दलालों के लिए कहर है डिजिटल इंडिया: मोदी
| Agency - 18 Jun 2018

मोदी के राजनीतिक विरोधी उन्हें जुमलेबाज कहते हैं लेकिन क्या श्री मोदी के डिजिटल इण्डिया जैसे कार्यक्रम सचमुच सिर्फ जुमलेबाजी कर रहें अथवा उनका प्रीााव धीरे-
धीरे सामने आ रहा है। पिछले दिनों एक रंगमंच के कलाकार ने कहाकि डिजिटल इंडिया से रंगमंच भी सशक्त हुआ है। लोग कह सकते हैं कि रंगमंच तो कलाकारों के सशक्त अभिनय से चलता है लेकिन कलाकारों की समस्या बिचैलियों का शोषण है। डिजिटल इंण्डिया ने इसी समस्या को खत्म करने का प्रयास किया है और वे बिचैलिये नाराज हो गये हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गत 15 जून को डिजिटल इंण्डिया कार्यक्रम के तहत लाभ पाने वाले लोगों से संवाद किया। श्री मोदी ने इसके लाभ बताये और कहा कि लोगों को डिजिटल क्षेत्र की ओर प्रेरित करने के लिए हो यह कार्यक्रम चलाया गया है। विशेष रूप से देश के ग्रामीण इलाकों और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार ने ध्यान केन्द्रित किया हैं। इन वर्गों को कमजोर करने का काम बिचैलिये और दलाल भी कर रहे थे।
डिजिटल इंण्डिया के लाभार्थियों से प्रधानमंत्री मोदी की बातचीत जिन महत्वपूर्ण मुद्दों पर हुई, उनमें प्रमुख जानकारियां शामिल हैं। मसलन श्री मोदी ने बताया कि अब तक तीन लाख कामन सर्विस सेन्टर डिजिटल इंण्डिया अभियान के तहत खोले गये है। इसके तहत करोड़ों लोगों को डिजिटल साक्षरता से जोड़ा जा रहा है। इसमें प्रत्यक्ष लाभ देखे जा सकते हैं जैसे कि बिना लाइन में लगे आनलाइन रेलवे टिकट बुकिंग करा सकते हें। गांवों में आप्टिकल फाइवर का नेटवर्क फैलाया जा रहा है। एक-दूसरे को देख कर प्रेरणा मिलती है। पहले लोग इससे डरते थें उस समय कहा जाता था कि जब बैंकों में आज भी लोग दूसरों से पैसा जमा करने और निकालने वाला फार्म भरवाते हैं तो डिजिटल इंडिया की कहानी कहां तक आगे बढ़ेगी? यह आशंका निर्मूल साबित हुई है। आज ज्यादा तर बैंकों में लम्बी रकम को छोड़कर जमा करने और निकालने के लिए मशीनें लगी हैं। एक बार समझा दीजिए तो साधारण पढ़े लिखे लोग भी रूपये जमा करने और निकालने में कोई परेशानी महसूस नहीं करते हैं। 
डिजिटल इंडिया के आलोचकों को जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते हैं कि दलाली को रोकने का अभियान ‘डिजिटल इंडिया’ है जिससे परेशान होकर दलाल और बिचैलिये तरह-तरह की अफवाह फैलाने में लगे हैं लेकिन गांव, गरीब, किसान के सशक्तीकरण एवं लोगों के हक की लड़ाई के माध्यम डिजिटल इंडिया को और मजबूत बनाने को सरकार प्रतिबद्ध है। यह अभियान दलाली बनाम डिजिटल इंडिया का है और लोगों को अपने हक की लड़ाई के इस डिजिटल माध्यम का पूरा उपयोग करना चाहिए। डिजिटल इंडिया के लाभार्थियों के साथ डिजिटल माध्यम से चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि जब डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की शुरूआत की गई थी तब कुछ लोगों ने इसकी कितनी आलोचना की थी। कहा था कि जिस देश में गांवों में ऐसी सुविधा नहीं है, लोग तकिये के नीचे पैसा रखते हैं, बिचैलिये बीच में पैसा खाते हैं, वहां यह कैसे चलेगा। लेकिन आज घर में काम करने वाली महिला मीनू, 10वीं एवं 12वीं में पढ़ने वाली लड़कियों, सपेरा समुदाय से आने वाली बालिका ने इस माध्यम का उपयोग करके आलोचकों को जवाब दे दिया है। श्री मोदी ने कहा, ‘लेकिन आज जब गांव, गरीब, किसान इस माध्यम का उपयोग कर रहा है तब कुछ लोग नयी-नयी अफवाह फैला रहे हैं। कह रहे हैं कि इसमें सुरक्षा नहीं है। इस साजिश के पीछे वे लोग है जिनकी दुकानें बंद हो गई हैं। बिचैलियों के कमीशन बंद हो गए हैं। ऐसे में वे लोग नयी-नयी अफवाहें फैला रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि ऐसे लोग इस तरह की अफवाहें इसलिये फैला रहे हैं क्योंकि इसके कारण कालाबाजारी बंद हो रही है और रूपये की सुरक्षा बढ़ी है। अब बिचैलिये तो ऐसा करेंगे ही क्योंकि उनकी दुकानें बंद हो गई हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोई कितनी भी गाली क्यों न दें लेकिन हमें देश को आगे ले जाना है और यह दिख रहा है कि देश बदल रहा है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई दलाली बनाम डिजिटल इंडिया की है। दलाल आज डिजिटल इंडिया से परेशान हैं। डिजिटल इंडिया का गांव, गरीब, किसान, युवा भरपूर लाभ उठा रहे हैं जो गांव के सशक्तीकरण और साक्षरता का बड़ा माध्यम बनकर उभरा है। मोदी ने कहा कि इस पहल के तहत प्रधानमंत्री ग्राम डिजिटल साक्षरता अभियान की भी शुरूआत की गई थी। इसके तहत 20 घंटे के बुनियादी कम्प्यूटर कोर्स की जानकारी देने का प्रावधान किया गया है। अब तक सवा करोड़ लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है जिसमें 70 प्रतिशत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति समुदाय से हैं। इस समुदाय के लोगों को ही डिजिटल होने की ज्यादा जरूरत है क्योंकि बिचैलिये और दलाल इसी वर्ग के लोगों का शोषण कर रहे थे।
प्रधानमंत्री श्री मोदी की इन बातों में काफी दम है। साधारण लेनदेन ही नहीं रंगमंच तक पर डिजिटल मीडिया का प्रभाव पड़ा है। यह भी डिजिटल इंडिया का ही एक अंग है। नाटककार, अभिनेता और निर्देशक महेश दलानी का कहना है कि डिजिटल मीडिया के उभरने से रंगमंच को मदद मिली है। उन्होंने कहा कि अब होर्डिंग और प्रेस विज्ञप्तियों के दिन लद गये हैं। कोई भी अब स्माट फोन क लिए ट्रेलर बना सकता हैं, जिसके वायरल होने की संभावना रहती है। यह लोगों को थिएटर तक खींचने में मदद करता है। महेश दलानी कहते हैं कि आज के समय में किसी के नाटक का सोशल मीडिया के जरिए प्रचार संभव है। उन्होंने बताया कि उनमें एक मंचन डबल डील रिलोडेड की आलोचकों ने काफी तारीफ की थी और सोशल मीडिया के जरिए यह तारीफ काफी लोगों तक पहुंची। महेश दलानी फाइनल साल्यूशन्स, डांसलाडफए मैन, आनएमगी नाइट इन मुंबई और तारा जेसे नाटकों के मंचन से काफी तारीफ बटोर चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रम से एक दिन पहले केन्द्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने भी डिजिटल इंडिया के बारे में कई मुद्दों पर बातचीत की थी उन्होंने अपनी बात ट्विटर के माध्यम से कही थी और डिजिटल प्रोद्योगिकी के बारे में बताया था। श्री रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि अमीर या गरीब, शहरी या ग्रामीण और युवा व बूढ़े सभी वर्ग के लोगों को डिजिटल प्रौद्योगिकी से फायदा पहुंचा है। अब बुजुर्गों को बिजली बिल जमा करने के लिए लाइन में लगने के लिए नहीं भेजा जाता है बल्कि बिजली बिल का आनलाइन पेमेन्ट हो जाता हैं। इससे बुजुर्गों को कितनी राहत मिली है, यह तो वही बता सकते हैं। प्रधानमंत्री ग्राम डिजिटल साक्षरता अभियान ने गांव के सभी लोगों को डिजिटल भले ही नहीं बनाया है लेकिन जो लोग आन लाइन कार्य कर रहे हैं, उन्हें देखकर दूसरों को ऐसा ही करने का मन होता है। अब आपके मोबाइल में ही बैंक मौजूद रहता है और गांव-गली के छोटे दुकानदार भी पेटीएम से भुगतान प्राप्त कर लेते है। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशभर के उज्ज्वला योजना लाभार्थियों से भी बातचीत की थी उज्ज्वला योजना का प्रचार-प्रसार हुआ और कई लोगों ने इसका लाभ उठाया है। इसी प्रकार प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से भी कितने ही बेरोजगार युवा और युवतियों ने रोजगार शुरू किया। इससे सिर्फ उन्हीं की बेरोजगारी नहीं दूर हुई बल्कि कई अन्य लोगों को लाभ मिला और डिजिटलीकरण ने बिचैलियों और दलालों को पैसा ऐंठने का मौका ही नहीं दिया। 


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