मतदाता सूची पर कमलनाथ की फजीहत 
| Agency - 12 Jun 2018

मध्य प्रदेश में कांग्रेस संगठन के मुखिया का दायित्व संभालते ही कमलनाथ की साख खराब हो गयी है। उन्होंने और चुनाव प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बड़े जोर-शोर से फर्जी मतदाता सूची का मामला उठाया था। इन दोनों नेताओं ने 60 लाख फर्जी मतदाता होने का दावा किया और यह भी आरोप लगाया कि फर्जी मतदाताओं को भाजपा ने शामिल कराया है और यही कारण है कि भाजपा ने कोई विरोध नहीं किया। दोनों नेताओं ने दिल्ली में पत्रकार वार्ता में यह गंभीर आरोप लगाया था और चुनाव आयोग ने भी इसे संज्ञान में लेकर दो टीमंे जांच के लिए  गठित कर दी थीं। चुनाव आयोग को जांच में पता चला कि कांग्रेस ने मतदाता सूची को लेकर जो आरोप लगाए हैं, वे निराधार हैं। इतना ही नहीं इस आरोप के पीछे एक साजिश भी नजर आयी क्योंकि कांग्रेस नेताओं ने पत्रकारों के सामने जो आंकड़े पेश किये थे, वे पुरानी मतदाता सूची के थे। इस प्रकार राज्य की जनता के साथ चुनाव आयोग को भी भ्रमित करने का प्रयास किया गया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने दो दिवसीय छत्तीसगढ़ के दौरे में मध्य प्रदेश को लेकर भी इसीलिए कहा कि कांग्रेस अब ऐसे कार्य करने लगी है जिससे वह मूल समेत खत्म हो जाएगी। श्री अमित शाह ने हालांकि भाजपा के कांग्रेस मुक्त भारत का मतलब भी बताया कि राजनीति से कांग्रेस ही संस्कृति खत्म करनी पड़ेगी। विपक्ष का सम्मान करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष की तरह ही विपक्ष भी महत्वपूर्ण होता है। 
कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ ही मध्य प्रदेश के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह, सुरेश पचैरी, विवेक तनखा, दीपक बावरिया भी मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत से दिल्ली में मिले थे। इन नेताओं ने मध्य प्रदेश की मतदाता सूची में 60 लाख फर्जी मतदाता होने का आरोप लगाया। राज्य में इसी वर्ष नवम्बर मंे विधानसभा के चुनाव होने हैं इसलिए चुनाव आयोग ने इस आरोप को गंभीर माना। कांग्रेस नेताओं ने कहा था कि भोपाल की नरेला, होशंगाबाद, सिवली, मालवा व भोजपुर की मतदाता सूची में फर्जी मतदाता दर्ज किये गये हैं।  मतदाता सूची के आंकड़े भी दिये थे। इन नेताओं ने यह भी कहा कि पूरे राज्य में 60 लाख फर्जी मतदाता दर्ज हैं और भाजपा ने इसका विरोध इसलिए नहीं किया क्योंकि उसी ने ये फर्जी मतदाता जुड़वाये हैं। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पिछले 10 वर्ष में राज्य की आबादी सिर्फ 24 फीसद बढ़ी है जबकि मतदाताओं की संख्या, 40 फीसद बढ़ गयी है। इन सभी आरोपों को चुनाव आयोग ने संज्ञान मंे लिया और जांच के लिए दो टीमंे भी गठित कर दीं। चुनाव आयोग की टीमों ने पाया कि कांग्रेस नेताओं ने जो आरोप लगाये हैं, वे निराधार और भ्रामक हैं इसलिए चुनाव आयोग ने इस पर सार्वजनिक बयान जारी किया। चुनाव आयोग ने कहा कि कांग्रेस नेताओं ने फर्जी मतदाताओं की जो सूची जारी की है, वह राज्य की पुरानी मतदाता सूची के आधार पर दी गयी है। यह भी कहा गया कि एक जैसे चेहरे वाले कई मतदाताओं की श्किायत कांग्रेस नेताओं ने की है तो उस पर चुनाव आयोग पहले से काम कर रहा है। आयोग के सचिव राहुल शर्मा ने कहा कि एक ही चेहरे के कई मतदाता, कई विधानसभा क्षेत्रों मंे एक ही नाम जैसे मामले संदिग्ध हैं और हम उन पर जांच-पड़ताल भी कर रहे हैं। आयोग के पास एक जैसी एंट्री, नाम, लिंग, रिश्ता और आयु की जांच के लिए पर्याप्त तंत्र है। हालांकि कई लोगों के नाम समान हो सकते हैं, इसका मतलब यह नहीं कि वे मतदाता फर्जी हैं। चुनाव आयोग ने राज्य की आबादी और मतदाताओं की बढ़ी संख्या व अनुपात को लेकर भी जो आरोप लगाया गया, उस पर कहा कि मध्य प्रदेश की आबादी व मतदाताओं की संख्या को लेकर जो आरोप लगाए गये हैं, वे भी सही नहीं हैं। आयोग  के सचिव राहुल शर्मा ने कहा कि 2008 मंे आबादी और मतदाता संख्या का अनुपात 52 और 76 का था तो 2010 मंे यह बढ़कर 61 और 45 का हो गया। मौजूदा मतदाता सूची मंे कोई विवादित चीज नहीं मिली है। इन्हीं सब बातों की पुष्टि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सलीना सिंह ने भी की है। उन्हांेने कहा कि दो फीसद आबादी व मतदाता का अनुपात बढ़ा है। इसके पीछे मुख्य कारण सरकार, चुनाव आयोग और जनता की जागरूकता है। अब लोग अपने मताधिकार के प्रति ज्यादा सक्रिय रहते हैं और चुनाव अयोग ने भी  मतदाताओं को अपने नाम शामिल करवाने के लिए समय-समय पर शिविर लगवाए हैं। सरकार की तरफ से भी प्रचार किया जाता है कि युवा मतदान को अपना नैतिक कर्तव्य समझें। इन्हीं सबके चलते मध्य प्रदेश मंे मतदाताओं की संख्या बढ़ी है। चुनाव आयोग ने कांग्रेस नेताओं की शिकायत को जिस तरह खारिज किया है, उससे सबसे ज्यादा बदनामी कमलनाथ की हुई है।
 


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