सुप्रीम कोर्ट का फैसला- फांसी पर लटकेंगे सभी
| Agency - 09 Jul 2018

सुप्रीम कोर्ट ने साल 2012 के दिल्ली सामूहिक दुष्कर्म मामले में फांसी की सजा के खिलाफ दोषियों की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रहेगी। मामले में मृत्युदंड की सजा पा चुके चार दोषियों में से तीन ने सुप्रीम कोर्ट में सजा के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी। दोषी अक्षय ठाकुर ने पुनर्विचार याचिका दायर नहीं की थी। सुप्रीम कोर्ट ने चार मई को इस मामले में दोषियों की पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2017 के फैसले में दिल्ली हाईकोर्ट और निचली अदालत द्वारा 23 वर्षीय पैरामेडिक छात्रा से 16 दिसंबर 2012 को गैंगरेप और मर्डर के मामले में उन्हें सुनाई गई मौत की सजा को बरकरार रखा था। आरोपियों में से एक राम सिंह ने तिहाड़ जेल में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। वहीं आरोपियों में एक किशोर भी शामिल था। उसे किशोर न्याय बोर्ड ने दोषी ठहराया था। उसे तीन साल सुधार गृह में रखे जाने के बाद रिहा कर दिया गया। मामले की सुनवाई के दौरान दोषियों की तरफ से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने कहा कि यह केस फांसी की सजा का नहीं है। दोषियों को फांसी की सजा से राहत दे देनी चाहिए। सभी दोषी गरीब परिवार से वास्ता रखते हैं। तीनों आदतन अपराधी नहीं हैं। दोषियों को सुधरने के लिए एक मौका देना चाहिए। कोर्ट ने दोषियों के पक्षकार की एक भी दलील पर सहमति नहीं जताई। सभी दलीलों को खारिज करते हुए दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखी गई।


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