कर्नाटक में देवगौड़ बन सकते हैं किंग मेकर
| Agency - 16 Apr 2018

राजनीति में कभी-कभी किंग से ज्यादा किंग मेकर का महत्व होता है। बिहार में एक बार ऐसे ही हालात बने थे जब राम विलास पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) किंगमेकर की भूमिका में आ गयी। कोई भी राजनीतिक दल अथवा उस समय का गठबंधन बगैर लोजपा के सरकार नहीं बना सकता था। सभी बड़े दलों ने प्रयास किया लेकिन श्री पासवान ऐसी-ऐसी बेतुकी शर्ते रखते रहे कि बिहार में सरकार नहीं बन पायी। राष्ट्रपति शासन लगाने के बाद जब एक साल के अंदर ही दुबारा विधानसभा के चुनाव हुए तो लोजपा को वहां की जनता ने ठुकरा दिया। जद(यू़ ने सरकार बनायी। इस तरह किंगमेकर का महत्व जरूर बढ़ जाता है लेकिन इस समय उसका कत्र्तव्य भी उतना ही बड़ा हो जाता है। यह बात कर्नाटक के विधानसभा चुनावों से पूर्व आये सर्वे को देखकर प्रासंगिक लगती है। ओपीनियन पोल सर्वे ने अनुमान जताया है कि इस बार कर्नाटक में किसी ीज्ञी पार्टी अथवा गठबंधन को सरकार बनाने भर का बहुमत नहीं मिलेगा। कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी। इस प्रकार पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा की पार्टी जनता दल (एस) ऐसी स्थिति में होगा कि भाजपा अथवा कांग्रेस दोनों में से किसी की भी सरकार बनवा सकेगा। हालांकि यह सब कुछ अभी अनुमान पर आधारित है और इस अनुमान से ही सियासी कयास लगाये जा रहे हैं। मौजूदा समय में कर्नाटक की 225 सदस्यीय विधान सभा में कांग्रेस के 122 विधायक हैं। दूसरे स्थान पर भाजपा है जिसके पास 43 विधायक हैं और तीसरे स्थान पर देवगौड़ा की पार्टी जनता दल (एस) के 29 और अन्य 14 विधायक हैं। विधानसभा की 16 सीटें खाली हैं। विधानसभा में 224 सदस्यों का चुनाव होता है जबकि एक सीट ऐंग्लोइंडियन के लिए मनोनीत की जाती है। इस विधान सभा के जब चुनाव हुए थे तब जद(एस) और भाजपा ने 40-40 विधायक प्राप्त किये थे। इसके बाद राजनीतिक घटनाक्रम बदला और जद(एस) के पास 29 विधायक ही बचे हैं। अब नयी विधानसभा के लिए 12 मई को मतदान होना है। इससे लगभग एक महीने पहले ओपीनियन पोल सर्वे हुआ है। इस सर्वे के मुताबित अगर आज वहां चुनाव हो जाएं तो कांग्रेस का पलड़ा भारी रहेगा। चुनाव में सत्ता रूढ़ कांग्रेस को 90 से 101 सीटें मिलने की संभावना जतायी गयी है। राज्य में सरकार बनाने के लिए 112 विधायक चाहिए। इस प्रकार सर्वे के अनुसार भी कांग्रेस अपने दम पर सरकार नहीं बना पाएगी। सरकार बनाने का दावा कांग्रेस और भाजपा दोनों दल कर रहे हैं। सर्वे के अनुसार यदि आज चुनाव है तो भाजपा को 78 से 86 तक सीटें मिल सकती हैं। इस प्रकार भाजपा पिछले चुनाव से काफी अधिक सीटें ला सकती है लेकिन सरकार बनाने के लिए उसे भी किसी अन्य दल का सहारा लेना पड़ेगा। राज्य में तीसरे स्थान पर देवगौड़ा की पार्टी जनता दल (एस)  रहेगी जिसे 34 से 43 तक विधायक मिलने की संभावना है। इस प्रकार जनतादल (एस) भाजपा अथवा कांग्रेस किसी का भी समर्थन कर देगा तो उसकी सरकार बन जाएगी। यह सर्वे इंडिया टुडे कार्वी की तरफ से 17 मार्च से 05 अप्रैल के बीच कराये गये हैं। इसके तहत 28 हजार के करीब लोगों का मत लिया गया है। चुनाव होने में लगभग एक महीने का समय है और तब तक वहां के समीकरण कौन सी करवट लेंगे यह अभी कहना मुश्किल है।
इसका संकेत दिया है तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने। श्री राव जनता दल (एस) के नेता एचडी देवगौड़ा से मिले और चुनावी रणनीति पर चर्चा की। उनका लक्ष्य तो 2019 का लोकसभा चुनाव है लेकिन उसकी भूमिका वे इसी साल कर्नाटक चुनाव से बनाना चाहते हैं। उधर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने एक बार फिर लिंगायत समीकरण सुधारने का जोर शोर प्रयास करते नजर आये। उन्होंने लिंगायत महेतो के बीच जाकर लिंगायतो को अलग धर्म का दर्जा देने का विरोध करने का कारण बड़ी विनम्रता से बताया। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी तुमकुर में साधुसंतों का आशीर्वाद लेने पहुंच गये है। कांग्रेस और भाजपा के लोग एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते। चुनाव आयोग ने जब राज्य में चुनाव की घोषणा की थी उससे पहले ही भाजपा मीडिया सेल के आईटी प्रकोष्ठ प्रमुख ने ट्वीट कर के चुनाव की तारीख घोषित कर दी थी। इसी तरह कांग्रेस के नेता ने भी सोशल मीडिया पर चुनाव की तारीख का पहले ही ऐलान कर दिया। भाजपा आईटी सेल प्रमुख ने मत गणना की तारीख 18 मई बतायी थी जबकि चुनाव आयोग ने 15 मई को मतगणना की तारीख घोषित की है। इस मामले को चुनाव आयोग तक ले जाया गया। उस समय कहा जा रहा था कि यह बहुतगंभीर मामला है लेकिन चुनाव आयोग ने इस पर कोई ऐक्शन लेना जरूरी नहीं समझा। चुनाव आयोग ने चेतावनी जरूर दी है और कहा चुनाव कार्य क्रम लीक नहीं हुआ था। 
सर्वे में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लोगों की राय जानी गयी । लोगों ने लिंगायत कार्ड को महत्वपूर्ण बताया है लेकिन 28 फीसद लोग कहते हैं कि यह कोई मुद्दा नहीं है। राहुल गांधी को मंदिरों और मठों से आशीर्वाद मिलता दिखाई पड़ रहा है क्योंकि सर्वे के अनुसार 42 फीसद लोग मानते हैं कि इससे राहुल की लोकप्रियता बढ़ी है और कांग्रेस को राजनीतिक लाभ मिलेगा। सिद्ध रमैया को अभी सबसे अच्छा मुख्यमंत्री बताया जा रहा है। इसके पीछे सिद्ध रमैया सरकार द्वारा कन्नड़ को अनिवार्य भाषा बनाने का निर्णय है। सर्वे में 73 फीसद लोगों ने समर्थन किया है। इसी प्रकार सिद्ध रमैया ने कर्नाटक के अलग झंडे के मामले को उठाया था। अलग झंडे के मामले में भी 59 फीसद लोग सिद्ध रमैया का समर्थन कर रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व मुख्य मंत्री एस एम कृष्ण बीते साल ही भाजपा में शामिल हो गये थे लेकिन चर्चा है कि वे फिर कांग्रेस का साथ देंगे। एस एम कृष्णा कांग्रेस के बड़े नेताओं में गिने जाते थे। श्री एसएम कृष्णा 1999 से 2004 के बीच राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं। श्री कृष्ण को लेकर भाजपा नेताओं का कहना है कि जब श्री एस एम कृष्णा ने कांग्रेस को अलविदा कहा था, तब कांग्रेसियों ने कहा गंभीर आरोप उनपर लगाये थे, इसलिए श्री कृष्णा कांग्रेस में वापस जाने वाले नहीं हैं। इस प्रकार भाजपा और कांगेस के अलग-अलग दावे हैं लेकिन श्री एस एम कृष्णा एक बात से दुखी हैं। वह है उनके दामाद वी जी सिद्धार्थ के दफ्तर और आवास पर आयकर विभाग का छापा। छापे के दौरान लगभग 650 करोड़ की अघोषित सम्पत्ति बरामद हुई थी। इसी प्रकार तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव का एचडी देवगौड़ा और अन्य नेताओं से मिलना भी कर्नाटक की चुनावी राजनीति में महत्व पूर्ण माने जा रहे हैं। चंद्र शेखर राव हालांकि गैर भाजपा और गैर कांग्रेसी क्षेत्रीय दलों का मोर्चा बनाना चाहते हैं लेकिन भाजपा की बाढ़ को रोकने की बात भी वे करते हैं। कर्नाटक मात्रा के दौरान श्री राव कई ऐसे नेताओं से मिले जो भाजपा विरोधी हैं। श्री एचडी देवगौड़ा ने भाजपा और कांग्रेस से समान दूरी बना रखी है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही जनता दल (एस) की आलोचना करते हैं लेकिन तीसरे मोर्चे के नेता कर्नाटक में यह प्रयोग करना चाहते हैं और प्रयोग का एक सूत्र यह भी है कि जहां जो मजबूत दल है, उसी का समर्थन करके भाजपा को रोका जाए। इस प्रकार देवगौड़ा को कांग्रेस के साथ खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है। चुनाव के समय अनुमान लगाना हालांकि सबसे सतही पत्रकारिता होती है और कईबार अनुमान गलत साबित हुए हैं लेकिन कर्नाटक में देवगोड़ा की भूमिका गलत अनुमान नहीं साबित होगा।
 


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