महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहे रघुवर
| Agency - 10 May 2018

देश और समाज का विकास तब तक नहीं हो सकता, जबतक महिलाओं को स्वावलम्बी नहीं बनाया जाएगा। इस सिद्धांत पर ही झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास चल पड़े हैं। उन्होंने राज्य की महिलाओं को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के साथ स्वरोजगार की तरफ भी बढ़ाया है। मुख्यमंत्री रघुवर दास की जनकल्याण कारी योजना से महिलाओं को लाभ हो रहा है। राज्य खादी बोर्ड ने 30 महिलाओ का समूह बनाकर पूर्वी सिंहभूम जिले में इसकी शुरूआत की है। यहां पर सिलाई, बुनाई और कढ़ाई से लेकर खादी वस्त्रों को बाजार में उपलब्ध कराने तक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह योजना पहले भी चलाई गयी थी लेकिन सरकार ने पर्याप्त ध्यान नहीं दिया और योजना बंद हो गयी। अब इसे फिर से शुरू किया जा रहा है।
झारखंड राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के सलाहकार योगेश मल्होत्रा ने गत दिनों बताया था कि जो महिलाएं सरकारी नौकरी नहीं करतीं और कोई गृहउद्योग भी नहीं कर रही हैं, उनके पास अपने रोज के कार्य निपटाने के अलावा भी समय बचता है। इस समय का उपयोग वे आर्थिक उपार्जन में कर सकती हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और झारखंड के मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने महिलाओं को पूरी तरह से स्वावलम्बी बनाने के लिए रोजगार देने की कल्पना की है, इसी के तहत खादी एवं ग्रामोद्योग महिलाओं को प्रशिक्षण दे रहा है। खादी बोर्ड से प्रशिक्षण के लिए जुड़ी महिलाएं सरकार की इस पहल से खुश हैं और काम सीख रही महिलाओं को इस बात की खुशी और संतुष्टि मिल रही है कि वे आत्मनिर्भर बन सकेंगी। आगे चलकर पूर्वी सिंहभूम जिले में सुदूर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को भी खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड प्रशिक्षण देगा। मुख्यमंत्री को पता है कि रोजगार के लिए राज्य में सड़क मार्ग का दुरूस्त होना भी जरूरी है। इसी के चलते मुख्यमंत्री ने कुछ दिनों पहले केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से भी मुलाकात की थी और राज्य में चल रही सड़क परियोजनाओं तथा साहिब रोड में गंगापुल का निर्माण तेजी से कराने की मांग की थी। 
मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस समय जनता के बीच अपनी उपलब्धियों की सक्रियता इसलिए बढ़ा दी हैं क्योंकि राज्य में दो विधान सभा सीटों के लिए उपचुनाव होने हैं। राज्यों में भाजपा ने उपचुनावों में सफलता नहीं प्राप्त की है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और फिर उत्तर प्रदेश में कोई भी उपचुनाव भाजपा नहीं जीत सकी है। इसलिए झारखंड में मुख्यमंत्री रघुवर दास इस मिथक को तोड़ना चाहते है। झारखंड के गोमिया में झारखण्ड मुक्तिमोर्चा (झामुमो) विधायक योगेन्द्र महतो और सिल्ली में भी झामुमो विधायक श्रमित महतो की विधान सभा सदस्यता खत्म होने के कारण उपचुनाव हो रहे हैं। हालांकि ये दोनों सीटें भाजपा की नहीं हैं लेकिन मध्यप्रदेश और राजस्थान में भी चार विधान सभा और दो लोकसभा की सीटें कांग्रेस की ही थीं फिर भी सत्तारूढ़ होते भाजपा उन्हें अपनी झोली में नहीं डाल पायी और कहा गया कि सरकार की पकड़ ढीली हो गयी है। उत्तर प्रदेश में तो भाजपा को जबर्दस्त झटका लगा जहां उसकी दोनों प्रतिष्ठा वाली लोकसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी ने कब्जा कर लिया था। इसलिए झारखंड में दो विधान सभा की सीटों पर उपचुनाव जीतना अब मुख्यमंत्री रघुवर दास के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न भी बन गया है।
झारखंड की इन दोनों विधान सभा सीटों के लिए उपचुनाव 28 मई को होना है। हालांकि इससे पहले कर्नाटक विधान सभा चुनाव का नतीजा घोषित हो जाएगा, जहां भाजपा ने कांग्रेस से सत्ता छीनने के लिए पूरी तकत लगा रखी है। इसके बावजूद झारखंड में विधानसभा उप चुनावों का महत्व कम नहीं होगा। वहां नामांकन शुरू हो चुका है और पर्चा दाखिल करने की अंतिम तिथि 10 मई थी। इन उपचुनावों को लेकर राज्य का सियासी पारा चढ़ा हुआ है। विपक्ष को एक तरफ एकजुटता का भरोसा है तो भाजपा के लिए 2019 की भूमिका इन उपचुनावों में भी दिखाई पड़ रही है। भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन राजग के सामने बिखराव की समस्या खड़ी हो गयी है। एक तरफ सभी राजनीतिक दल अपनी अपनी जमीन बचाने और खुद के जनाधार को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहे हैं तो सत्ता के साझेदार आमने-सामने खड़े हो गये है। सरकार में आल झारखंड स्टूडेण्ट यूनियन (आजसू) शामिल है लेकिन उपचुनाव में उसने अपने को अलग कर लिया है।
भाजपा ने गोमिया विधान सभा सीट से माधव लाल को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है। इसी सीट पर आजसू अपना उम्मीदवार उतारना चाहता है। आजसू दोनों सीटों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। इस प्रकार झारखंड में सरकार के दोनों सहयोगियों में ही मुकाबला होना तय है और इसका फायदा विपक्ष को मिल सकता है विपक्षी दल के नेता कहते हैं कि मंत्रिमंडल में एक साथ बैठने वाले नेता ही एक-दूसरे पर जब विश्वास नहीं कर रहे हैं तो सरकार कैसे चलाएंगे। विरोधियों के सवाल का फिलहाल भाजपा के पास कोई जवाब नहीं है। हालांकि भाजपा के नेता आजसू नेताओं से गठबंधन धर्म निभाने का हवाला दे रहे है और विपक्षी दलों पर जातिवाद, वंशवाद और परिवार वाद की राजनीति करने का आरोप भी लगाते हैं लेकिन श्री मोदी ने रघुवर दास को इसीलिए मुख्यमंत्री बनाया था कि वे सत्ता के साझेदार दलों के साथ बेहतर सामंजस्य बनाये रखेंगे। इसमें दास को सफलता नहीं मिली है।
आल झारखण्ड स्टूडेण्ट्स यूनियन (आजसू) के सुप्रीमों सुदेश महतो ने दिल्ली उपचुनाव के लिए 7 मई को नामांकन भी दाखिल कर दिया है रांची के कलेक्ट्रेट भवन में जब श्री महतो अपना नामांकन करने पहुंचे तब उनके समर्थकों की भारी भीड़ भी देखी गयी। इसी प्रकार गोमिया विधान सभा क्षेत्र से आजसू के लम्बो दर महतो ने पर्चा दाखिल किया है। भाजपा ने अपने इस सहयोगी दल को समझाने का भरपूर प्रयास किया और सिल्ली विधानसभा उपचुनाव में अपना प्रत्याशी नहीं खड़ा किया। भाजपा यहां आजसू के साथ खड़ी है लेकिन गोमिया में टकराव हो गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की तरफ से सिल्ली से पूर्व विधायक अमित कुमार महतो की पत्नी सीमा महतो और गोमिया से पूर्व विधायक योगेन्द्र प्रसाद महतो की पत्नी बबीता देवी को प्रत्याशी बनाया गया है। झामुमों इस प्रकार वहा मतदाताओं की सहानुुभूति पूर्व विधायकों को लेकर प्राप्त करना चाहता है। झामुमो को विपक्षी दलों का समर्थन भी मिल रहा है। गत दिनों झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन के आवास पर हुई बैठक में कांग्रेस, झारखण्ड विकास मोर्चा (झाविमो), राजद, सीपीआई-एम और अन्य दलों के नेताओं ने समर्थन की घोषणा की थी। ये भी एक कारण है कि मुख्यमंत्री जनता का ध्यान विकास कार्यों की तरफ ले जाना चाहते है। महिलाओं को स्वावलम्बी और राज्य में सड़कों का जाल बिछ जाने से 2019 की पुख्ता जमीन तो तैयार हो जाएगी।
 


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