स्वच्छता के प्रति जागरूकता का अभियान
| Agency - 14 Aug 2018

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को हमारे देश ही नहीं दक्षिण अफ्रीका समेत अन्य देशों में भी बहुत सम्मान मिला। भारत में महात्मा गांधी जी के जीवन से प्रेरणा लेने वाले तो तमाम लोग सामने आते रहे हैं लेकिन श्री नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद राष्ट्रपिता से ऐसी प्रेरणा ली जो एक बड़ा अभियान बन गयी है और श्री मोदी की राष्ट्रपिता को निश्चित रूप से यह सबसे अनूठी श्रद्धांजलि होगी। प्रधानमंत्री बनते ही श्री मोदी ने 2 अक्टूबर 2019 को नयी दिल्ली में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को नमन करते हुए स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया था और लक्ष्य बनाया कि महात्मा गांधी की 150वीं जयंती अर्थात 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत के रूप में अनूठी श्रद्धांजलि पेश की जाएगी। देश भर में इस अभियान को लोगों ने खुशी-खुशी अपनाया है और श्री मोदी के अभियान स्वच्छ भारत-स्वस्थ भारत को सफल बनाने में सभी वर्ग के लोग सहयोग कर रहे हैं। छात्र-छात्राओं की भी इस अभियान को सफल बनाने और इसकी निरन्तरता को बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका है। स्वच्छता का संबंध सीधे-सीधे स्वास्थ्य से है। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के रहते ही हम अपने कर्तव्य का पालन ठीक तरह से कर सकते हैं।
स्वच्छ भारत अभियान का उद्देश्य लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता पैदा करना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस दिन इस अभियान को शुरू किया था तब एक प्रेरणादायक घटना बतायी थी। श्री मोदी ने कहा कि मैंने एक बार बचपन में मां से कहा मां कचरे वाला आया है। मां ने जवाब दिया कि बेटे कचरे वाले तो हम हैं, वह तो सफाई वाला है। श्री मोदी ने कहा था कि सोच बदलो तो देश बदलेगा। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का स्वच्छ भारत का सपना अभी अधूरा है। सभी देश वासियों को मिलकर यह सपना पूरा करना होगा। स्वच्छ भारत अभियान सिर्फ एक-दो दिन का नहीं जीवन भर का है। अभी तो हमने बापू को उनकी 150वीं जयंती पर यह भेंट देने का निश्चय किया है कि 2 अक्टूबर 2019 तक देश भर में स्वच्छता बनाये रखने की प्रक्रिया मजबूत हो चुकी होगी। स्वच्छता दिखेगी और कूड़े-कचरे का भी हम सदुपयोग कर रहे होंगे।
इस प्रक्रिया को पूर्ण करने में छात्र-छात्राओं की भी बड़ी भूमिका है और इस पर हमें ध्यान भी देना होगा। हम अक्सर यह कहते हैं और लोगों को कहते हुए सुनते भी हैं कि जहां स्वच्छता होती है वहीं देवताओं का वास होता है लेकिन जब व्यावहारिकता की बात होती है अर्थात हम आचरण कर रहे होते हैं तो स्वच्छता की बात भूल जाते हैं। सड़क पर जा रहे हैं तो मंूगफली के छिलके फेंकते रहेंगे, केला खाकर भी हम छिलके को इधर-उधर फेंक देते हैं। कभी-कभी इन छिलकों को खाने के लिए छुट्टा जानवर दौड़ते हैं और दुर्घटना  भी हो सकती है। सड़क के किनारे खड़ी कार में ड्राइवर या कोई अन्य भी पान-मसाला खाकर इस तरह से थूकता रहता है कि वहां देवता की जगह सचमुच में घिनौना दैत्य खड़ा हो जाता है। दफ्तरों में बैठकर और स्कूल-कालेज में भी हम कागज फाड़कर इधर-उधर फेंकते रहते हैं डस्टबिन तक कूड़े को पहुंचाने की जरूरत नहीं समझते। खाने-पीने की वस्तुएं जिस थैले में हम ले जाते हैं उसे भी लापरवाही से इधर-उधर फंेक देते हैं। धार्मिक नगरियों और पर्यटक स्थलों पर इसीलिए पालिथीन की थैलियों पर प्रतिबंध है लेकिन बाहर से आने वाले इन थैलियों को लापरवाही से इधर-उधर फेंकते हैं। पर्यटन स्थलों पर विदेश से भी लोग घूमने आते हैं और हमारी गंदगी में रहने की आदत का उन पर गंदा असर पड़ता है। स्वच्छ भारत मिशन अब स्वच्छता के तरीके अपनाने की आदत डालने में काफी हद तक सफल हो चुका है और थोड़ी बहुत जो कमी दिखाई पड़ती है वह 2 अक्टूबर 2019 तक पूरी हो जाएगी।
स्वच्छ भारत मिशन को सफल बनाने के लिए हम सभी को अपने-अपने दायित्व तय करने होंगे। यह तो तय है कि आगामी 2 अक्टूबर 2019 तक हम स्वच्छ भारत की छवि प्रस्तुत करके रहेंगे और घरों से लेकर दफ्तरों तक इसके प्रति जागरूकता भी पैदा हुई है। गांवों में भी घर के अंदर ही शौचालयों का निर्माण किया गया है। शहरों में सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था की गयी है और सड़क के किनारे, बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन और पार्कों में जगह-जगह डस्टबिन (कूड़ेदान) रखे रहते हैं, उनका उपयोग करना सिखाना पड़ेगा। छात्र-छात्राएं इस कार्य को बेहतर ढंग से कर सकेंगे। शहरों में कभी-कभी ट्रैफिक संभालते बच्चे दिखाई पड़ते हैं। दोपहिया वाहनों को चलाने वालों के लिए हेलमेट लगाना अनिवार्य है। इसी प्रकार सेफ्टी के लिए कार चलाते समय बेल्ट बांधनी चाहिए। कई लोग इन नियमों का पालन नहीं करते हैं और ट्रैफिक संभालने वाले बच्चे जब उन्हें यह बात समझाते हैं तो कई लोगों को ट्रैफिक नियमों का पालन करते हुए मैंने देखा है। इसी तरह स्वच्छता के प्रति जो लोग लापरवाही बरतते हैं उनको छात्र-छात्राएं जब समझाएंगे कि कूड़ा को इधर-उधर न डालो, सार्वजनिक स्थलांे पर डस्टबिन का प्रयोग करें तो लोगों की समझ में यह बात जल्दी आ जाएगी।
स्वच्छता को हमें दैनिक क्रिया-कलापों में उसी तरह शामिल करना होगा जिस तरह से हम नाश्ता करते हैं, लंच लेते हैं, और डिनर करते हैं। सफाई पर हम उसी तरह ध्यान दें जैसे कि होमवर्क करना हमारे लिये जरूरी होता है। पाठ्यक्रम की परीक्षा तो साले में एक बार होती है लेकिन स्वच्छता की परीक्षा हमें प्रतिदिन देनी पड़ती है। स्वच्छता अभियान के बारे में सर्वे भी कराया गया है। इसके नतीजे काफी उत्साहवर्धक हैं। अभी हाल में 2018 के सर्वे के नतीजे आये तो 4302 शहरों और नगरपालिका क्षेत्रों ने स्वच्छ भारत अभियान में हिस्सा लिया है जबकि पिछले साल अर्थात 2017 में 432 शहरों में ही स्वच्छता अभियान चला था। इससे भी पूर्व अर्थात 2016 में सिर्फ 73 शहरों ने ही इस अभियान मंे भाग लिया था। इस प्रकार हम देखते हैं कि भारत स्वच्छता मिशन धीरे-धीरे सम्पूर्ण देश को अच्छादित करने के लिए तीव्र गति से प्रयास कर रहा है। छात्र-छात्राओं को निश्चित रूप से इसके तहत महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है और वे अपने घर-पड़ोस से लेकर दोस्तों के माध्यम से दूर-दूर तक इस संदेश को प्रभावशाली ढंग से पहुंचा सकते हैं। हां इतना जरूर ध्यान रहे कि अपने पाठ्यक्रम की तैयारी भी परिश्रम के साथ करें ताकि परीक्षा में अच्छे अंक मिलें और माता-पिता के साथ आपके सभी जानने वाले, शुभचिंतक आपको शुभकानमाएं दें। आप दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन सकते हैं। 
 


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