हलाला से ज्यादा शर्मशार करने वाली प्रथा है ब्राह्मणों की नियोग प्रथा
| Manoj Chaudhary - 28 Sep 2017

ला आने के बाद इसके पूरे ब्योरे की जानकारी हासिल किए बिना ही कुछ कट्टरपंथी तत्वों को एसा लगने लगा कि अब यही मौक़ा है कि मुसलमानों के पर्सनल ला पर हमला कर दिया जाए और समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में क़दम उठाया जाए। कुछ टीवी चैनलों ने हलाला के मुद्दे पर बहस शुरू कर दी और कुछ लेखों में भी कहा गया कि अब इस प्रकार की सभी रीतियों को कटहरे में खड़ा कर दिया जाए। 
वेद में नियोग के आधार पर एक स्त्री को ग्यारह तक पति रखने और उन से दस संतान पैदा करने की छूट दी गई है. नियोग किन-किन हालतों में किया जाना चाहिए, इसके बारे में जानने के लिए आगे पढ़े 

मज़े की बात तो यह है कि अदालत के फ़ैसले पर बेगाने की शादी में अब्दुल्लाह की तरह दीवानगी दिखाने में वह संगठन सबसे आगे हैं जिन पर इस प्रकार की अत्यंत भयानक कुरीतियों के समर्थन का आरोप है। यही नहीं यह संगठन इतने भयानक हैं कि वह अपने समाज की इन कुरीतियों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले की हत्या तक कर देते हैं। इस क्रम में नियोग प्रथा का नाम लिया जा सकता है। 
 


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