थाईलैण्ड में उत्तराखंड की पर्यटन छवि
| Agency - 19 Apr 2018

हिमालय की तलहटी और रमणीय वनों,झीलों का प्रदेश उत्तराखंड भारत ही नहीं पूरी दुनिया को आक्सीजन भरी हवा उपलब्ध कराता है। इस प्रदेश को देव भूमि भी कहा जाता है जिसका क्षेत्र सुदूर चीन के कैलाश मान सरोवर तक फैला है। हरिद्वार को हरद्वार इसीलिए कहते हैं कि यहां से भगवान शिव के कैलाश पर्वत का रास्ता शुरू होता है। इसके अलावा मां पूर्णागिरि की शक्तिपीठ यहीं पर हैं। यहां से ही पतित पावनी गंगा एवं यमुना नदियां निकलती हैं। पूरा प्रदेश सुरम्यता के साथ स्वास्थ्य वर्द्धक वातावरण प्रदान करता है। ऐसे क्षेत्र में पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं और मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उत्तराखंड की पर्यटन छवि को थाईलैण्ड में इस तरह पेश किया है जिससे वहां के उद्यमी राज्य में पर्यटन आधारित कार्यक्रमों में निश्चित रूप से हिस्सा लेंगे। मुख्य मंत्री त्रिवेन्द्र रावत ने पर्यटन को इसलिए भी बढ़ावा देने की रणनीति बनायी हैं क्योंकि जीएसटी के चलते राज्य की कमायी का बड़ा हिस्सा प्रदेश से बाहर चला जाता है। इसलिए पर्यटन के क्षेत्र में विदेशी निवेश राज्य की जनता को जहां अच्छा रोजगार देगा, वहीं सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा। इसी अक्षय तृतीया अर्थात 18 अप्रैल से यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट भी खुल गये हैं। इस प्रकार धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से आने वाले देश विदेश के लोगों की संख्या में बढ़ोत्तरी होगी।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के नेतृत्व में राज्य का प्रतिनिधि मंडल थाईलैण्ड की राजधानी बैंकाक पहुंचा। बैंकाक में मुख्यमंत्री और उनके प्रतिनिधि मंडल ने उत्तराखंड में पर्यटन और खाद्य प्रसंस्करण समेत विभिन्न क्षेत्रों में पूंजी निवेश के लिए थाईलैण्ड के उद्यमियों और निवेशकों  को आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि उत्तराखंड प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में उभर रहा है अर्थात यहां पर निवेश के लिए बहुत अच्छी संभावनाएं हैं। राज्य में जीवंत उत्पादक औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र उपलब्ध है। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में बैंकाक में एक संगोष्ठी हुई जिसमें उत्तराखंड में निवेश की संभावनाओं पर यहां और वहां के लोगों ने अपने विचार रखे। उत्तराखंड के पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने राज्य में पर्यटन गतिविधियों, पर्यटन क्षेत्रों के विकास व संभावनाओं से संबंधित तथ्यों के साथ प्रस्तुतियां दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य पर्यटन, वेलनेस टूरिज्म और आयुष सहित कई क्षेत्रों के लिए उत्तराखंड एक केन्द्र के रूप में उभरा है। पर्यटक यहां पर आकर खुद को स्वर्ग के नजदीक महसूस करेंगे। उन्होंने बताया कि राज्य में कई स्पा व योग सेन्टर हैं। इनमें प्रशिक्षित योग गुरू और थेरेपिस्ट हैं। केन्द्र सरकार की तरफ से आलवेदर रोड का निर्माण कराया जा रहा है। इस रोड़ से किसी भी मौसम में प्रदेश के कोने-कोने में जाया जा सकेगा। इस प्रकार तीर्थयात्री और पर्यटक वर्षभर आ सकेंगे। मुख्यमंत्री ने थाईलैण्ड के लोगों को बताया कि योग और आयुर्वेद के माध्यम से स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन के बीच एक आदर्श संतुलन पाने के लिए पर्यटक उत्तराखंड में आते हैं। इसी वजह से प्रदेश में चिकित्सा पर्यटन पर भी ध्यान दिया जा रहा हैं। मुख्यमंत्री ने थाईलैण्ड की कम्पनियों से उत्तराखंड में पर्यटन योजनाओं में निवेश करने का अनुरोध इस तरह से किया है कि किसी के मुंह से नहीं शब्द नहीं निकला। मुख्यमंत्री की थाईलैण्ड यात्रा का असर प्रदेश में शीघ्र ही दिखाई पड़ेगा।
राज्य में पर्यटन यूं तो साल भर होता है लेकिन गर्मी का मौसम विशेष रूप से लोगों को यहां खींच लाता है। धार्मिक प्रवृत्ति के लोग चारों धाम के दर्शन करने को बड़ा पुण्य मानते है। यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट 18 अप्रैल को खोल दिये गये। इस दिन अक्षय पुण्य देने वाली अक्षय तृतीया होती है और तीर्थ यात्रियों की भीड़ वहां पहुंचती है। यमुनोत्री मंदिर के कपाट जब खोले गये तो हजारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। यहां पर विधायक केदार रावत ने श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए उनकी सुविधाओं को भी देखा। इसी प्रकार गंगोत्री मंदिर के कपाट जब खुले तो वहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे और विधायक गोपाल रावत ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया। गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलने से एक दिन पहले खरसौली से पंचपंडा समिति ने रात में जागरण का आयोजन किया। खरसौली स्थित मां यमुना के भवन में विशेष पूजा अर्चना की गयी। यह भवन नया बनाया गया है। यहां पर यमुना जी का शीत कालीन प्रवास स्थल माना जाता है। यहीं से यमुना जी की डोली यात्रा रवाना होती है। इस भावपूर्ण दृश्य को थाईलैण्ड के लोगों ने भी देखा और श्रद्धावनत हुए। 
उत्तराखंड में धार्मिक दृष्टि से पर्यटक देवी-देवताओं के दर्शन करने आते हैं। यहां पर देवी मां के प्रमुख मंदिरों में धारा देवी, गर्जिया मंदिर, मंशादेवी, ज्वाला देवी, पूर्णागिरि, चंडी देवी आदि हैं तो शिव मंदिरों में विल्वकेश्वर महादेव, नीलकण्ठ महादेव, केदारनाथ, रूद्र नाथ और नील कण्ठ के मंदिर हैं। यहां पर नाग देवता के वैजनाथ, बागनाथ, पुष्कर नागा, नागराज आदि मंदिर भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। इन मंदिरों के अलावा उत्तराखंड में सांस्कृतिक झलक दिखाने वाले कई मेले लगते हैं जिनमें बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। इनमें उत्तरायणी मेला, चैतीमेला, राजराजेस्वरी देवी मेला, कुलसारी मेला आदि प्रमुख हैं। पर्यटक इन मेलों में उत्साह से भाग लेते हैं और पर्वतीय संस्कृति का आनंद उठाते हैं। इन सभी स्थलों पर अच्छे आवास और अन्य सुविधाओं में निवेश किया जा सकता है।
उत्तराखण्ड को ईश्वर की धरती इसीलिए कहा गया है। यहां पर सम्पूर्ण धरा का अनूठा रूप दिखता है। यहां के प्रमुख पर्यटन स्थलों में नैनीताल, उत्तरकाशी, मसूरी और चमोली को प्रमुख माना जाता है। मसूरी को तो पहाड़ों की रानी कहते हैं। उत्तराखण्ड अपने हिल स्टेशनों जैसे मसूरी, चोपटा, अल्मोड़ा, नैनीताल, धनौतटी, लैंस डाउन, बैली आफ फ्लावर और सतल के लिए प्रसिद्ध है। ये सभी स्थल हरियाली से भरे रहते हैं। यहां पर पहाड़ियों की चोटियां बर्फ की चादर ओढ़े रहती हैं और उगते सूर्य की लाल किरणें जब उनपर पड़ती हैं तो वह दृश्य देखते ही बनता है। वैली आफ फ्लावर में लगभग ढाई सौ फूलों की सुन्दर प्रजातियां पायी जाती हैं। यहां के वन औषधियों से भरे हैं। प्रदेश की राजधानी देहरादून खूबसूरत हिल स्टेशन हैं। इसके अलावा प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा दिया गया। इससे यहां के फल और सब्जियां पूरी दुनिया में पौष्टिक मानी जाती हैं। इनके प्रसंस्करण की प्रचुर संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत और उनके साथ गये प्रतिनिधि मंडल ने थाईलैण्ड में उत्तराखंड की इन सभी विशेषताओं से परिचित कराया है। उन्होंने प्रदेश का ऐसा सुंदर चित्र वहां प्रस्तुत किया जिससे थाईलैंण्ड के लोगों की उत्तराखंड में निवेश की संभावनाएं बढी हैं। 
 


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