलायें हैरान है | घर में बाल बच्चों को रहना भी असंभव है, शराबीयों के साथ |

11. नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण का कार्य पुनर्वास, पेयजल उपलब्धि, अन्य बुनियादी सुविधाओं का है | हजारों परिवारों के लिए यह कार्य अधूरा है जो बरसात के पहले पूरा करना है | इनमें से, सैंकड़ो आज भी, टीन शेड में है पेयजल की कमी तो कोरोना के संदर्भ में भी गंभीर समस्या है | घर में बैठो कहना, बेघरों के लिए क्या मतलब ? गर्मी में टीनशेड में इस कार्य को, ‘अतिआवश्यक सेवा’ ही मानकर शुरू रखना जरूरी है |

 


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