ट्रम्प ने उखाड़ दी हाफिज की गिल्ली
| Agency - 16 Apr 2018

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मुंबई आतंकवादी हमले के मास्टरमाइंड व आतंकवादी संगठन जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद की सियासी उम्मीदों का विकेट गिरा दिया। भारत और अफगानिस्तान में आंतकी फसल उगाने वाले हाफिज की राजनीतिक पार्टी मिल्ली मुस्लिम लीग यानी एमएमएल को प्रतिबंधित कर उसकी जड़ में गर्म पानी डाल दिया है। अमेरिका ने उसे विदेशी आतंकी संगठन घोषित कर दिया है। यह सईद और उसकी राजनीति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अमेरिकी सरकार के इस फैसले से हाफिज ही नहीं पाकिस्तान आर्मी, उसकी खुफिया आईएसआई और चीन की बौखलाहट बढ़ गई है क्योंकि यूएन में हाफिज सईद को अंतर राष्ट्रीय आतंकी घोषित करने के लिए भारत के बार- बार प्रयास को चीन ने कई बार वीटो लगा बड़ा झटका दिया है। अमेरिका ने राजनीतिक संगठन मिल्ली मुस्लिम लीग के सात सदस्यों को भी लश्कर-ए-तैयबा की ओर से आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के कारण विदेशी आतंकवादी घोषित किया है।मिल्ली  पर अमेरिका ने यह कदम ऐसे वक्त में उठाया है, जब पाक के चुनाव आयोग ने एमएमएल को राजनीतिक दल के रूप में मंजूरी नहीं दी है। पाक का चुनाव आयोग एमएमएल के एक राजनीतिक दल के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन को भी खारिज कर चुका है। हाफिज सईद को लेकर पाक हमेशा से ही नरमी बरतता आया है।  यही वजह है कि वो अब पाक की पॉलिटिक्स में अपने पैर पसारने के प्रयास में जुटा था। लश्कर-ए-तैयबा का गठन 1980 में हुआ था।  2008 में मुंबई में हुए आतंकवादी हमले में हाफिज सईद के इसी संगठन का हाथ था जबकि अमेरिका ने 2001 में लश्कर को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित कर सईद को भी वैश्विक आतंकवादी घोषित किया है। अमेरिकी सरकार ने पाकिस्तान को दुनियाभर में दहशतगर्दी और आतंक फैलाने के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए आतंक की फसल उगाने वाले देशों की सूची में डाल दिया है। 
अमेरिका की इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेनकाब हुआ है। अब यह साबित हो गया है कि भारत, अफगानिस्तान और दूसरे देशों में फैला आतंकी जाल उसकी साजिश है। सवाल यह है कि पाकिस्तान पर क्या इस कार्रवाई से कोई फर्क पड़ने वाला है। पड़ोसी मुल्कों में आतंक की आपूर्ति नीति पर क्या वह प्रतिबंध लगाएगा, उसके नजरिए में क्या कोई बदलाव आएगा। लेकिन भारत ने एक बड़ी कूटनीतिक जीत हासिल कर ही ली। पाकिस्तान की धरती पर लश्कर, जैश-ए-मोहम्मद और हक्कानी नेटवर्क की फसल खूब फलती-फूलती है। 
अमेरिका ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के संरक्षण में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों के शिविरों को भी बंद करने का ऐलान किया था ।  पाकिस्तान को मिलने वाले करोड़ों के रक्षा बजट में तीन संशोधन किए गए थे ।  यह प्रस्ताव 81 के मुकाबले 344 मतों से पारित हुआ था।  अमेरिका ने 2571 करोड़ की सैन्य मदद पर शर्तों के साथ रोक लगा दी थी। अमेरिका साफ कह चुका है कि पाकिस्तान आतंकियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह और स्वर्ग साबित हो रहा है लेकिन सवाल उठता है कि क्या पाकिस्तान अपनी आदतों में सुधार लाएगा। आतंकी घोषित होने के बाद भी सैयद सलाहुद्दीन पाकिस्तानी टेलीविजन पर खुलेआम भारत में आतंकी विस्फोट करने की धमकी देता है। क्या यह सब बंद होगा। 
पाकिस्तान हाफिज सईद की राजनीति की जरिए देश में जहाँ अपना राज चाहता है वहीँ भारत को तबाह करने के सपने देख रहा है। पाकिस्तान का बँटवारा , कारगिल युध्द में पराजय उसे आज भी चुभती है। वह जानता है कि भारत से सीधे युध्द में वह कभी नहीं जीत सकता,  इसलिए कश्मीर में अलगाववाद और आतंकवाद की नर्सरी तैयार करने में लगा है। चीन भी भारत को बरबाद करने के मिशन पर काम कर रहा है क्योंकि अमेरिका, जापान से बढ़ते रिश्ते और सैन्य अभ्यास पर सहमति से वह चिढ़ गया है। चीन अच्छी तरह जानता है कि दक्षिण एशिया में भारत के दबदबे को कम करना है। उसे मालूम है कि भारत को हम नतमस्तक कर देंगे तो दक्षिण एशिया में उसकी ही दादागिरी नहीं चलेगी, क्योंकि भारत एक ऐसा देश है जो चीन की सबसे बड़ी चुनौती है। यहीं वजह है कि वह पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, बंगलादेश और मालदीव में बड़ा निवेश कर रहा है। सम्बन्धित देशों में अपने सैन्य अड्डे विकसित कर रहा है। सस्ते चीनी माल का साम्राज्य फैला रहा है, जिससे भारत के पड़ोसी मुल्क उसके खिलाफ हो जाएं और युध्द की स्थिति में इन देशों का इस्तेमाल किया जाय। इसी वजह से वह डोकलाम और अरुणाचल में आये दिन घुसपैठ की कोशिश में लगा है। दुनिया में भारत की बढ़ती ताकत से वह घबरा गया है और भारतीय सीमा पर स्थायी सैन्य विकास में जुटा है। भारतीय सीमा तक सड़कें बना फाइटर जेट तैनात किए जा रहे हैं। उसे ट्रम्प और मोदी की दोस्ती अच्छी नहीं लग रही। हाल ही में उत्तर कोरिया के सनकी तानाशाह किम जोन्ग और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग की मुलाकात इसी कूटनीति का प्रहसन है। चीन अमेरिका को पछाड़ तीसरी दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बनना चाहता है।पाकिस्तान की अंधी सरकार को यह साफ क्यों नहीं दिखाई देता कि अमेरिका द्वारा आतंकी देश घोषित किए जाने के बाद पाकिस्तान की धरती से चलाए जा रहे सीमा पार आतंकवाद पर रोक क्यों नहीँ लग पाई। 
अमेरिकी कांग्रेस की सालाना रिपोर्ट कंट्री रिपोर्ट ऑन टेररिज्म में कहा गया था कि पाकिस्तान ने तालिबान या हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। 2016 में पठानकोट हमले के बाद पाकिस्तानी टीम भारत गई थी। इस हमले में जैश-ए-मोहम्मद का हाथ था, लेकिन पाकिस्तान ने कोई कार्रवाई नहीं की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के बाद दोनों महाशक्तियों के बीच कूटनीतिक रिश्तों में अहम बदलाव आए हैं। पाकिस्तान में पनाह लिए सैयद सलाहुद्दीन को आतंकी घोषित करना भारत के संबंधों में विश्वास की पहली सीढ़ी साबित हुई। दूसरी तरफ चीन को बड़ा झटका भी लगा है, क्योंकि हाफिज सईद के मसले पर वह वीटो का प्रयोग करता रहा है। जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने बिल्कुल साफ कहा था कि कश्मीर में अलगाववादी ताकतों को बढ़ावा देने में चीन का हाथ साफ नजर आ रहा है क्योंकि आतंकी हमलों के बाद मिलने वाले आधुनिक हथियार चीन के बने होते हैं। कश्मीर को अस्थिर करने की एक सोची समझी रणनीति है, इसे भारत विरोधी ताकतें मंजिल तक पहुंचा रही हैं। भारत की सबसे बड़ी चुनौती चीन है पाकिस्तान कहीं नहीँ ठहरता। 
अमेरिका ने हाफिज की सियासी पार्टी मिल्ली मुस्लिम लीग पर प्रतिबंध लगा चीन और पाकिस्तान के गठजोड़ की गिल्ली उखाड़ी है। चीन को मात देने के लिए कूटनीतिक तौर पर भारत, अमेरिका और जापान की तिकड़ी जरूरी है। दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते दखल पर लगाम लगाने के लिए हमें पड़ोसियों का दिल भी जीतना होगा। 
 


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