दुष्कर्मी को 19 दिन में मृत्युदण्ड
| Agency - 04 Sep 2018

राजस्थान सरकार ने हाल ही में पूरे प्रदेश में पोक्सो अदालतें खोली है जिसके क्रम में झुंझुनूं में भी नई पोक्सो कोर्ट खुली है। इस कोर्ट ने अपना पहला ही निर्णय न केवल राजस्थान में सबसे तेज और ऐतिहासिक दिया है बल्कि तीन साल की मासूम के परिवार को समय पर ही न्याय देकर एक मिसाल भी कायम कर दी है। जानकारी के मुताबिक दो अगस्त को झुंझुनूं के अलसीसर थाना इलाके के डाबड़ी धीरसिंह में तीन साल की मासूम अपने ननिहाल आई हुई थी। घर पर उसकी बूढी नानी थी जो पड़ौस में ही अपने देवर के घर पर छाछ लाने गई थी। आरोपी दौसा के लालसोट थाना इलाके के अलीपुर निवासी विनोद बर्तन बेचने का काम करता है जो बर्तन बेचने के लिए पीडिता के नानी के घर आया लेकिन तीन साल की मासूम को अकेला देखकर उसने उसके साथ दुष्कर्म किया और भाग गया। इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के 24 घंटे के अंदर आरोपी को गिरफ्तार किया और 10 दिन में ही चार्जशीट तैयार कर कोर्ट में पेश कर दी। पोक्सो कोर्ट ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया और महज 19वें दिन आरोपी को मृत्युदंड की सजा सुनाई। पोक्सो कोर्ट की न्यायाधीश निरजा दाधीच ने इसे जघन्य अपराध मानते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है। वहीं इस दौरान 19 गवाहों के बयान भी पंजीबद्ध करवाए गए। विशिष्ट लोक अभियोजक लोकेंद्रसिंह खुडानिया ने बताया कि इस तरह का यह पहला फैसला है जो चालान होने के 19वें दिन हो गया हो। आपको बता दें कि दो साल पहले 2016 में भी 12 अगस्त को सीतसर की छह साल की मासूम के साथ दुष्कर्म और इसके बाद उसकी हत्या के मामले में करीब 10 माह में कोर्ट ने मृत्युदंड का फैसला दिया था। पोक्सो के मामलों में अब तक यह राज्य का पहला सबसे तेज फैसला है। साथ ही अब तक इस समेत पांच मामलों में छह जनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई जा चुकी है। फैसले के बाद पीडिता के पिता ने भी इसे सही फैसला बताया है। रूआंसे गले और सूखे होंठों से पिता ने कहा कि परिवार को इसी फैसले की उम्मीद थी, ताकि समाज के वहशियों के मन में डर हो और वे कानून से भी डरे। कोर्ट ने अपने आदेश में आरोपी को भादंस की धारा 450 में दोषी माना। जिसमे आरोपी को 10 वर्ष का कठोर कारावास और पांच हजार रुपए जुर्माने की सजा दी गई। अदम अदायगी अर्थदंड के एक वर्ष का कठोर कारावास पृथक से भुगतने के आदेश भी दिए गए। इसी तरह पोक्सो में दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास और पांच हजार रुपए के अर्थ दंड से दंडित किया गया। इस धारा में भी अदम अदायगी अर्थदंड अभियुक्त को एक वर्ष का कठोर कारवास अलग से भुगतने के आदेश दिए गए है। वहीं भादंस की धारा 376ए बी में दोषी पाए जाने पर पर मृत्युदंड की सजा दी गई है। झालावाड़ में छह साल की बच्ची से दुष्कर्म और फिर उसकी हत्या की गई थी जिसमें करीब छह महीने बाद आरोपी को मृत्युदंड दिया गया। वहीं  अलवर में सात माह की बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना हुई थी। जिसमें करीब साढ़े तीन महीने बाद आरोपी को मृत्युदंड मिला।  बाड़मेर में 12 साल की मासूम से दुष्कर्म करने के बाद हत्या की गई थी। इसमें करीब साढ़े पांच साल बाद दो आरोपियों को मृत्युदंड दिया गया। इसी तरह  झुंझुनूं में छह साल की मासूम से दुष्कर्म करने के बाद हत्या की गई थी। जिसमें करीब 10 माह बाद आरोपी को मृत्युदंड दिया गया।
मामले के अनुसार 2 अगस्त 2018 को पुलिस थाना मलसीसर पर तीन वर्षीय पीडिता की नानी ने अपने देवर व पीडिता के साथ एक रिपोर्ट दी कि वह डाबड़ी धीर सिंह की रहने वाली है तथा उसकी पुत्री व तीन वर्षीय दोहती पीडिता उसके गांव में करीब एक माह से आई हुई थी। पीडिता की माता एक अगस्त को अपने परिजन से मिलने चिड़ावा गई हुई थी। घर पर वह तथा उसकी पीडित दोहिती थी। घटना के रोज वह छाछ लेने के लिए अपने देवर के घर गई हुई थी व पीछे से उसकी दोहिती पीडिता घर पर अकेली थी तथा जब वह छाछ लेकर वापस घर पहुंची तो देखा कि उसकी दोहिती रो रही थी तथा उसके गुप्तांग से खून आ रहा था तथा एक मोटरसाईकिल वाला जो बर्तन बेचने के लिए फेरी लगा रहा था, को अपने घर से बाहर निकलते हुए देखा जो मोटरसाईकिल पर निकल गया। इस रिपोर्ट पर पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर 3 अगस्त को ही आरोपी विनोद को धर दबोचा व संबंधित न्यायालय में 13 अगस्त को 376 ए, बी, आदि में चालान पेश कर दिया। राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक लोकेंद्रसिंह शेखावत खुडानिया ने कुल 19 गवाहान के बयान करवाए व 19 दस्तावेज प्रदर्शित करवाए गए। विशेष लोक अभियोजक शेखावत ने न्यायालय में दलील दी कि यह मामला दुर्लभतम प्रकरणों की श्रेणी में आता है इसलिए आरोपी को मृत्यु दंड दिया जाए। न्यायाधीश ने पत्रावली पर आई साक्ष्य का बारिकी से विश्लेषण करते हुए आरोपी विनोद कुमार को उक्त अनुसार दंड देते हुए अपने निर्णय में लिखा कि आज समाज की स्थिति बलात्कार के मामले में इतनी बद्तर हो चुकी है कि इस सृष्टि का अर्द्ध भाग कहे जाने वाली व सृष्टि को जन्म देने वाली नारी ना तो मां के गर्भ में सुरक्षित है वहां भी उस पर भ्रूण हत्या का खतरा मंडराता रहता है और गर्भ से बाहर आने के बाद भी वह सुरक्षित नहीं है। क्योंकि समाज में अभियुक्त विनोद जैसे हैवानों की कोई कमी नहीं है, जो पीडिघ्ता फूल जैसी बच्ची को इस प्रकार मसला गया जैसे कोई मनोरंजन की वस्तु हो। न्यायालय ने इस प्रकरण को दुर्लभतम प्रकरण मानते हुए विनोद को मृत्यु दण्ड की सजा दी है। विशेष न्यायाधीश श्रीमती नीरजा दाधीच द्वारा शुक्रवार को आरोपी विनोदकुमार को तीन वर्षीय मासूम से किए गए दुष्कर्म के मामले में दिए गए मृत्यु दंड का निर्णय केवल 12 दिनो में ही ट्राईल पूर्ण कर दे दिया गया। इस मामले में 13 अगस्त को पुलिस थाना मलसीसर द्वारा विशेष न्यायालय में चालान पेश किया गया था तथा 15, 19, 22, 25 व 26  अगस्त का अवकाश होने तथा 20 व 21 अगस्त को पीठासीन अधिकारी अवकाश पर रहने के कारण मात्र 12 दिन में ही विशेष न्यायाधीश ने पूरी ट्राईल समाप्त कर मृत्यु दंड का निर्णय सुनाया।
 


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