कमाऊ व्यवस्था साबित हुई जीएसटी
| Agency - 02 Jul 2018

वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली की ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल थी और विपक्षी दलों के विरोध के बावजूद इस कानून को बहुत ही शानदार तरीके से विशेष बैठक आधी रात में बुलाकर पहली जुलाई 2017 को लागू किया गया था। शुरू-शुरू में कुछ परेशानियां भी हुईं लेकिन बाद में लोगों ने इसे स्वीकार किया और देश के लिए यह कमाऊ योजना साबित हुई है। साल भर में 95 हजार करोड़ से ज्यादा की सरकार को कमाई हुई है। इसकी जानकारी वित्त सचिव हसमुख अधिया ने जीएसटी की पहली वर्षगांठ पर दी थी।माल एवं सेवाकर (जीएसटी) के तहत लोगों को कुछ परेशानियां जरूर हुईं लेकिन जून में राजस्व प्राप्ति इससे पिछले महीने के मुकाबले करीब 1,600 रुपये बढ़कर 95,610 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। इससे पिछले माह मई में जीएसटी राजस्व संग्रहण 94,016 करोड़ रुपये रहा था। उन्होंने कहा कि इससे पहले अप्रैल 2018 में जीएसटी राजस्व प्राप्ति एक लाख करोड़ रुपये की सीमा को पार करते हुये 1.03 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी। 
अधिया ने जीएसटी प्रणाली लागू होने के एक साल के अवसर पर आयोजित ‘जीएसटी दिवस’’ समारोह में कहा, ‘‘अभी नियमित रूप से हर महीने एक लाख करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्ति के मुकाम पर हम नहीं पहुंचे हैं। लेकिन हमें उम्मीद हैं कि यह एक लाख करोड़ रुपये प्रति माह के स्तर तक पहुंच जायेगा।’’ अधिया ने इस अवसर पर कहा कि पिछले वित्त वर्ष में हर महीने जीएसटी औसत संग्रहण 89,885 करोड़ रुपये रहा। उन्होंने कहा कि यदि कारोबार में नकली बिलों का काम बंद हो जाये तो जीएसटी संग्रह और बेहतर होगा।  वित्त सचिव ने  जीएसटी को वास्तविकता में बदलने के लिये काम करने वाले वित्त मंत्रालय और राज्यों के वित्त विभाग के अधिकारियों की सराहना की। उन्होंने कहा, ‘‘जीएसटी को अमल में लाने के लिये अधिकारियों ने दिन - रात काम करके कमाल कर दिया। जीएसटी परिषद की 27 बैठकें हुई तो उसके पीछे अधिकारियों की कठिन मेहनत भी रही।’’ उन्होंने जीएसटी लागू करने में राज्यों , कारोबारियों , वाणिज्य एवं उद्योग मंडलों के प्रयासों की भी सराहना की। केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने अब दावे के साथ कहते हैं कि देश माल एवं सेवाकर (जीएसटी) जैसी महत्वपूर्ण अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था का क्रियान्वयन सबसे कम बाधाकारी तरीके से करने में सक्षम रहा है। समाज के लिये योगदान के रूप में इस नयी व्यवस्था का सबसे अच्छा रूप अभी सामने आना बाकी है।
 उल्लेखनीय है कि जीएसटी व्यवस्था को पिछले साल पहली जुलाई को लागू किया गया था। इसमें 17 प्रत्यक्ष करों और कई उपकरों को समाहित किया गया है। जेटली ने कहा कि जीएसटी लागू करने वाले अधिकतर देशों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। उन्हें स्वयं लगा था कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने कई संकट खड़े कर देगा। उन्होंने कहा, ‘‘ मैं खुद जब जीएसटी जैसे सुधार की बात करता था तो ‘अशांतिकारक’ जैसे शब्द का उपयोग करता था क्योंकि इसे लागू होने में समय लगता है लेकिन अब एक साल बीत जाने के बाद मैं इस बात को लेकर आशवस्त नहीं हूं कि क्या मैं जीएसटी के लिए इस शब्द का उपयोग कर सकता हूं या नहीं। ’’  जेटली दो महीने बाद सार्वजनिक तौर पर दिखाई दिए हैं। वह अपने गुर्दे का इलाज कराने के बाद से आराम कर रहे हैं। जीएसटी के एक साल पूरे होने पर वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से उन्होंने यह संवाद किया। जेटली ने कहा, ‘‘जिस आसान तरीके से यह बदलाव आया है , पूरी दुनिया में कहीं भी यह अभूतपूर्व है। मैं आश्वस्त हूं कि हमने पहले साल में जो प्रभावी लाभ देखें हैं वह लघु अवधि और मध्यम अवधि का श्रेष्ठ हैं, समाज को होने वाले योगदान के रूप में इसका सर्वश्रेष्ठ आना अभी बाकी है।’’  उन्होंने कहा कि दीर्घावधि में जीएसटी का देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि, कारोबार सुगमता, व्यापार एवं उद्योग के विस्तार पर, मेक इन इंडिया पहल पर प्रभाव होगा। साथ ही यह ईमानदार कारोबारी गतिविधियों को बढ़ाएगा। जेटली ने कहा, ‘‘जैसे - जैसे कर का संग्रहण बढ़ेगा, कर दरों को व्यवहारिक बनाने की क्षमता बढ़ेगी।’’ उन्होंने कहा कि इनपुट टैक्स क्रेडिट व्यवस्था अपने आप में इतनी प्रभावी है कि ज्यादा से ज्यादा लोग अपनी सूचनाओं को सार्वजनिक कर सकें। ई - वे बिल को भी लागू किया जा चुका है। एक बार बिलों का मैच होना शुरू हो जाए तो कर की चोरी भी रुकेगी और इसे पकड़ना आसान भी हो जाएगा।जीएसटी की दरों की आलोचना करने वालों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी  ने करारा जवाब दिया। श्री नरेन्द्र मोदी ने माल एवं सेवाकर (जीएसटी) व्यवस्था के तहत सभी वस्तुओं पर एक ही दर से कर लगाने की अवधारणा को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि मर्सिडीज कार और दूध पर एक ही दर से कर नहीं लगाया जा सकता। उन्होंने कहा कि जीएसटी के तहत सभी वस्तुओं पर 18 प्रतिशत की एक समान दर से कर लगाने की कांग्रेस पार्टी की मांग को यदि स्वीकार किया जाता है तो इससे खाद्यान्न और कई जरूरी वस्तुओं पर कर बढ़ जायेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि जीएसटी लागू होने के एक साल के भीतर ही अप्रत्यक्ष करदाताओं का आधार 70 प्रतिशत तक बढ़ गया। इसके लागू होने से चेक - पोस्ट समाप्त हो गये , इसमें 17 विभिन्न करों , 23 उपकरों को समाहित कर एक बनाया गया है। मोदी ने कहा कि जीएसटी समय के साथ बेहतर होने वाली प्रणाली है। इसे राज्य सरकारों , व्यापार जगत के लोगों और संबंध पक्षों से मिली जानकारी और अनुभवों के आधार इसमें लगातार सुधार किया गया है। जीएसटी में केन्द्रीय उत्पाद शुल्क , सेवाकर , राज्यों में लगने वाले मूल्यवर्धित कर (वैट) तथा अन्य करों को समाहित किया गया है। इसका उद्देश्य इंस्पेक्टर राज को समाप्त करते हुये अप्रत्यक्ष करों को ‘‘ सरल ’’ बनाना है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘यह काफी आसान होता कि जीएसटी में केवल एक ही दर रहती लेकिन इसका यह भी मतलब होगा कि खाद्य वस्तुओं पर कर की दर शून्य नहीं होगी। क्या हम दूध और मर्सिडीज पर एक ही दर से कर लगा सकते हैं ?’’  उन्होंने कहा , ‘‘ इसलिये कांग्रेस के हमारे मित्र जब यह कहते हैं कि हमारे पास जीएसटी की केवल एक दर होनी चाहिये , उनके कहने का मतलब है कि वह खाद्य पदार्थों और दूसरी उपभोक्ता जिंसों पर 18 प्रतिशत की दर से कर लगाना चाहते हैं। जबकि वर्तमान में इन उत्पादों पर शून्य अथवा पांच प्रतिशत की दर से कर लगाया जा रहा है। ’’ स्वराज पत्रिका की वेबसाइट पर जारी साक्षात्कार में मोदी ने कहा कि आजादी के बाद से जहां 66 लाख अप्रत्यक्ष करदाता ही पंजीकृत थे वहीं एक जुलाई 2017 को जीएसटी लागू होने के बाद इन करदाताओं की संख्या में 48 लाख नये उद्यमियों का पंजीकरण हुआ है। 
 


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