आरबीआई ने कम किया सरकार का घाटा
| Agency - 10 Apr 2018

सरकार का राजकोषीय घाटा चिन्ता का विषय बनता जा रहा था लेकिन रिजर्व बैंक और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने राजकोषीय घाटे को काबू में लाने के लिए सरकार की अहम मदद की है। इससे वर्ष 2017-18 के लिए सरकार का राजकोषीय घाटा 5.95 लाख करोड़ रुपये के संशोधित लक्ष्य से शायद थोड़ा कम हो गया है। फरवरी के अंत तक संशोधित लक्ष्य से 1.2 लाख करोड़ रुपये अधिक पहुंच गया था। केंद्रीय बैंक ने सरकारी खजाने में 100 अरब रुपये का अतिरिक्त अधिशेष जमा कराया जबकि एफसीआई ने वित्त मंत्रालय द्वारा आवंटित 500 अरब रुपये लौटाए। इससे सरकार को राजकोषीय घाटे को काबू में लाने में थोड़ा मदद मिली। अप्रैल 2017 से फरवरी 2018 की अवधि के लिए राजकोषीय घाटा बेकाबू होकर 7.16 लाख करोड़ पहुंच गया था जो पूरे वर्ष के संशोधित अनुमान का 120 फीसदी था। हाल में किसी भी वित्त वर्ष में 11 महीने की अवधि में यह सर्वाधिक घाटे की स्थिति थी। वित्त सचिव हसमुख अढिया और आर्थिक  मामलों के सचिव सुभाष गर्ग ने बताया कि वर्ष 2017-18 के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। अलबत्ता मार्च महीने के लिए प्रत्यक्ष कर संग्रह और विनिवेश की कुछ जानकारी के अलावा कोई आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, हमने एफसीआई को करीब 450-500 अरब रुपये अग्रिम के रूप में दिए थे। इसे पूंजीगत खर्च की श्रेणी में डाला गया था। इस राशि को मार्च में लौटा दिया गया है। इसलिए जब आंकड़े जारी किए जाएंगे तो पूंजीगत खर्च में इतनी कमी जा आएगी। उन्होंने बताया कि केंद्र के अनुमानित राजस्व का करीब एक चैथाई हिस्सा मार्च में हासिल हुआ। आरबीआई ने जुलाई 2016 से जून 2017 के अधिशेष के तौर पर 306 अरब रुपये सरकार को दिए थे। सरकार बैंक से 130 अरब रुपये अतिरिक्त अधिशेष मांग रही थी। केंद्रीय बैंक ने यह राशि प्रावधान जरूरतों के लिए रखी थी।  अस्थायी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2017-18 में प्रत्यक्ष कर संग्रह 9.95 लाख करोड़ रुपये रहा। यह वित्त वर्ष 2016-17 की तुलना में 17.1 फीसदी अधिक है। श्री अढ़िया ने पिछले सप्ताह कहा था कि अगले कुछ दिनों में इसके 10 लाख करोड़ का आंकड़ा पार करने की उम्मीद है। 


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