इमरान सरकार के नापाक इरादे
| Agency - 21 Aug 2018

पड़ोसी देश पाकिस्तान से नयी सरकार को लेकर उम्मीद जरूर पैदा हुई थी लेकिन दो दिन में ही धूमिल पड़ गयी। इतना ही नहीं पाकिस्तान के नवनियुक्त विदेश मंत्री ने झूठ बोलकर भारत को नीचा दिखाने का जिस तरह प्रयास किया, उससे तो ऐसा लग रहा है कि इमरान खान की सरकार बहुत ही कुटिलता वाली विदेश नीति अपनाने वाली है। शाह महमूद कुरैशी ने भारत की तरफ से बातचीत की पेशकश का निराधार बयान अपनी मर्जी से दिया है, तब तो यह इमरान खान के लिए ही चिंता का कारण है। आगे चलकर वे कोई ऐसा बयान भी दे सकते हैं जिससे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प उनके साथ भी वैसा ही व्यवहार कर सकते हैं, जैसे इराक के सद्दाम हुसैन के साथ किया था। दूसरी तरफ यदि प्रधानमंत्री इमरान खान के इशारे पर इस तरह का बयान दिया गया है तो भारत के प्रति इमरान के नापाक और मिथ्याचरण के इरादे साफ-साफ जाहिर हो रहे हैं।
इमरान खान को पाक नेशनल एसेम्बली में सरकार बनाने के लिए बहुमत नहीं मिला है। उनके पास सिर्फ 119 नेशनल एसेम्बली सदस्य हैं लेकिन विपक्षी दल पीएमएल (एन) के पास 56 सदस्य और पीपीपी के पास 34 सदस्य हैं। दोनों मिलकर भी सरकार नहीं बना सकते थे। भारत के लिए राहत की बात यही थी कि आतंकवादी हाफिज सईद की पार्टी एएटी को वहां की जनता ने पूरी तरह से ठुकरा दिया और उसे एक भी सदस्य नहीं मिल सका। इसके बाद प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव हुआ था। विपक्षी दलों ने शाहबाज शरीफ को अपना प्रत्याशी बनाया था और इमरान की पार्टी पीटीआई के उम्मीदवार इमरान खान ही थे। गत 17 अगस्त को चुनाव के लिए विशेष सत्र बुलाया गया था लेकिन पीपीपी ने मतदान से बहिष्कार किया। इस प्रकार इमरान खान को 176 मत और शाहबाज शरीफ को 96 मत ही मिल सके। इसका मतलब विपक्षी दलों में अन्य 58 सदस्य हैं, उनमें से कई लोगों ने इमरान को समर्थन दिया और ये लोग कट्टरपंथी संगठनों के हैं।
इमरान खान इनके दबाव में हैं और प्रधानमंत्री निर्वाचित होने के बाद उन्होंने जो बातें कही हैं, उनपर यकीन करना मुश्किल हो रहा है। इमरान ने कहा कि उनका पहला कदम भ्रष्ट नीतियों पर सख्त ऐक्शन लेना होगा। इसके साथ ही उन्होंने ढेरसारी आदर्शवादी बातें भी कही थीं। उन्होंने कहा कि देश से पैसा लूटकर विदेश ले गये लोगों का पैसा वापस लाया जाएगा। इस वादे से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि वे बनाना चाहते थे। श्री मोदी ने भी 2014 में इसी प्रकार का वादा किया था। इमरान खान ने कहा है कि देश का प्रधानमंत्री हर महीने कम से कम दो बार संसद में जरूर आएगा और सदस्यों के जवाब देगा। उन्होंने पूर्ववर्ती नवाज शरीफ की सरकार को देश पर कर्ज लादने के लिए जिम्मेदार ठहराया और कहा कि जिनकी वजह से देश पर कर्ज आया है उनकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। पाक के प्रधानमंत्री के रूप में इमरान ने जनता से वादा किया है कि भ्रष्ट लोगों के बच निकलने की कोई राह नहीं छोड़ी जाएगी। हम ऐसी सरकार बनाएंगे जो देश के लोगों की कमाई से देश चलाएगी और हाथ फैलाने के लिए विदेश नहीं जाना पड़ेगा। इमरान खान की यह चेतावनी अमेरिका की तरफ है क्योंकि पाकिस्तान की नयी सरकार बनते ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को चेतावनी दी थी कि पाकिस्स्तान को कर्ज के रूप में अमेरिकी डालर न दिया जाए। पाकिस्तान को कर्ज उतारने के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है। श्री ट्रम्प ने कहा था कि पाक को कर्ज लेना है तो उसे चाइना की मुद्रा में कर्ज दे दे लेकिन अमेरिकी डालर नहीं दें।
पाक के प्रधानमांत्री इमरान खान अपनी लोकप्रियता का ढिंढोरा पीटने में भी काफी आगे बढ़ गये हैं। वह कहते हैं कि मैं किसी सैन्य तानाशाह या सेना के कंधे पर चढ़कर यहां तक नहीं आया हूं। मैं 22 साल के संघर्ष के बाद यहां तक पहुंचा हूं। वह कहते हैं कि केवल एक ही नेता ने मुझसे ज्यादा संघर्ष किया है और वे हैं मेरे हीरो मोहम्मद जिन्ना। चुनाव के बारे में भी इमरान कहते हैं कि हमने कोई गड़बड़ी नहीं की है, इसलिए मैं सभी को चुनाव आयोग और सुप्रीमकोर्ट में जाने की सलाह देता हूं। बहरहाल, यह उनके अपने देश का अंदरूनी मामला है लेकिन उन्होंने जो अपने मंत्री मंडलीय सहयोगी बनाए हैं, उनके बारे में सोच कर चिंता जरूर होती है। शाह महमूद कुरैशी को विदेश मंत्री बनाया गया है जबकि परवेज खटक को रक्षामंत्री और असद उमर को वित्तमंत्री बनाया गया है। इमरान खान ने गत 18 अगस्त को ही 21 सदस्यीय मंत्रिमंडल की घोषणा कर दी थी, जिसमें ज्यादातर ऐसे लोग है जो पूर्व सैन्य तानाशाह जनरल (रिटायर) परेवज मुशर्रफ के शासन काल में प्रमुख पदों पर रहे थे। इमरान खान के बारे में भी यह कहा जाता है कि उन्हें सेना का समर्थन मिला है और उसकी पुष्टि भी इस बात से हुई कि मुशर्रफ शासनकाल में प्रमुख लोगों को इमरान ने मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया। इसलिए इमरान खान जब यह कहते हैं कि वह सेना के कंधे पर बैठकर यहां तक नहीं आये तो चोर की दाढ़ी में तिनके की कहावत याद आ जाती है। पाक का पीएम ही झूठ बोलता है तो उसके वजीर सत्यवादी कैसे हो सकते हैं। 
बहरहाल, भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चिट्ठी पर पाक के विदेशमंत्री ने जिस तरह से झूठा प्रचार कर वाहवाही लूटनी चाही उसकी निंदा हो रही है। श्री मोदी ने इमरान के प्रधान मंत्री बनने पर बधाई पत्र लिखा था। श्री मोदी ने इमरान को और उनके नेतृत्व में बनी नयी सरकार को बधाई के साथ ही दोनों देशों के बीच अच्छे रिश्तों के लिए सार्थक और रचनात्मक संपर्क रखने की प्रतिबद्धता जतायी थी लेकिन बात चीत की कोई पेशकश नहीं की थी। श्री मोदी ने अपने पत्र में उम्मीद जतायी थी कि पाक में नई सरकार के सुचारू रूप से कार्यभार संभालने से लोगों का लोकतंत्र पर भरोसा मजबूत होगा। श्री मोदी ने इमरान के साथ टेलीफोन पर हुई बातचीत का उल्लेख करते हुए उपमहाद्वीप में शांति, सुरक्षा एवं समृद्धि के दृष्टिकोण को साझा किया था। इसी को आधार बनाकर पाक के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत शुरू करने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को चिट्ठी लिखी है। इस तरह के झूठ पाकिस्तान के लिए ही भारी पड़ सकते हैं।
 


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