जय हनुमान ज्ञान गुण सागर
| Manoj Chaudhary - 30 Mar 2018

हनुमान जी ऐसे देवता है जो युगों से विद्यमान हैं। भगवान राम के अनन्य सेवक, भक्त और विश्वास पात्र हनुमान जी की जयंती वर्ष में दो बार मनायी जाती है। भगवान शिव के 11वें अवतार माने जाने वाले हनुमान जी की विशेष पूजा एवं आराधना भी इसीलिए मंगलवार और शनिवार दो दिन की जाती है। ऐसी मान्यता है कि चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को हनुमान जी ने माता अंजनी के गर्भ से जन्म लिया था। इस वर्ष यह तिथि 31 मार्च को पड़ रही है और पूरे देश में हनुमान जयंती मनायी जाएगी। ज्योतिष की गणना के अनुसार पूर्णिमा तिथि 30 मार्च की शाम 7.35 से लगेगी और 31 मार्च को शाम 6 बजे तक रहेगी। इस प्रकार उदया तिथि होने से 31 मार्च को ही हनुमान जयंती मनायी जाएगी। हनुमान जयंती पर सात्विक विचारधारा से हनुमान चालीसा और सुंदरकाण्ड का पाठ करने से राम भक्त हनुमान अपने भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
ज्योतिषियों के अनुसार इस बार हनुमान जयंती पर शनि और मंगल एकत्र होकर धनु राशि में बैठे हैं। शनि और मंगल का विशेष द्विग्रही योग भी बना है और इसी दिन चन्द्रमा का हस्त नक्षत्र भी है। इसलिए हनुमान जयंती पर विशेष संयोग बन रहा है। आराधकों को चाहिए कि एक दिन पहले शाम को हनुमान मंदिर में हनुमान जी का चोला चढ़ाने का सामान दे दें। एक दिन पहले संभव न हो सके तो 31 मार्च को सबेरे ही मंदिर पहुंच जाएं। मंदिर में नारंगी सिंदूर, चमेली का तेल, जनेऊ, चांदी का वर्क, लाल लंगोट लाल वस्त्र और हनुमान जी को प्रिय लड्डू अर्पित करें। नारंगी सिंदूर का स्वयं तिलक लगाएं। उस दिन तांबे के पात्र से पानी पियें। हनुमान चालीसा का पाठ करें। संभव हो तो सुंदर काण्ड का पाठ परिवार के मध्य करें। खिचड़ी और गुड़ का दान करंे। शनिवार को खिचड़ी दान का विशेष महत्व होता है। इस प्रकार हनुमान जयंती पर श्रद्धा एवं विश्वास के साथ हनुमान जी की पूजा करने से मन वांछित फल मिलते हैं।
हनुमान जयंती भारत में लोगों के द्वारा हर साल, हिन्दू देवता हनुमान जी के जन्म दिवस को मनाने के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। भारतीय हिन्दी कैलेंडर के अनुसार यह त्योहार हर साल चैत्र (चैत्र पूर्णिमा) माह के शुक्ल पक्ष में 15वें दिन मनाया जाता है। प्रभु श्री हनुमान, भगवान श्री राम के बहुत बड़े भक्त, पूरे भारत में हिन्दू धर्म के लोगों के द्वारा प्रभु श्री राम में अपनी गहरी आस्था के कारण पूजे जाते हैं। हनुमान जयंती के दिन पर, सभी हनुमान मंदिरों में बहुत अधिक भीड़ हो जाती है, क्योंकि लोग सुबह पवित्र स्नान करने के बाद से ही इनकी पूजा करना शुरू कर देते हैं। हनुमान जयंती हिन्दू धर्म के लोगों के द्वारा हिन्दूओं के एक महत्वपूर्ण त्योहार के रुप में बड़े उत्साह और जोश के साथ मनाई जाती है। यह एक महान हिन्दू उत्सव है, जो सांस्कृतिक और परंपरागत तरीके से मनाया जाता है।
लोग हनुमान भगवान की पूजा आस्था, जादूई शक्तियों, ताकत और ऊर्जा के प्रतीक के रुप में करते हैं। लोग हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, क्योंकि यह बुरी शक्तियों का विनाश करने और मन को शान्ति प्रदान करने की क्षमता रखती है। इस दिन हनुमान भक्त सुबह जल्दी नहाने के बाद भगवान हनुमान जी के मंदिर जाते हैं और हनुमान जी की मूर्ति पर लाल सिंदूर (का चोला) चढ़ाते हैं, हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, लड्डू का प्रसाद चढ़ाते हैं, मंत्रों का जाप करते हुए आरती करते हैं, मंदिर की परिक्रमा आदि बहुत सारी रस्में करते हैं। जैसा कि सभी जानते हैं कि, हनुमान जी का जन्म वानर समुदाय में लाल-नारंगी शरीर के साथ हुआ था, इसी कारण, सभी हनुमान मंदिरों में लाल-नारंगी रंग की हनुमान जी की मूर्ति होती है। पूजा के बाद, लोग अपने मस्तिष्क (माथे) पर प्रसाद के रुप में लाल सिंदूर को लगाते हैं और भगवान हनुमान जी से माँगी गई अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए लोगों को लड्डू के प्रसाद का वितरण करते हैं। महाराष्ट्र में, यह हिन्दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र महीने की पूर्णिमा को मनाया जाती है। यद्यपि, अन्य हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, यह आश्विन माह के अंधेरे पक्ष में 14वें दिन पड़ती है। पूजा के बाद, पूरा आशीर्वाद पाने के लिए लोगों में प्रसाद बाँटा जाता है। तमिलनाडु और केरल में, यह मार्गशीर्ष माह (दिसम्बर और जनवरी के बीच में) में, इस विश्वास के साथ मनाई जाती है कि, भगवान हनुमान इस महीने की अमावस्या को पैदा हुए थे। उड़ीसा में, यह वैशाख (अप्रैल) महीने के पहले दिन मनाई जाती है। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में यह वैशाख महीने के 10वें दिन मनाई जाती है, जो चैत्र पूर्णिमा से शुरु होती है और वैशाख महीने के 10वें दिन कृष्ण पक्ष पर खत्म होती है। हनुमान जयंती का समारोह प्रकृति के अद्भुत प्राणी के साथ पूरी हनुमान प्रजाति के सह-अस्तित्व में संतुलन की ओर संकेत करता है। प्रभु हनुमान वानर समुदाय से थे, और हिन्दू धर्म के लोग हनुमान जी को एक दैवीय जीव के रुप में पूजते हैं। यह त्योहार सभी के लिए बहुत अधिक महत्व रखता है, हालांकि ब्रह्मचारी, पहलवान और बलवान इस समारोह की ओर से विशेष रूप से प्रेरित होते हैं। हनुमान जी अपने भक्तों के बीच में बहुत से नामों से जाने जाते हैं। जैसे- बजरंगवली, पवनसुत, पवन कुमार, महावीर, बालीबिमा, मारुतसुत, संकट मोचन, अंजनिसुत, मारुति आदि।
हनुमान अवतार को महान शक्ति, आस्था, भक्ति, ताकत, ज्ञान, दैवीय शक्ति, बहादुरी, बुद्धिमत्ता, निःस्वार्थ सेवा-भावना आदि गुणों के साथ भगवान शिव का 11वाँ रुद्र अवतार माना जाता है। इन्होंने अपना पूरा जीवन भगवान श्री राम और माता सीता की भक्ति में लगा दिया और बिना किसी उद्देश्य के कभी भी अपनी शक्तियों का प्रदर्शन नहीं किया। हनुमान की माता अंजनी को लेकर एक कहानी है कि वे पहले इंद्रलोक मंे रहती थीं। इन्द्र के दरबार मंे अप्सरा नृत्य कर रही थी लेकिन एक गंधर्व कन्या उदास बैठी थी। उसने कहा कि मुझे इस तरह के नृत्य प्रदर्शन में कोई रुचि नहीं है। यह इन्द्र और अप्सरा के लिए बहुत अधिक लज्जा का विषय था। उसने संत को निराश करना शुरु कर दिया और तब अंगिरा ने उसे शाप दिया कि, “देखो! तुमने स्वर्ग से पृथ्वी को नीचा दिखाया है। तुम पर्वतीय क्षेत्र के जंगलों में मादा बंदर के रुप में पैदा हो।” “प्रभु का एक महान भक्त तुमसे पैदा होगा। वह सदैव परमात्मा की सेवा करेगा।” इसके बाद वह कुंजार (पृथ्वी पर बन्दरों के राजा) की बेटी बनी और उनका विवाह सुमेरु पर्वत के राजा केसरी से हुआ। उन्होंने पाँच दिव्य तत्वों जैसे- ऋषि अंगिरा का शाप और आशीर्वाद, उसकी पूजा, भगवान शिव का आशीर्वाद, वायु देव का आशीर्वाद और पुत्रश्रेष्ठी यज्ञ से हनुमान को जन्म दिया।
 यह माना जाता है कि, भगवान शिव ने पृथ्वी पर 11वें रुद्र अवतार के रुप में हनुमान वनकर जन्म लिया क्योंकि वे अपने वास्तविक रूप में भगवान श्री राम की सेवा नहीं कर सकते थे। सभी वानर समुदाय सहित मनुष्यों को बहुत खुशी हुई और महान उत्साह और जोश के साथ नाचकर, गाकर, और बहुत सी अन्य खुशियों वाली गतिविधियों के साथ उनका जन्मदिन मनाया। तब से ही यह दिन, उनके भक्तों के द्वारा उन्हीं की तरह ताकत और बुद्धिमत्ता प्राप्त करने के लिए हनुमान जयंती को मनाया जाता है। 
 


Browse By Tags