मछुवारों का संघर्ष
| Manoj Chaudhary - 09 Apr 2018

भोपाल, रोज नर्मदा घाटी के सरदार सरोवर एवं बरगी बांध के, इंदिरा सागर के व अन्य छिंदवाड़ा के पेंच बांध के जलाशय पर अधिकार मांगने वाले विस्थापित, परंपरागत मछुआरा समाज के सैकड़ों साथी,बहन, भाई भोपाल पहुंचे। उन्होंने मध्य प्रदेश राज्य मत्स्य महासंघ पर अहिंसक हमला बोला। महासंघ के अधिकारियों ने श्रीयुत राय, श्रीयुत निगम, श्रीयुत जी जो कि संचालक है और उप संचालक श्रीमती मिश्रा ने थोड़ी सी बहस के बाद सभी लोगों को महासंघ के कैंपस के अंदर लेने के लिए गेट खोल दिए। इस भव्य कैंपस में पेड़ों की छाया में बैठकर पूरी 4 घंटे चर्चा व बहस जमकर चली जबकि कई मुद्दों पर महासंघ एवं मध्यप्रदेश शासन की पोल खोल हुई और अन्य मुद्दों पर निर्णय लेने का आश्वासन देकर चर्चा समाप्त हुई।
 मत्स्य महासंघ हर जलाशय या नदी के किनारे बनी समितियों के जलाशय, स्तरीय संघ उनके प्रतिनिधियों के द्वारा चुना जाना है तब भी प्रत्यक्ष में मंत्री महोदय नियुक्ति करते आए हैं महासंघ के पदाधिकारियों की और 2007 से 2015 तक तो महासंघ के चुनाव ही टालती गई है मध्य प्रदेश शासन, यह पूरी साजिश है इस बात का आग्रह के साथ जिक्र किया मछुआरों के सहयोगी श्री राजकुमार सिन्हा, श्रीमती आराधना भार्गव, रमेश बर्मन, बरगी बांध विस्थापित संघ और मेधा पाटकर ने।  महासंघ के अधिकारियों को इस जनतांत्रिक व्यवस्था का समर्थन करना असंभव हो गया और उन्होंने माना कि संगठनों की भावना एवं आवेदनों को इस मुद्दे पर राज्य शासन के समक्ष रखेंगे, जलाशय पर अपना अधिकार मांगते हुए बरगी के विस्थापितों ने यह बात सामने रखी जिनमें राजेश तिवारी प्रमुख थे। 450 टन का उत्पादन चोपन्न सहकारी सोसायटी के द्वारा संगठित शक्ति के अनुशासन में 6 साल तक हुआ था, अभी जलाशय का ठेका बाहरी ठेकेदार को देने के बाद आज वही उत्पादन 80 टन तक नीचे गिरा हुआ है और तो और अंधाधुंध और मनमानी रूप से ठेकेदार का कार्य मत्स्य विकास नहीं है बल्कि रोजगार और जलाशय की भी हानि करने की दिशा में हो रहा है। इंदिरा सागर के 18 सहकारी सोसायटियों के प्रमुख पदाधिकारियों ने जिनमें मंगल भाई तथा गिरधारी भाई सम्मिलित थे, ठेकेदार के अत्याचार की तथा एकाध समिति के अध्यक्ष की ठेकेदार के साथ जुड़कर अन्याय की कहानी समक्ष रखी, उनका भी आग्रह है कि आने वाले जून महीने में उस जलाशय का इंदौर के भाटिया जी को दिया हुआ ठेका रद्द किया जाए और सहकारी सोसायटी के सुपुर्द जलाशय किया जाए।
 आराधना भार्गव जी तथा मछुआरों के प्रतिनिधियों ने पेंच बांध के ठेकेदार जो सिवनी के है नहीं, जलाशय के किनारे के संयुक्त नितिन कुमार ने किए कृष्णाबाई नाम की महिला पर अत्याचार की हकीकत बया की। कृष्णा भाई की शिकायत तक स्वीकारने के लिए नामंजूर करने वाले प्रशासन का धिक्कार सभी ने किया और महासंघ के अधिकारियों को स्वीकारना पड़ा कि इसमें उनके भी हस्तक्षेप की जरूरत है। महासंघ का कहना था कि तवा हो या पेंट ऐसे जलाशय जहां आरक्षित वन का क्षेत्र लगत है या कोई अभयारण्य या प्रोजेक्ट टाइगर की परियोजना नजदीक है वहां मत्स्य व्यवसाय को मंजूरी नहीं दी जा सकती है लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकारा कि अब आने वाली नई वन नीति के तहत अगर इस बात को माना जाए कि जलाशय में मत्स्य व्यवसाय को बढ़ाने से इर्द-गिर्द के वनों का विनाश ही होगा यह बात अर्धसत्य है।
 कुल मिलकर सुनियोजित रूप से अगर मछुआरों को जलाशय तक पहुंच मार्ग दिया जाए और वनों की रक्षा सख्त रूप से की जाए तो मछुआरे भी वनरक्षक ही बन सकते हैं। इस मुद्दे पर तय किया गया कि नई वन नीति के मसौदे पर 14 अप्रैल तक अपने कॉमेंट्स यानी टिप्पणी और सुझाव देने की प्रक्रिया में इस मुद्दे को जन संगठनों की तरफ से सम्मिलित किया जाए।
 सरदार सरोवर जलाशय से आए हुए सैकड़ों मछुआरों के  स्पष्ट सवाल - जवाब करते हुए अधिकारियों को मंजूर करना पड़ा कि अभी कोई ठेकेदारी को बढ़ाने के बाद सरदार सरोवर के मामले में नहीं हुई है। जब श्यामा बहन मछुआरा, मडूभाई मछुआरा तथा गोखरू भिलाला ने अपनी बात रखते हुए यह चेतावनी दी कि सरदार सरोवर में महाराष्ट्र के जैसे जलाशय पर 32 सोसाइटियों ने मिलकर प्रस्तावित किए जलाशय यूनियन यानि संघ को ही अधिकार दिए जाएं अन्यथा कड़ी लड़ाई होगी।  अधिकारियों ने प्राप्त किए आवेदन के आधार पर उच्च स्तरीय बातचीत में मछुआरों का यह आग्रह रखना मंजूर किया जबकि सैकड़ों मछुआरे उनको चेतावनी देकर ही लौटे हैं और यह भी कह चुके हैं की मध्य प्रदेश के जलाशयों को मछुआरों के हाथ से निकाल कर कॉर्पोरेट टाइप के ठेकेदार को देना नई नीति के आधार पर सही नहीं है यह अन्याय होगा।
 इस समय भरूच गुजरात से आए हुए मछुआरों ने भी हेरल भाई और प्रवीण भाई के द्वारा समुंदर किनारे के मछुआरों पर नदी पर बड़े-बड़े बांध बनाने के कारण हो रहे बेरोजगारी के अत्याचार की बात रखी। अब अमरकंटक से भरुच तक के मछुआरे एक होकर मध्य प्रदेश को ही नहीं तीनों राज्यों को चुनौती देने की तैयारी में है, यह बात इस कार्यक्रम से शासन प्रशासन तक जरूर ही पहुंचाई गई है।  


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