शिक्षक भी समझें अपने दायित्व
| Agency - 08 Sep 2018

अभी बीते 5 सितम्बर को देश भर में शिक्षक दिवस मनाया गया। यह दिन भारत के दूसरे राष्ट्रपति डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन है और उन्हांेने अपना सार्वजनिक जीवन शिक्षक के रूप में शुरू किया था। शिक्षकों का सम्मान किसी एक दिन ही नहीं बल्कि हमेशा के लिए होना चाहिए। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस पर दो महत्वपूर्ण बातें कही थीं। पहली यह कि शिक्षक जिस स्कूल में पढ़ाते हैं, वहीं पर अपने बच्चों को भी शिक्षा दें। दूसरी बात यह कि शिक्षकों को 8वें वेतनमान का आश्वासन देते हुए कहा कि हम उन पर कुछ दायित्व भी डालना चाहते हैं। उन्होंने कहा था कि शिक्षक जितना सुयोग्य होता है, उतनी ही सार्थक शिक्षा भी होती है यह बात व्यावहारिक और सैद्धान्तिक दोनों रूप में सच है। शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए सरकार नियम भी बना रही है। एनसीईआरटी ने लर्निंग आउटकम तैयार कर उसे लगभग 40 लाख शिक्षकों तक पहुंचाया और उन्हें प्रशिक्षित किया ताकि वे अपनी-अपनी भाषा में लर्निंग आउटकम सुनिश्चित कर पाएं। इसके तहत छात्र, विद्यालय और अभिभावक की भी जिम्मेदारी सुनिश्चित होगी। जब 25 राज्यों ने पहली से आठवीं तक परीक्षा की मांग की और प्रथम प्रयास में अनुत्तीर्ण होने वाले छात्र को दोबारा अवसर देने का नियम बनाया तो नो डिटेंशन नीति में परिवर्तन किया गया। यह बिल लोकसभा में सर्वसम्मति से पास हुआ और अभी राज्यसभा में अनुमोदन के लिए लंबित है। हमारी सरकार का मानना है कि शिक्षक जितना सुयोग्य होता है, शिक्षा उतनी ही सार्थक होती है। हम जब सरकार में आए तब देश में 15 लाख शिक्षक ऐसे थे जो 5वीं कक्षा तक के छात्रों को पढ़ा रहे थे परंतु वे केवल 12वीं पास थे और उन्होंने डिप्लोमा या प्रशिक्षण नहीं किया हुआ था। करीब 8-10 वर्षों से यह समस्या चल रही थी। इसे देखते हुए प्रधानमंत्री की पहल पर कैबिनेट में यह प्रस्ताव लाया गया कि ऐसे शिक्षकों को दो साल का एक्सटेंशन देंगे और इस अवधि में इन सभी शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। विद्यालयों में सर्व शिक्षा अभियान पहले से जारी था। यह 25 साल चला। अब समग्र शिक्षा कार्यक्रम शुरू हुआ है। प्री-स्कूल से 12वीं तक पूरी शिक्षा पर एक समग्रता से विचार हो सके, इसलिए इसका नाम समग्र शिक्षा रखा गया। इसमें तीन बड़ी पहल की गई हैैं।पहली, सभी 15 लाख सरकारी स्कूलों में लाइब्रेरी होगी और हर एक लाइब्रेरी को 5 से 20 हजार रुपये का अनुदान हर साल मिलेगा। दूसरी, ‘खेले इंडिया खिले इंडिया’ के तहत हर स्कूल को हर साल 5 से 20 हजार तक का अनुदान खेल-कूद सामग्री के लिए दिया जाएगा। दरअसल एक बार प्रधानमंत्री ने दिल्ली के एक कार्यक्रम में छात्रों से यह पूछा था कि यहां कितने छात्र हैैं जिन्हें दिन में तीन बार पसीना आता है तो वहां जमा छात्रों में से एक ने भी हाथ ऊपर नहीं किया। तब उन्होंने कहा था कि खेलकूद भी अध्ययन का एक महत्वपूर्ण भाग होता है। खेल-कूद को बढ़ावा देने का कार्यक्रम प्रधानमंत्री की इसी सोच का परिणाम है। तीसरी पहल हर गरीब छात्र को अच्छी शिक्षा देने की है। गरीबी केकारण किसी को शिक्षा से वंचित नहीं होना पड़े, इसके लिए खासकर उच्च शिक्षा में जहां फीस का भार होता है वहां शिक्षा के लिए कर्ज के ब्याज का भुगतान सरकार करती है। संप्रग सरकार के जमाने में यह राशि 800 करोड़ रुपये सालाना होती थी। पिछले तीन वर्षों में इसे बढ़ाकर 1800 करोड़ रुपये सालाना कर दिया गया है। करीब आठ लाख विद्यार्थियों को इससे फायदा हो रहा है। आने वाले तीन साल में इस मद में हर साल 2200 करोड़ रुपये व्यय करने का लक्ष्य है। इसके लिए 6600 करोड़ रुपये अलग से व्यवस्था की गई। इसका फायदा 10 लाख ऐसे गरीब छात्रों को मिलेगा। इन्हें शिक्षा ऋण का ब्याज नहीं देना पड़ेगा। इस ब्याज का वहन सरकार करेगी। इस पहल का एक उद्देश्य समाज में समानता लाना भी है।
सरकार की एक बड़ी पहल स्वायत्तता को लेकर भी है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट को संसद में बिल लाकर शैक्षिक स्वतंत्रता दी गयी। इसके पीछे विचार है कि सरकार के प्रतिनिधियों द्वारा संस्थान के क्रियाकलापों में दखलंदाजी के बजाय उसी संस्थान के पूर्व छात्रों को इसका दायित्व दिया जाए। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट की स्वायत्तता की कल्पना को सबने स्वीकार किया। इसी क्रम में ग्रेडेड स्वायत्तता की अवधारणा को मूर्त रूप दिया गया। इसके तहत अब लगभग 70 विश्वविद्यालय, जिन्होंने गुणवत्ता के साथ विकास किया है उन्हें इस आधार पर विस्तार और व्यवस्था के लिए बार-बार अनुमति के लिए सरकार के पास नहीं आना पड़ेगा। दो और पहल भी बहुत महत्वपूर्ण हैैं। चूंकि टेक्नोलॉजी के उपयोग पर प्रधानमंत्री का हमेशा बल रहता है इसलिए बजट में ऑपरेशन डिजिटल बोर्ड की घोषणा की गई। इसके तहत नौवीं से पोस्ट ग्रेजुएट तक देश भर की 15 लाख कक्षाओं में आने वाले चार वर्षों में डिजिटल बोर्ड लगेंगे। इससे शिक्षा रुचिकर और सार्थक होगी। इससे कक्षाओं में चर्चाएं अधिक गहन भी होंगी। यह एक ऐसा प्रयास है जिससे छात्रों को विषय समझने में अधिक आसानी होगी। सरकार द्वारा स्वयम प्लेटफार्म पर जो ऑनलाइन कोर्स शुरू किया गया था उसका 23 लाख से अधिक छात्र लाभ ले रहे हैं। इस पर एक हजार से अधिक पाठ्यक्रम शुरू हो गए हैं। सभी जानते हैैं कि देश आगे तभी बढ़ेगा जब वह नित नए शोध और अनुसंधान करेगा। चूंकि नवरचना के बिना कोई राष्ट्र आगे नहीं बढ़ सकता इसलिए सरकार ने छह आइआइटी में रिसर्च पार्क की स्थापना की। इसका उद्देश्य स्टार्टअप कल्चर को कैम्पस में न केवल अनुमति, बल्कि प्रोत्साहित देना है। इसके लिए इनक्यूबेशन केंद्रों की शुरुआत की गई है। इसी तरह उच्चतर आविष्कार योजना के तहत शिक्षक और छात्र साथ-साथ काम कर रहे हैं। देश के जो मेधावी छात्र विदेश जाकर शोध करते हैं वे यहीं देश में रुकें, इसके लिए प्राइम मिनिस्टर रिसर्च फेलोशिप शुरू की गई है। इस वर्ष इसके तहत 135 छात्रों का चयन किया गया है। इन सभी को प्रतिमाह एक लाख रुपये की सहायता मिलेगी। 


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