निवेशकों का हित सर्वोपरि: जेटली
| Agency - 18 Jul 2018

भारत में बिटकॉइन और रिपल जैसी क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाने का सबसे बड़ा कारण निवेशकों के हितों का बचाव करना है। भारतीय रिजर्व बैंक ने इंटरनेट ऐंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएमएआई) को भेजे 2 पृष्ठों के जवाब में यह बात कही है। आरबीआई का यह जवाब सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका की सुनवाई के बाद आया, जिसमें आरबीआई द्वारा बैंकों को क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों से लेनदेन बंद करने के आदेश को चुनौती दी गई थी। इस आदेश के कारण देश में क्रिप्टोकरेंसी कारोबार पर नकारात्मक असर पड़ा है।
नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार काला धन और काले व्यापार पर अंकुश लगाने का निरंतर प्रयास कर रही है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी इस मामले में कठोर कदम उठाने का ही समर्थन किया। प्रधानमंत्री मोदी ने काले धन को बाहर लाने के लिए नोटबंदी जैसा सख्त कदम उठाया था तो श्री जेटली ने जीएसटी को लागू करवाया। इसके साथ ही बोगस कंपनियों पर निगाह रखी जा रही है। इसी बीच विश्व बाजार में विट काइन और टिपल जैसी क्रिप्टो करेन्सी पर प्रतिबंध लगाया है हालांकि यह मामला अभी अदालत में विचाराधीन है लेकिन सरकार यह बात दृढ़ता के साथ कह रही है कि वह निवेशकों को फंसने का कोई अवसर उपलबध नहीं कराएगी।
भारत में बिटकॉइन और रिपल जैसी क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाने का सबसे बड़ा कारण निवेशकों के हितों का बचाव करना है। भारतीय रिजर्व बैंक ने इंटरनेट ऐंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएमएआई) को भेजे 2 पृष्ठों के जवाब में यह बात कही है। आरबीआई का यह जवाब सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका की सुनवाई के बाद आया, जिसमें आरबीआई द्वारा बैंकों को क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों से लेनदेन बंद करने के आदेश को चुनौती दी गई थी। इस आदेश के कारण देश में क्रिप्टोकरेंसी कारोबार पर नकारात्मक असर पड़ा है। 
सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले खंडपीठ ने अपने आदेश में आरबीआई को एक सप्ताह के भीतर जवाब देने के लिए कहा था लेकिन न्यायालय ने बैंकों को क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों से लेनदेन बंद करने के आदेश पर रोक नहीं लगाई थी। मामले से जुड़े सूत्रों ने बताया कि आरबीआई का जवाब उसके पहले के निर्देशों के समान ही है। एक स्रोत ने बताया, श्बैंक ने निवेशकों के हितों को ध्यान में रखकर यह कदम उठाया है और उसका कहना है कि क्रिप्टोकरेंसी की बारीकियों को जाने बिना निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। सूत्र ने यह भी बताया कि आरबीआई ने वैश्विक स्तर पर लोगों के साथ धोखाधड़ी और क्रिप्टोकरेंसी आधारित घोटालों का भी जिक्र किया है। आरबीआई लगातार यह दोहरा रहा है कि क्रिप्टोकरेंसी की अपनी कोई कीमत नहीं है और इनके द्वारा अवैध कारोबार की काफी अधिक संभावनाएं हैं। बैंक ने यह भी कहा कि इनकी कीमतों में उतार-चढ़ाव का अनुमान लगाना संभव नहीं है और इन क्रिप्टोकरेंसी का बहुत कम हिस्सा ही दैनिक कारोबार में शामिल है। 
बैंक का यह भी कहना है कि क्रिप्टोकरेंसी को सहेजने के लिए बनाए गए इलेक्ट्रॉनिक वॉलेट के साथ भी सुरक्षा संबंधी चुनौतियां मौजूद हैं। इसमें हैंकिंग, पासवर्ड चोरी और मालवेयर हमले आदि शामिल हैं। हालांकि केंद्रीय बैंक इन खतरों के बारे में पहले भी आगाह करता रहा है। फरवरी 2017 में बैंक ने कहा था, भारतीय रिजर्व बैंक बिटकॉइन समेत किसी भी आभासी मुद्रा में कारोबार कर रहे लोगों को इससे जुड़े वित्तीय, कानूनी, ग्राहकों के हित और सुरक्षा संबंधी खतरों से सावधान करता है। बैंक ने दिसंबर 2017 और अप्रैल 2018 में भी यही बात दोहराई और अंततरू सभी बैंकों और अन्य संस्थाओं को सभी क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों से कारोबार बंद करने का आदेश जारी कर दिया। हालांकि बैंक ने इस जवाब के साथ अपना पक्ष एकदम स्पष्ट कर दिया है लेकिन उद्योग के भीतर चल रही लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। सर्वोच्च न्यायालय 20 जुलाई को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा और उद्योग से जुड़े लोगों को इससे राहत मिलने की उम्मीद है। नाम ना छापने की शर्त पर एक क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज के मुख्य कार्याधिकारी ने कहा, यह एक लंबी लड़ाई है और कुछ समय में कानून बदलने वाले नहीं हैं। इसमें समय लगेगा और हम लंबे समय तक इस दौड़ में रहेंगे।  उन्होंने आगे कहा, आरबीआई ने अपना जवाब दे दिया है लेकिन खुदरा कारोबारी समेत बहुत से लोग इससे प्रभावित होंगे। अब खुदरा कारोबारी बिना किसी नियामक के कारोबार कर रहे हैं और इस पर प्रतिबंध लगाने से बेहतर होगा कि इसका नियमन किया जाए। अभी सर्वोच्च न्यायालय को भारत में क्रिप्टोकरेंसी के भविष्य का निर्धारण करना बाकी है, लेकिन प्रतिबंध के बाद भी ट्रेडिंग वॉल्यूम में स्थिरता बताता है कि कारोबारियों में उम्मीद बाकी है। इस बीच, क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों ने आभासी मुद्राओं में परस्पर कारोबार की सुविधा देकर रुपये पर निर्भरता को कम करने की कोशिश की है। लगभग सभी बड़े एक्सचेंजों पर ये सुविधा उपलब्ध है। कुछ एक्सचेंज एक कदम आगे जाकर पीयर-टू-पीयर कारोबारी प्लेटफॉर्म की सुविधा भी उपलब्ध करा रहे हैं। वजीरएक्स एक्सचेंज के संस्थापक निश्चल शेट्टी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि प्रतिबंध के कारण शुरुआत में कीमतें गिरी थीं लेकिन बाजार इससे जल्दी उबर गया और पीयर-टू-पीयर कारोबार जैसे प्लेटफॉर्म यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि निवेशक बाजार में बने रहें। शेट्टी ने कहा, वजीरएक्स पर कीमतें स्थिर हैं। आखिरी बार कीमतों में गिरावट आरबीआई द्वारा प्रतिबंध लगाने के समय दिखाई दी थी। उस समय के बाद काफी कुछ हुआ है, विशेष रूप से वजीरएक्स-पी2पी जैसे विकल्पों ने निवेशकों का उत्साह बनाए रखा है। 
 


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