गरीबों के लिए उम्मीद
| Agency - 04 Jul 2018

लोग कहते हैं कि पैसा तो शरीर का मैल है अर्थात धन का कोई महत्व नहीं लेकिन अर्थ की प्रधानता को झुंठलाया नहीं जा सकता है। संस्कृत का एक श्लोक है जिसका भी भाव यही है कि जिसके पास धन है, वही कुलीन है, ज्ञानी है और सम्माननीय है। इसलिए धनोपार्जन के प्रयास हमेशा से होते रहे हैं, फिर भी गरीबी बनी रही। हमारे देश में आजादी के बाद गरीबी दूर करने के बहुत प्रयास हुए हैं, राजनेताओं नेे वादे किये और गरीबी हटाओ का नारा दिया गया फिर भी भारत में गरीबों की संख्या चिंताजनक स्थिति में रही है। मौजूदा नरेन्द्र मोदी सरकार ने भी देश से गरीबी मिटाने की बात कही है और इसके लिए कई योजनाएं भी बनायी गयी हैं। अब इसे सुखद  संयोग कहें या भारत सरकार के प्रयासों का नतीजा बताएं कि भारत में गरीबों के अच्छे दिन आ रहे हैं अर्थात देश में गरीबों की संख्या लगातार कम हो रही है। दुनिया के गरीब देशों में भारत का नाम शामिल नहीं है और शीघ्र ही दुनिया के अमीर देशों में भारत का नाम शामिल हो जाएगा।
यह बात हम किसी राजनेता के बयान के आधार पर नहीं कह रहे हैं बल्कि प्रख्यात अमेरिकी संगठन बु्रकिंग्स इस्टीट्यूशन के फ्यूचर डेवलपमेंट ब्लाॅग में एक अध्ययन को प्रकाशित किया गया है। इस अध्ययन के मुताबिक हर मिनट में 44 भारतीय भीषण गरीबी के दायरे से बाहर आ जाते हैं। यही गति जारी रही तो सन् 2030 तक भारत पूरी तरह से भीषण गरीबी से मुक्त हो जाएगा अर्थात इसकी गिनती अमीर देशों में होने लगेगी। बु्रकिंग्स इंस्टीट्यूशन की स्टडी के मुताबिक मई 2018 में ही भारत सबसे ज्यादा गरीबों वाले देशों की सूची से बाहर हो गया है। यह निश्चित रूप से हमारे लिए गर्व की बात है। अध्ययन के अनुसार अब इस स्थान पर नाइजीरिया आ गया है। भारत में गरीबी तेजी से कम हो रही है। तरक्की की यही गति बनी रही तो 2018 में ही भारत गरीबों की सर्वाधिक संख्या के मामले में तीसरे स्थान पर पहुंच जाएगा और दूसरा स्थान अफ्रीकी देश कांगो को मिल जाएगा। भारत में 2022 तक सिर्फ तीन फीसद से भी कम गरीब रह जाएंगे और 2030 तक  भारत भीषण गरीबी से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा। अध्ययन में बताया गया है कि मई 2018 तक हमारे अनुमानों के मुताबिक नाइजीरिया में 8.7 करोड़ लोग भीषण गरीबी के दायरे में थे इसकी तुलना में भारत में 7.3 करोड़ लोग ही भीषण गरीबी की परिभाषा के तहत आते हैं। बताया गया है कि नाइजीरिया में प्रत्येक छह मिनट में एक व्यक्ति भीषण गरीबी के दायरे में आ जाता है जबकि भारत में गरीबी में गिरावट आ रही है।
यह बात अलग है कि गरीबी के मामले में इस संस्था का आंकड़ा भारत सरकार और कई अन्य अन्तरराष्ट्रीय संस्थाओं से सामंजस्य नहीं रखता। इनका मापदण्ड अलग है। गरीबी को मापने का पैमाना सभी का अलग-अलग है। विश्व बैंक के अनुसार सन् 2004 से 2011 के बीच भारत में गरीबों का अनुपात जनसंख्या के 39 फीसद से घटकर 21.2 फीसद पर आ गया। कई जानकारों का यह मानना है कि भारत में 1991 में कांग्रेस सरकार के दौरान जो आर्थिक सुधार लागू किये गये थे इनसे गरीबी घटाने में मदद मिली है और सरकारें बदलने के साथ ही आर्थिक सुधार के कार्यक्रम जारी रहे। इसलिए यह उम्मीद की जा रही है कि भारत में 2030 तक गरीबी पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। अमेरिकी संस्था की स्टडी के अनुसार सबसे ज्यादा गरीबी अफ्रीका में बढ़ रही है। इस साल अर्थात 2018 के अंत तक 32 लाख अन्य लोग भी गरीबी की चपेट में आ जाएंगे जबकि भारत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अमेरिका संस्था के अध्ययन से भी आगे चल रहे हैं। संस्था के अध्ययन में 2030 तक भारत को गरीबों से मुक्त करने की उम्मीद जतायी गयी है जबकि प्रधानमंत्री श्री मोदी कहते हैं कि 2022 में हमारा देश जब अपनी आजादी की हीरक जयंती (75वीं वर्षगांठ) मना रहा होगा तब तक हमारे देश के किसानों की आमदनी दो गुनी हो चुकी होगी और कोई भी गरीब नहीं रहेगा। इस प्रकार आठ साल पहले ही भारत यह लक्ष्य प्राप्त कर सकता है। इसके लिए हमें सिर्फ उम्मीद ही नहीं करनी चाहिए बल्कि उद्यम (प्रयास) भी करना होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी राजनीतिज्ञ है और राजनीति भी करते हैं तो उनका लक्ष्य पहले 2019 के लोकसभा चुनाव हैं। सरकार ने योजनाएं लागू की हैं और केन्द्र सरकार की इन योजनाओं से लगभग 10 करोड़ लोग लाभान्वित हो रहे हैं अर्थात केन्द्र की योजनाओं से इतने लोग जुड़े हैं। श्री मोदी ने नमो ऐप जारी किया है और इस ऐप को डाउनलोड करने वालों की संख्या लगभग एक करोड़ है।
 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अब तक उज्ज्वला योजना, मुद्रा योजना, स्टार्ट अप, गरीबों और किसानों के लिए शुरू की गयी विभिन्न योजनाओं को लेकर संबंधित लाभार्थियों को सीधे संबोधित करने का कार्यक्रम बनाया। यह कार्यक्रम राजनीतिक दृष्टि से ही नहीं सफल हुआ है बल्कि 10 करोड़ लोग लाभान्वित होकर इससे कहीं ज्यादा लोगों को प्रेरणा भी दे रहे हैं और लाभार्थियों की संख्या बढ़ती चली गयी तो कितने ही गरीबों को भी मदद मिलेगी। उनको रोजगार के साथ ही आर्थिक स्थिति सुधारने का अवसर मिलेगा। इस प्रकार गरीबों की संख्या कम होगी।
हमारे देश में आज भी कृषि का सबसे ज्यादा महत्व है। सत्तर फीसद से ज्यादा देश गांवों में बसा है। गांवों की हालत में काफी बदलाव आया है। खेती की पद्धति बदली है। अनाज, दालों और तिलहनों का उत्पादन प्रतिवर्ष बढ़ता ही जा रहा है। अभी गत दिनों गेहूं समेत रबी की फसलों के उत्पादन का आंकड़ा दिया गया तो पता चला कि अन्नोत्पादन गत फसली वर्ष की अपेक्षा काफी बढ़ा है। सरकार ने रिकार्ड स्तर पर खरीद की है और अनाज का भण्डार भरा है। इसी तरह चीनी का रिकार्ड उत्पादन हुआ है। कृषि के साथ अन्य वस्तुओं का भी उत्पादन लगातार बढ़ रहा है और इससे गरीबों का जीवन स्तर भी सुधर रहा है। 
 


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