अपना हिन्दुस्तान कहाँ है ?
| Manoj Chaudhary - 10 Mar 2018

आईपैक्स भवन वेलफेयर सोसायटी द्वारा आयोजित मासिक काव्य गोश्ठी की 87 वीं प्रस्तुती सुप्रसिद्ध कवि व उपन्यासकार स्व. श्री फणीष्वर नाथ रेणु को समर्पित की गई। सर्वप्रथम कविवर दृश्टि बाधित सरस्वती पुत्र डा. दयाल सिंह पवांर  व श्रृंगार के गीतकार श्री मनोज कुमार ‘मनोज‘ व सस्ंथा के पदाधिकारीयों ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर गोश्ठी का षुभआरम्भ किया।
पुश्प गुच्छ भेंट कर श्री सुषील गोयल, श्री महेन्द्र गर्ग व डा. अंजलि गुप्ता ने कवियों का अभिनन्दन किया।
सर्वप्रथम अपनी ओजभरी वाणी से डा. दयाल सिंह पंवार ने ब्रेल लिपि में लिखी अपनी काव्य रचनाओं का आरम्भ करने से पूर्व संस्कृत में मां सरस्वती की आरधना की।
उन्होंने अपनी ओजभरी वाणी से देष भक्ति व मां भारती की काव्यमयीअराधना की। 

उन्होनें स्वदेषी की ओर ध्यान केन्द्रित करते हुऐ पढ़ा-
‘भुमण्डलीयकरण के युग में अब अपनी पहचान कहां हैघ्
आओ खोजें सकल विष्व में अपना हिन्दुस्तान कहां हैघ्
उन्होने गृहस्थ जीवन की सफलता का रहस्य इस प्रकार प्रस्तुत किया -
‘यह तो सच है हम दोनों का अलग-अलग जीवन दर्षन है
फिर भी साथ-साथ रहना है यद्यपि अलग-अलग चिन्तन है।‘
मेरठ से पधारे गीतकार श्री मनोज कुमार “मनोज“ ने होली की मस्ती को और बढ़ाया
‘बिना बरसे कोई बादल कभी बादल नहीं होता
न जिसमें प्यार का कोई निषान आंचल नहीं होता
साजन की आंखों में सजकर कभी देखा नहीं जिसने,
के केवल रंग काला है, कभी काजल नहीं होता।‘
आपने अपने दोहों और मुक्तकों से श्रोताओं की भरपूर तालियां बटोरी-
‘इस भोले इंसान की मुष्किल में है जान
टूट गया जब तीर तो रोता रहा कमान।‘
इस अवसर पर संस्कृत में रचित ‘हिमान्द्वी‘ पुस्तक रचनाकार “श्विषन लाल गौड“ व्यामकेष एवं अंग्रेजी अनुवादक श्रसत्यदेव राय का प्रधान सुरेष बिन्दल द्वारा विमोचन किया गया। उन्होने अपनी पुस्तक संस्था के महामंत्री प्रमोद अग्रवाल को भेंट की। इस मौके पर श्व्योमषेखर व  सत्य देव राम ने अपनी पुस्तक के सम्बन्ध में प्रकाष डाला। 
होली की मस्ती वरिश्ठ नागरिकों पर अभी भी खुमारी पर थी अतः  ए. के. षर्मा ने “साली महिमा“ का गायन कर सभा को गुदगुदाया।
इस अवसर पर आर सी जैन, मदन खत्री, सुशमा सिंह, पी. पी. जैन, विजय बहल, षील चन्द जैन, योगेन्द्र बंसल, एम.सी गर्ग, अंजलि गुप्ता व आषु गुप्ता आदि गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम से पूर्व सभी श्रोताओं ने सामूहिक जलपान में भाग लिया।
 


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