गौरी लंकेश ::संघ की ब्राह्मणवादी शरण में नहीं आना और मोहन भागवत के अपमान का परिणाम तो नहीं
| Manoj Chaudhary - 28 Sep 2017

अभी कुछ दिन पहले लिंगायत समाज का एक विशाल सम्मेलन हुआ जिसमे इस समाज के लोगो ने मोहन भगवत को चेतावनी दी थी की इस समाज का भगवाकरण / ब्रह्मानिकरण न करे और इस समाज से दूर रहे , यह बात ज्ञात होनी चाहिए की यह समाज कर्नाटक के समाज और राजनीति में एक अहम् भूमिका निभाता है और यही कारण है संघ इनका हिन्दुकर्ण करना चाहता है , हिन्दुकरण करने का मतलब है इनको ब्राह्मणों का गुलाम बना देना , जबकि यह समाज आज भी अपनी संस्कृति से ही जीता है , 

हो सकता है यही कारण रहा हो की मोहन भागवत को यह बात अपमानजनक लगी हो और अपने पुराने तरीके अपनाते हुए गौरी लंकेश की हत्या करवा दी 

इस बारे में एक विचारक श्री महेंद्र यादव फेसबुक पर लिखते है 

“””कर्नाटक में परंपरागत रूप से ब्राह्मण विरोधी रहे लिंगायत समुदाय का भाजपा संघीकरण करने में जुटी है। इसमें गौरी लंकेश, उनके पिता पी लंकेश और लंकेश पत्रिके बड़ी बाधा रहे हैं। 


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