बुआ ने दिया भतीजे को झटका
| Agency - 28 Mar 2018

उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों की एकता में नाटकीय परिवर्तन आता दिखाई पड़ रहा है। दो दिन पहले ही बसपा प्रमुख मायावती ने पत्रकार वार्ता में जोर-शोर से घोषणा की थी कि गेस्ट हाउस काण्ड और राज्यसभा चुनाव को लेकर चाहे जितनी कोशिश मतभेद पैदा करने के लिए की जाएं लेकिन सपा और बसपा का गठबंधन टूटने वाला नहीं है, अब वही मायावती कैराना लोकसभा के उपचुनाव और नूरपुर विधानसभा उपचुनाव में सपा का साथ नहीं देना चाहती हैं। ये दोनों सीटें भी भाजपा की हैं और हाल ही में सांसद हुकुम सिंह और भाजपा विधायक के निधन से रिक्त हुई है। मायावती के इन उपचुनावों में भाग न लेने के कई कारण बताये जाते हैं। इनमें पहला कारण तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव को झटका देना भी है। राज्यसभा उपचुनावों के दौरान अखिलेश यादव से चूक हुई है, इसका संकेत भी मायावती ने पत्रकार वार्ता में दिया था। दूसरा कारण मायावती की चौधरी अजित सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल से नराजगी है। रालोद के विधायक ने भाजपा और बसपा दोनों के प्रत्याशी को वोट दिया जिससे वह अवैध हो गया। मायावती को आशंका है कि रालोद विधायक ने जानबूझ कर ऐसा किया है। कैराना लोकसभा सीट पश्चिम उत्तर प्रदेश की है और रालोद का वहां प्रभाव भी बताया जाता है। इसलिए इस बात की संभावना है कि चौधरी अजित सिंह के बेटे और रालोद उपाध्यक्ष जयंत चैधरी यहां से खुद उम्मीदवार हो जाएं। सपा ने अपना प्रत्याशी उतारने की घोषणा कर रखी है। मायावती यदि सपा को समर्थन देती हैं तो पश्चिम उत्तर प्रदेश का जाट मतदाता नाराज होगा और रालोद प्रत्याशी का समर्थन करती है तो मुस्लिम मतदाता नाराज हो जाएगा। इसीलिए मायावती ने बसपा जोनल कोआर्डिनेटरों की बैठक में यह तय किया कि भविष्य में होने वाले किसी भी उपचुनाव में बसपा अपने कैडर को सक्रिय नहीं करेगी। बसपा की यह पुरानी रणनीति है। भाजपा को सबक सिखाने के लिए गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में मायावती ने अपने कैडर को उतारा था। सबक तो उन्हें अखिलेश को भी देना था, सो दे दिया।
 


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