भाजपा का नारा : “बेटी बचाओ”, अभियान या चेतावनी ?
| Agency - 13 Apr 2018

बलात्कारी भाजपा विधायकों को कड़ी सज़ा की मांग ।

13 अप्रैल 2018, नई दिल्ली : कठुआ में 8 साल की बच्ची के साथ और उन्नाव में महिला के साथ हुई बलात्कार की घटना अत्यंत घिनौनी और शर्मनाक हैं। उससे भी अधिक शर्मनाक है, हिन्दू एकता मंच और भाजपा के अन्य विधायकों और नेताओं का इन बलात्कारियों के समर्थन में, देश के झंडे की आड़ में धरना प्रदर्शन करना।

कश्मीर के कठुआ जिले में रहने वाली असीफा का 12 जनवरी 2018 को अपहरण हुआ और लगातार 3 दिन तक उसके साथ 8 लोगों द्वारा बलात्कार किये जाने के बाद 17 जनवरी 2018 को असीफा का शव जंगल में पाया गया। इस अपराध की योजना पूर्व राजस्व अधिकारी द्वारा की गई जो कठुआ के रसाना इलाके से आसिफा के खानाबदोश समुदाय को बेकरवाल के बाहर निकालना चाहता था। मुख्य आरोपियों में संजी राम जो मंदिर का रखरखाव करता था, उसका बेटा विशाल जो मेरठ से आया हुआ था और उसका 19 साल का रिश्तेदार, पुलिस अधिकारी दीपक खजुरिया, विशेष पुलिस अधिकारी सुरिंदर कुमार और परवेश कुमार हैं। इस केस में दर्जचार्जशीट से असीफा के साथ हुई इस भयावह घटना का दृश्य स्पष्ट नज़र आता है कि किस तरह, नफरत की आड़ में, एक 8 साल की बच्ची के साथ कई बार और कई लोगों द्वारा बलात्कार कर, बड़ी बेरहमी के साथ उसे मार दिया गया।

हिंदू एकता मंच गिरफ्तार पुलिसकर्मियों के समर्थन में विरोध कर रहा है, जिससे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दी गई है। इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए भाजपा ने अपने वन और पर्यावरण मंत्री लाल सिंह और वाणिज्य और उद्योग मंत्री चंद्रदर्शक गंगा को भेजा। इनके साथ भाजपा के विधायक कुलदीप राज और राजीव जसोटिया भी हिन्दू एकता मंच की रैली को संबोधित करने में शामिल थे। इसके साथ ही जम्मू बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बी. एस. सलाठिया ने बाकि सभी वकीलों के साथ मिल कर विरोध किया जिन पर असीफा के लिए खड़ी हुई वकील राधिका राजावत को भी धमकी देने का भी आरोप लगा है।

दूसरी घटना उत्तर प्रदेश के उन्नाव की है जहाँ भाजपा के विधायक कुलदीप सेंगर को एक महिला के साथ बलात्कार करने के जुर्म में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया। लेकिन पुलिस थाने में, सिर्फ एक शिकायत दर्ज करवाने की लड़ाई में ही पीड़िता ने अपने पिताजी को भी खो दिया, जिन्हें कुलदीप सिंह के साथियों ने इतना मारा कि वह पुलिस संरक्षण में होते हुए भी उस मार के दर्द से ही गुज़र गये। कुलदीप सेंगर ने अपने पद का इस मामले को दबाने के लिए पूरा इस्तेमाल किया। पीड़िता और उसके परिवार को भी डराने और धमकाने की कोशिश की गयी जिससे वो सबके सामने निकल कर ना आयें। बार-बार न्याय की अपेक्षा में शिकायत दर्ज करवाने पर भी जब पुलिस द्वारा एफ.आई.आर दर्ज नहीं की गयी तब तंग आकर पीड़िता और उसके घर वालों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भवन के सामने आत्महत्या करने की कोशिश की। देश भर से आये दबाव के चलते पीड़िता की शिकायत तो दर्ज की गयी है लेकिन पोक्सो और बलात्कार की धाराएँ लगने के बाद भी जब गिरफ्तारी तुरंत होनी चाहिए थी वो नहीं हुई, जिसकी हम सभी कड़ी निंदा करते हैं।

इन दोनों घटनाओं से भाजपा सरकार की सोच और मंशा साफ़ ज़ाहिर होती है। उनके लिए ना तो उनके विधायक द्वारा किया गया बलात्कार गलत है और ना ही उनके विधायकों और मंत्रियों द्वारा आरोपियों का समर्थन देना गलत है। उन्नाव मामले में ज़िला स्तर पर पुलिस प्रशासन व राज्य सरकार द्वारा जिस तरह से विधायक को बचाने का भरसक प्रयास किया गया यह अत्यंत निंदनीय है। अगर भाजपा सरकार सच में इन घटनाओं को गलत मानती तो कुलदीप सेंगर को उसके जुल्म के पता चलने पर ही गिरफ़्तारी के आदेश देती या फिर खुद ही अपने मंत्रियों को कठुआ की घटना के आरोपियों का समर्थन करने हिन्दू एकता मंच की रैली में नही भेजती।इससे स्पष्ट होता है की इस सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश में ‘एंटी रोमियो स्क्वाड’ जैसे अभियान चलाना, महिला और बेटी सुरक्षा की बातें करना और उन्हें ‘भारत माता’ का दर्जा देना सिर्फ एक ढकोसला है, जुमलेबाजी है।

जन आन्दोलनों का राष्ट्रीय समन्वय कठुआ और उन्नाव की घटना की कड़ी निंदा और विरोध करता है और साथ ही उन्नाव में पीड़िता और असीफा के परिवार, उनके साथ निडरता के साथ खड़े वकील और विरोध प्रदर्शन करते निवासियों के साथ हैं। समर्थन में हैं। 12 अप्रैल 2018 को एन.ए.पी.एम. उत्तर प्रदेश के साथी पीड़िता से मिलने उन्नाव गए, समर्थन देने की प्रतिज्ञा ली और कुलदीप सेंगर को गिरफ्तार करने की मांग की। आज, इलाहबाद उच्च न्यायालय ने कुलदीप सेंगर को गिरफ्तार करने का आदेश दिया है जिसकी हम सराहना करते हैं लेकिन साथ में दोनों ही घटनाओं में पूर्ण न्याय और दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा की मांग करते हैं। साथ ही यह भी मांग करते हैं कि :-

  • उन्नाव घटना में संघर्शषील लड़की व उसके पूरे परिवार और कठुआ की घटना में असीफा के परिवार और उनकी वकील को सुरक्षा दी जाए।
  • सभी मामलों की जल्द से जल्द जाँच पूरी हो व समय पर चार्जशीट दाखिल की जाए और कठुआ मामले में जम्मू पुलिस को उनका काम करने दिया जाये।
  • दोनों घटनाओं की प्रकिया फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलायी जाए।
  • उत्तर प्रदेश में पीड़ित परिवार को बहुत खतरा है, तो इस केस की सुनवाई दिल्ली में स्थानांतरित की जाए।
  • कुलदीप सेंगर को विधायक पद से बर्खास्त किया जाए व चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया जाए।

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