चीन के साथ व्यापार संतुलन जरूरी
| Agency - 28 Mar 2018

यह सही है कि हम वैश्विक व्यापार के नियम-कानूनों से बंधे हैं और इस दृष्टि से हमारा चीन के साथ भी व्यापार कायम है। इसके अलावा हमारा यह पड़ोसी देश भारत की प्रगति को बर्दाश्त नहीं कर पाया है। चीन मंे शी जिनपिंग ने जब से आजीवन राष्ट्रपति बनने का अवसर प्राप्त कर लिया है, तब से वह अपनी एक-एक इंच भूमि न छोड़ने का राग ज्यादा अलापने लगे हैं। यह बात तो किसी से छिपी नहीं कि सन् 1962 की लड़ाई मंे चीन ने हमारी हजारों वर्गमील जमीन पर कब्जा कर लिया था और उसे आज तक मुक्त नहीं किया है। इसके अलावा चीन भारत के अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम पर भी अधिकार जताता है। भारत से लगे भूटान की जमीन पर किसी तरह से वह सैनिक अड्डा बनाना चाहता है। इसीलिए डोकलाम मंे चीन के कब्जे को लेकर भारत ने विरोध किया था। अब केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु  भारत-चीन के बीच व्यापार एवं निवेश बढ़ाने पर सहमति जता चुके हैं। चीन के सामानों से भारत के बाजार पहले से पटे हुए हैं और व्यापार संतुलन चीन के पक्ष मंे है। हम चीन को उतना सामान नहीं भेजते, जितना मंगाते हैं। डोकलाम मंे चीन ने जब सैनिक जमा कर दिये थे, तब भारत मंे एक लहर पैदा हुई थी कि हम चीन के सामान का बहिष्कार करेंगे। घोषित रूप से हम ऐसा नहीं कर सकते हैं लेकिन मानसिक स्थिति हमंे ऐसी बनानी पड़ेगी। विशेष रूप से यह देखकर कि चीन का कुछ सामान घातक साबित हो रहा है जैसा कि पतंगों के मांझे के रूप मंे चर्चा हो रही है। चीन का बना यह मांझा भारत से पैसा भी ले जाता है और लोग घायल भी हो रहे हैं। इसलिए चीन के साथ व्यापार और निवेश बढ़ाने के समय यह भी देखा जाना चाहिए कि चीन से कौन सी अहितकर वस्तु हम खरीद रहे हैं। कोशिश यह होनी चाहिए कि चीन को हम ज्यादा से ज्यादा निर्यात करें ओर आयात कम हो। 
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु के आवास पर 27 मार्च को नाश्ते के दौरान हुई बैठक के साथ भारत-चीन व्यापार वार्ता संपन्न हो गई। दोनों देशों ने कई संयुक्त समझौतों पर सहमति जताई है। काफी विचार-विमर्श के बाद भारतीय पक्ष गैर-बासमती चावल, सरसों, सोया खली, अनार, केला और अन्य फल एवं सब्जियों के लिए बाजार पहुंच बढ़ाने के लिए चीन को राजी करने में सफल रहा है। चीन ने भारत से दवा उत्पादों के निर्यात के मुद्दे के समाधान को लेकर भी सहमति जताई है। भारतीय निर्यातकों से 240 से अधिक औषधीय आवेदन चीन के साथ लंबित पड़े हुए हैं।  इसके अलावा दोनों पक्ष फार्मास्युटिकल क्षेत्र में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के लिए भी तैयार हुए हैं।  वहीं भारत ने भी चीनी नाशपाती, मैरीगोल्ड बीज और सेब के लिए बाजार पहुंच में तेजी लाने के लिए सहमति जताई है। मई 2017 में सैनिटरी ऐंड फाइटोसैनिटरी (एसपीएस) से जुड़ी चिंताओं के बाद इन उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इससे पहले तक भारत लगभग 7 करोड़ डॉलर के सेब और 3 करोड़ डॉलर के नाशपाती का आयातक था।  अमेरिका-चीन व्यापार युद्घ के साए के बीच हुईं इन वार्ताओं में चीन ने लंबे समय से मौजूद व्यापार असंतुलन से जुड़ी भारत की चिंताओं को भी गंभीरता से लिया है। चीन ने संयुक्त आर्थिक समूहों (जेईजी) और चीन तथा भारत के बीच आर्थिक एवं व्यापार सहयोग के लिए पांच वर्षीय विकास कार्यक्रम के जरिये इन चिंताओं को दूर करने की प्रतिबद्धता जताई है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, दोनों देश अपने साझा हितों को बरकरार रखने के लिए डब्ल्यूटीओ, और अन्य बहुपक्षीय और क्षेत्रीय ढांचों के बीच सहयोग मजबूत बनाने के लिए सहमत हुए हैं। दोनों देशों ने नियम-आधारित बहुपक्षीय वैश्विक के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। दोनों देशों ने द्विपक्षीय निवेश पर भी जोर दिया है। प्रभु ने चीन से भारत में निर्माण क्षेत्र में निवेश करने को कहा है।
 


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