इमरान का नया पाकिस्तान
| Agency - 10 Jul 2018

पाकिस्तान को इतने झमेलों में फंसा दिया गया है कि वहां लोकतंत्र की मजबूती सपना बनती जा रही है। इसके बावजूद कोई नेता आश्वासन देता है तो उम्मीदें नयी तरह से जाग उठती हैं। क्रिकेट की दुनिया से राजनीति में आये इमरान खान ने नया पाकिस्तान बनाने का वादा किया है। देखना है कि वह किस तरह से पाकिस्तान में एक सुखद माहौल तैयार करेंगे जिसमंे आतंकवाद और भारत के प्रति वैमनस्यता को कोई स्थान नहीं मिलना चाहिए। पाकिस्तान में इस माह की 25 तारीख को आम चुनाव होने जा रहे हैं। प्रत्येक राजनीतिक पार्टी अपने एजेंडे से नागरिक को लुभाने की कोशिश कर रही है। क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान भी इसी दौड़ में शामिल हैं। इमरान खान ने ‘रोड टू नया पाकिस्तान’ नामक अपनी पार्टी का चुनावी घोषणापत्र जारी किया। इस घोषणापत्र में उन्होंने पाकिस्तान को इस्लामिक कल्याणकारी राज्य बनाने का वादा किया। इमरान के इस घोषणापत्र में भारत का भी जिक्र भी है। उनको भी भली-भांति पता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच के संबंध वहां की जनता के लिए भी बहुत महत्व रखते हैं, इसलिए उन्होंने अपने घोषणापत्र में पड़ोसी देश भारत के साथ इस क्षेत्र में शांति सुनिश्चित करने के लिए नीतियां बनाने की बात कही है। घोषणापत्र में इमरान ने कश्मीर मुद्दे को यूएनएससी के प्रस्तावों के तहत सुलझाने की भी बात कही है। उन्होंने कहा कि अगर 25 जुलाई के आम चुनाव में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) को बहुमत मिलता है तो उनकी योजना 100 दिन के भीतर देश के सामने मौजूद गंभीर आर्थिक और प्रशासनिक संकट दूर करने की होगी। पार्टी के घोषणापत्र में कहा गया है कि हमारे क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए खास तौर पर भारत के साथ संघर्ष खत्म करने के लिए सुरक्षा और सहयोग की नीति बनाना अहम है। गौरतलब है कि इमरान अकेले पांच जगह से चुनाव लड़ रहे है। कई दिग्गज नेताओं के इस चुनाव से नदारद रहने या अयोग्य ठहरा दिए जाने के कारण फिलहाल इमरान की पार्टी की स्थिति काफी मजबूत नजर आ रही है। वहीं आतंकी हाफिज सईद आतंक के दम पर अपने 200 से ज्यादा उम्मीदवारों को मैदान में खड़ा कर पाकिस्तान की गद्दी पर विराजमान होने के सपने भी देख रहा है। धार्मिक पार्टियों ने नेशनल असेंबली के आम चुनावों में 460 से अधिक प्रत्याशी उतारे हैं जो अभी तक की सर्वाधिक संख्या है। इन धार्मिक पार्टियों में आतंकी हाफिज सईद के प्रतिबंधित संगठन जमात-उद-दावा की राजनीतिक शाखा भी शामिल है। पाकिस्तानी चुनाव आयोग ने प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी कर दी है। इस सूची के मुताबिक, नेशनल असेंबली की 272 सीटों के लिए चुनाव होगा और इसके लिए 3,459 प्रत्याशी मैदान में हैं।
उल्लेखनीय है कि 1970 में जुल्फिकार अली भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) और पूर्वी एवं पश्चिमी पाकिस्तान में शेख मुजीबुर रहमान की अवामी लीग के प्रत्याशियों के खिलाफ जमात-ए-इस्लामी ने सबसे अधिक प्रत्याशी मैदान में उतारे थे। इसके बाद 2002 में मुत्ताहिदा मजलिस-ए-अमाल (एमएमए) ने भी पूरे देश में प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन इस बार यह आंकड़ा सबसे अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार एमएमए, तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान, हाफिज सईद के जमात-उद-दावा की राजनीतिक शाखा मिल्ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) समर्थित अल्लाह-ओ-अकबर तहरीक पार्टी और अन्य छोटे दलों ने 460 से अधिक प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। ये उम्मीदवार कई सीटों पर पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन), पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के प्रत्याशियों का खेल बिगाड़ सकते हैं। एमएमए- यह जमियत उलेमा-इस्लाम-एफ, जमात-ए-इस्लामी, जमियत उलेमा-ए-पाकिस्तान, इस्लामी तहरीक और मरका जी जमियत अहले हदिथ का गठबंधन है। ये पार्टियां बरेलवी, देवबन्दी, शिया और अहले हदिथ विचाराधारा का प्रतिनिधित्व करती हैं। इस गठबंधन ने नेशनल असेंबली के लिए 192 सीटों पर प्रत्याशी खड़े किए हैं। तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान तहरीक-ए-लब्बैक या रसूल अल्लाह की राजनीतिक शाखा है। इसने 178 लोगों को चुनाव मैदान में उतारा है। इसका प्रमुख तेजतर्रार मौलवी खादिम हुसैन रिजवी है। इस पार्टी ने पंजाब व खैबर पख्तूनख्वा में उपचुनावों में आश्चर्यजनक नतीजे दिए। मिल्ली मुस्लिम लीग-आतंकी हाफिज सईद की इस राजनीतिक शाखा ने मुख्य रूप से पंजाब पर ध्यान दिया है। इसे चुनाव आयोग से राजनीतिक पार्टी का पंजीयन नहीं मिला है, इसलिए इसके प्रत्याशी अल्लाह-ओ-अकबर तहरीक की ओर से चुनाव मैदान में हैं। इस प्रकार देश को शांति और सौहार्द देने का आश्वासन देने वाले कम हैं मजहब के नाम पर वोट लेने वाले ही ज्यादा दिखाई पड़ रहे हैं। 


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