मै ऐसा क्यों हूँ , मै ऐसा ही क्यों हूँ ?? जानिये संस्कृति का व्यक्तितिव पर प्रभाव
| Manoj Chaudhary - 28 Sep 2017

अगर हम कहे शादी तो हमारे दिमाग में एक तस्वीर उभर कर सामने आती है , जिसमे फेरे होते है पंडित मन्त्र पढ़ते है , आदि आदि यानी एक शब्द ने हमें एक संस्कृति के दर्शन करा दिए इसी तरह हम कहे निकाह तो हमें इस्लामिक संस्कृति के दर्शन हो जाएंगे .. संस्कृति न सिर्फ हमारे रहने पहनने खाने पिने के ढंग को निर्धारित करती है बल्कि हमारे व्यक्तितिव का भी निर्माण करती है संस्कृति में एक बात बहुत उपयोगी और महत्वपूर्ण है वह यह है की इसमें भूगोलिक स्थान का बहुत महत्व है जो संस्क्रती को अलग रूप दे देता है जैसे उत्तर भारत के ब्राह्मण जहा मांस नहीं खाते वाही पूर्व यानी ओड़िसा , बंगाल और दक्षिण भारत के ब्राह्मण मांस मछली खाते है इसलिए हम कह सकते है खान पान केवल भूगोलिक परिष्ठिथियो पर निर्भर करता है . 
 


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