स्वच्छ पर्यावरण का आधार है स्वच्छ मासिक-धर्म
| Agency - 30 May 2018

           
जिस देश में कामख्या देवी (रजस्वला देवी )  की पूजा होती हो, वहां मासिक धर्म स्वच्छता का  जिक्र होना कोई हैरानी की बात नहीं होनी चाहिए. दुर्भागय से हिंदुस्तान में इस विषय पर बात करना निषेध मन जाता  रहा है, लेकिन बदलते सामाजिक परिवेश एवं भूमंडलीकरण के इस दौर में अब महिलाएं इस विषय पर खुलकर बात करने लगी है. विशेषकर तब -जब बात ६० करोड़ भारतीय महिलाओं में व्यक्तिगत स्वच्छता की हो. 
एक सामाजिक उद्यमी संस्था 'व्योमिनी' ने देश भर में महिलाओं को मासिक धर्म स्वच्छता के बारे में जागृत करने का बीड़ा उठाया है.  २८ मई को नई दिल्ली में आर्य सभागार में मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया गया. इस विषय पर चर्चा करने के लिए समाज के विभिन्न वर्गों से विशेषज्ञ एकत्रित हुए . मुझे भी इस समारोह में भाग लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. इस अवसर पर नई दिल्ली क्षेत्र से संसद -सदस्या -श्रीमति   मीनाक्षी लेखी ने बहुत सुन्दर तरीके से बताया के किस तरह बाजार में मिलने वाले सेनेटरी पैड में मौजूद प्लास्टिक हमारे पर्यावरण को नुक्सान पहुंचता है. इस अवसर पर पूरी तरह जैविक पदार्थों से बना सेनेटरी पैड -रक्षक- भी लांच किया गया. इस अवसर पर व्योमिनी के समर्पित कायकर्ताओं को भी सम्मानित किया गया


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