जीएसटी नेटवर्क बना सरकारी संस्था
| Agency - 05 May 2018

देश में अगले 6 महीने में जीएसटी रिटर्न के लिए केवल एक फॉर्म होगा। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने 4 मई को रिटर्न दाखिल करने की व्यवस्था को आसान बनाने के अलावा जीएसटी नेटवर्क को सरकारी संस्था बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।  अलबत्ता प्रति किलो चीनी पर 3 रुपये उपकर लगाने और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन के प्रस्ताव पर आम सहमति नहीं बन पाई। इन दोनों मुद्दों पर अब मंत्रियों के समूह में चर्चा होगी।  वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये जीएसटी परिषद की 3 घंटे तक चली बैठक की अध्यक्षता वित्त मंत्री अरुण जेटली ने की। राजस्व सचिव हसमुख अढिया ने बैठक के बाद कहा, रिटर्न दाखिल करने की नई व्यवस्था तीन चरणों में पूरी होगी। इसके लिए नया सॉफ्टवेयर बनाने में 6 महीने लगेंगे। 
 इससे पहले सरकार ने जीएसटीआर2 (खरीदार के लिए) और जीएसटीआर3 (इनपुट-आउटपुट के लिए) फॉर्म को रोक दिया था। अलबत्ता जीएसटीआर1 (विक्रेताओं के लिए) और जीएसटीआर 3बी (इनपुट-आउटपुट सारांश) को 30 जून तक जारी रखा गया था। अढिया ने कहा कि अगले 6 महीने में एकल रिटर्न फॉर्म इन दोनों की जगह लेगा। 6 महीने बाद नई व्यवस्था शुरू की जाएगी जो दूसरा चरण होगा। इसमें अगर विक्रेता बिलों को अपलोड नहीं करता है तब भी खरीदार को उसकी गणना के आधार पर 6 महीने तक अस्थायी क्रेडिट की अनुमति होगी।      
जाहिर है कि तीसरे चरण में एक बार व्यवस्था के स्थिर होने पर खरीदार को अस्थायी इनपुट टैक्स क्रेडिट की अनुमति नहीं होगी। यह तभी उपलब्ध होगा जब विक्रेता बिल अपलोड करेगा। अलबत्ता कर देनदारी का भुगतान करने की जिम्मेदारी विक्रेता पर होगी।  अढिया ने कहा, अगर विक्रेता कर का भुगतान नहीं करता है तो सरकार उससे कर देनदारी वसूल करेगी। उन्होंने कहा कि अगर विक्रेता से कर वसूल नहीं किया जा सका तो नियम के मुताबिक खरीदार से कर वसूलने के प्रयास किए जाएंगे। क्लीयरटैक्स के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी अर्चित गुप्ता ने कहा कि चरणबद्ध तरीके से आगे बढने से ऑटोमैटिक क्रेडिट दावे की सुगम व्यवस्था बनेगी। पीडब्ल्यूसी इंडिया में पार्टनर प्रतीक जैन ने कहा कि एक मिलेजुले मॉडल के लिए आम सहमति थी जहां महीने में एकल रिटर्न सौंपने की जरूरत होगी लेकिन क्रेडिट तभी मिलेगा जब विक्रेता बिल अपलोड करेंगे।  
इसका मतलब यह है कि बिलों का मिलान जारी रहेगा लेकिन खरीदारों को इसे ऑफलाइन करने की जरूरत है। वित्तमंत्री जेटली ने कहा कि जीएसटी परिषद ने चीनी क्षेत्र में मौजूदा संकट पर विचार किया जहां किसानों को कठिन स्थिति का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि चीनी की लागत बाजार मूल्य से ज्यादा है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर अगले दो दिनों में मंत्रियों के समूह की घोषणा कर दी जाएगी और जल्दी ही कोई फैसला लिया जा सकता है। वित्त मंत्री ने कहा, चीनी की लागत 35 रुपये प्रति किलो के ऊपर पहुंच चुकी है जबकि बाजार कीमत 26 से 28 रुपये के बीच है। किसान मुश्किल में हैं और इसलिए क्या हम किसी तरह का उपकर लगा सकते हैं? डिजिटल भुगतान पर दो फीसदी छूट देने के प्रस्ताव को भी टाल दिया गया है। प्रस्ताव के मुताबिक डिजिटल भुगतान करने वाले को जीएसटी में दो फीसदी छूट दी जाएगी। केरल के वित्त मंत्री ने कहा कि इस मुद्दे पर मंत्रियों का समूह विचार करेगा।
फिलहाल जीएसटी परिषद ने जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) को सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी में तब्दील करने को मंजूरी दे दी। डेटा की सुरक्षा की चिंता को देखते हुए ऐसा किया गया है। परिषद ने जीएसटीएन में गैर-सरकारी संस्थानों की समूची 51 फीसदी हिस्सेदारी को केंद्र और राज्यों को अधिग्रहीत करने की मंजूरी दे दी। इसकी कीमत करीब 5.01 करोड़ रुपये होगी। वित्त मंत्रालय ने कहा कि जीएसटी प्रक्रिया के तहत पंजीकरण, रिटर्न दाखिल करना, करों का भुगतान, रिफंड आदि की जिम्मेदारी जीएसटीएन संभालता है और इसमें लाखों कारोबारी इकाइयों के डेटा उपलब्ध हैं। मंत्रालय ने कहा कि जीएसटीएन के परिचालन को देखते हुए परिषद ने जीएसटीएन को सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी में बदलने की मंजूरी दी है। इसमें केंद्र की 50 फीसदी और सभी राज्यों की समेकित रूप से 50 फीसदी हिस्सेदारी होगी। फिलहाल पांच निजी संस्थानों-एचडीएफसी, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एनएसई स्ट्रैटजिक इन्वेस्टमेंट कंपनी और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस के पास 51 फीसदी हिस्सेदारी है। 
 


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