शरद पवार के सुझाव पर अमल कर रही मोदी सरकार
| Agency - 24 May 2018

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर विपक्षी दल तानाशाही का भले ही आरोप लगाते हैं लेकिन चीनी मिलों के मामले मंे शरद पवार के सुझाव को माना गया है। केंद्र सरकार नकदी की किल्लत से जूझ रही चीनी मिलों को गन्ना बकाया भुगतान में मदद करने के लिए दूसरे चरण के प्रोत्साहन को अगले 8-10 दिन में अंतिम रूप दे सकती है। परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि इस दिशा में जिन उपायों पर विचार किया जा रहा है, उनमें चीनी के लिए बफर स्टॉक बनाना और पड़ोसी देशों चीन तथा बांग्लादेश के लिए निर्यात में तेजी लाना मुख्य रूप से शामिल हैं। गडकरी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, इस बारे में अभी स्पष्ट रूप से बताना मुश्किल होगा कि हम क्या करेंगे, लेकिन बफर स्टॉक बनाने और चीन तथा बांग्लादेश के लिए भी निर्यात के संबंध में कुछ निर्णय अगले 8-10 दिन में ले लिए जाएंगे। इस बीच खाद्य मंत्रालय ने 30 लाख टन चीनी का बफर स्टॉक बनाने और गन्ना बकाया चुकाने में मदद प्रदान करने के लिए न्यूनतम एक्स-मिल कीमत निर्धारित करने के लिए एक कैबिनेट प्रस्ताव रखा है। गन्ना बकाया बढ़कर लगभग 220 अरब रुपये पर पहुंच गया है। यह स्थिति चीनी कीमतों में भारी गिरावट और रिकॉर्ड उत्पादन की वजह से पैदा हुई है। मसौदा प्रस्ताव में राकांपा प्रमुख और पूर्व कृषि मंत्री शरद पवार द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बाजार में व्यापक चीनी आपूर्ति से निपटने में तुरंत हस्तक्षेप करने के लिए लिखे गए पत्र पर भी ध्यान दिया गया है।
सरकारी आंकड़े के अनुसार भारत का चीनी उत्पादन अधिक गन्ना पैदावार की वजह से 2017-18 के सीजन (अक्टूबर-सितंबर) में अब तक 3.16 करोड़ टन की सर्वाधिक ऊंचाई को छू चुका है जिससे गन्ना बकाया बढ़कर 220 अरब रुपये पर पहुंच गया।  एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने कहा, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और सचिवों की समिति (सीओएस) दोनों द्वारा पवार के सुझावों पर विचार-विमर्श किए जाने के बाद खाद्य मंत्रालय ने 2-3 बदलाव किए जाने के लिए कैबिनेट के लिए मसौदा प्रस्ताव तैयार किया है। अधिकारी ने कहा कि मंत्रालय ने 30 लाख टन चीनी का बफर स्टॉक बनाने, न्यूनतम एक्स-मिल कीमत 30 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किए जाने, प्रत्येक मिल के लिए कोटा तय कर मिलों पर स्टॉक सीमा लगाए जाने आदि का प्रस्ताव रखा है। मौजूदा समय में चीनी की औसत एक्स-मिल कीमत 25.60-26.22 रुपये प्रति किलोग्राम के दायरे में है जो उत्पादन लागत से कम है। पवार ने अपने पत्र में कई अन्य सुझाव भी दिए थे जिनमें एथेनॉल कीमत में वृद्धि करना, राज्यों को शीरे के कारोबार और एथेनॉल की बिक्री पर मनमाने ढंग से कर लगाने से रोकने और एथेनॉल पर जीएसटी 15 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किए जाने जैसे सुझाव मुख्य रूप से शामिल हैं। राकांपा प्रमुख ने नकदी की किल्लत से जूझ रही चीनी मिलों के लिए राहत पैकेज की भी मांग की थी।  सूत्रों का कहना है कि पेट्रोलियम मंत्रालय एथेनॉल के मुद्दे पर विचार कर रहा है जबकि वित्त मंत्रालय चीनी मिलों को वित्तीय राहत पैकेज दिए जाने के मुद्दे पर विचार कर रहा है। इस बीच गडकरी ने कहा है कि केंद्र सेकेंड जेनरेशन एथेनॉल तैयार किए जाने, एथेनॉल पर जीएसटी घटाने और थोक चीनी (जिसे बड़ी ब्रांडेड कंपनियों द्वारा खरीदा जाता हो) पर उपकर में कमी लाने पर भी विचार कर रहा है। इस महीने के शुरू में सरकार ने गन्ना किसानों के लिए 5.5 रुपये प्रति क्विंटल की उत्पादन सब्सिडी को मंजूरी प्रदान की जिससे कि चीनी मिलों के गन्ना बकाया को निपटाने में मदद मिल सके। मोदी सरकार ने और भाजपा की राज्य सरकारों ने भी गन्ना किसानों के भुगतान के बारे मंे चुनाव के समय ही वादा किया था। इसके साथ ही चीनी मिल मालिकों की समस्या को भी गंभीरता से समझा जा रहा है। श्री शरद पवार का सुझाव सामयिक था, इसलिए मोदी सरकार ने उस पर अमल किया। (हिफी)
 


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