उच्च न्यायालय के आदेश की भी बिरला समूह सेंचुरी के द्वारा अवमानना
| Manoj Chaudhary - 21 Apr 2018

सेंचुरी श्रमिकों का मुख्य द्वार पर सत्याग्रह जारी। कंपनी के अंदर कर्मचारियों का भी सत्याग्रह, कुमार मंगलम बिरला समूह की सेंचुरी और सेंचुरी डेनिम दो कंपनियों को कोलकाता की वीयरिट ग्लोबल कंपनी को बेचने की बात उच्च न्यायालय ने 7 अप्रैल के आदेश द्वारा झूठी ठहराई। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पी के जायसवाल व रविंद्र सिंह की खंडपीठ ने औद्योगिक न्यायाधिकरण का 24 /11/2018 का फैसला जायज व न्यायपूर्ण  ठहराया। उच्च न्यायालय ने मान्य किया कि बिक्रीनामा में संपत्ति का मूल्य 426 करोड़ रुपए के बदले मात्र 2.51 करोड़ बनाना, बिक्री का रजिस्ट्रेशन नहीं, करोड़ रुपए की स्टांप ड्यूटी का भुगतान न करना। इन कारणों से बिक्री में अनियमितता, यानी अवैधता है। इस फैसले के बाद भी सेंचुरी मिल्स न खोलते हुए श्रमिकों को 6 महीने बाद भी सेंचुरी मिल्स के ग्राम सत्राटी में स्थित फैक्ट्री के मुख्य द्वार पर बैठकर सत्याग्रह करना पड़ रहा है। सेंचुरी मिल्स के मालिक व प्रबंधक कोर्ट के फैसले की यानी न्यायपालिका का सीधे तौर पर अवमानना कर रहे हैं।
फैक्टरी पर आज भी वीयरिट कंपनी का कब्जा कहें या राज चालू है। अंदर बैठे कर्मचारियों को वीयरीट के तहत काम करने की बात लिखित में मंजूर करने के लिए दबाव लाने पर स्पष्ट रुप से नकारकर स्टाफ कर्मचारियों ने भी वीयरिट के प्रबंधक (सेंचुरी के भूतपूर्व प्रबंधक रहे) श्री अनिल दुबे जी के कार्यालय पर भी कुछ घंटों तक कई बार सत्याग्रह कर चुके हैं, उन्हें 2 महीने से तनख्वाह देना सेंचुरी कंपनी ने बंद कर रखा है यह श्रमिकों के साथ इतना बदसलूकी, गैरकानूनी व अन्याय पूर्ण कंपनी के नाते सेंचुरी की बदनामी हो रही है और जरूरी है । सेंचुरी और वेयर इट के खिलाफ श्रम आयुक्त की सहमति लेकर औद्यौगिक विवाद अधिनियम की धारा 18, 29 व 34 के आधार पर अपराधी प्रकरण भी खरगोन के मुख्य मजिस्ट्रेट के सामने दाखिल किये जा चुके हैं,  जिन पर 27/04/2018 के रोज प्रथम सुनवाई होगी।  औद्यौगिक न्यायाधिकरण ने श्रमिकों का सेन्चुरी मिल्स बन्द  होने की स्थिति में, 17/08/2017 को कम्पनी ने लिखित में किए वी. आर.  एस. देने के तहत जो दावा है उस पर सुनवाई 24/04/2018 को तय है। आखिर मध्य प्रदेश शासन न्यायपालिका के फैसले का अमल भी कम्पनियों से नहीं कराना चाहती है। क्यों? क्या मध्य प्रदेश शासन की कम्पनियों से मिलीभगत है?  क्या चुनाव में कम्पनियों से अर्थलाभ चाहते हैं? क्या मध्य प्रदेश शासन भी न्यायपालिका को नहीं मानती? 
यह स्थिति कोर्ट के किसी भी फैसले की अवमानना की अगर सामान्य नागरिक, एकाध श्रमिक के द्वारा पैदा की जाती तो निश्चित ही राज्य व केन्द्र सरकार उसे सजा दिलाए बिना उसकी सम्पदा जप्त किए बिना नही रहते। यही तो है, गैर बराबरी और अत्याचार।  सेन्चुरी मिल अगर नही खोली गई तो श्रमिक और कर्मचारी एकता उन्हें जरुर सबक सिखाएंगे।
ज्योति  भगाने,  राजकुमार दुबे,  ए. पी. यादव, मोहन निमजे,  मेधा पाटकर


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