अखिलेश को एम.पी. में झटका
| Agency - 09 Oct 2018

कांग्रेस को बड़ा दिल दिखाने की नसीहत देने वाले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव खुद अपना दिल बड़ा नहीं कर पाये और मध्यप्रदेश में कांग्रेस को समर्थन देने की जगह अपने प्रत्याशी उतारने लगे। सपाप्रमुख का यह रवैया संभवतः उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को भी अच्छा ही लगा है। मध्यप्रदेश में समाजवादी पार्टी ने जिस उम्मीदवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान के खिलाफ खड़ा किया था, उसने सपा के टिकट पर चुनाव लड़ने से मना कर दिया है। समाजवादी पार्टी ने गत 6 अक्टूबर को मध्यप्रदेश के लिए अपने प्रत्याशी घोषित किये थे। इसी सूची में बुधनी विधान सभा क्षेत्र भी शामिल था। बुधनी से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान चुनाव लड़ते हैं। इस सीट को प्रदेश की सबसे ज्यादा हाई प्रोफाइल सीट माना जाता है। क्योंकि यहीं से शिवराज सिंह चैहान विधायक हैं। इसी के साथ सपा और कांग्रेस की दोस्ती भी टूटी है।कांग्रेस के साथ मध्यप्रदेश में गठबंधन नकार चुकी समाजवादी पार्टी ने अर्जुन आर्य को बुधनी से उम्मीदवार घोषित किया था। चैबीस घंटे के बाद ही अर्जुन आर्य ने वहां से चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया। अर्जुन आर्य का नाम तब चर्चा में आया था जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान के गृह जनपद सिहोर में किसानों ने जबर्दस्त आंदोलन छेड़ा था। उस आंदोलन की अगुवाई अर्जुन आर्य कर रहे थे। अर्जुन आर्य को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा। कुछ दिन बाद से अर्जुन जमानत पर रिहा हो गये थे। वह समाजवादी पार्टी के नेता बन गये। उनकी इसी शोहरत और जनाधार को देखकर अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी का उम्मीदवार बना दिया। अगले दिन ही अर्जुन आर्य ने वीडियो जारी कर बताया कि वह समाजवादी पार्टी का टिकट वापस कर रहे हैं। अर्जुन आर्य टिकट वापस करने तक ही सीमित रहते तो सपा को उतना झटका नहीं लगता। अर्जुन ने कांग्रेस से टिकट मांगा है। वीडियो में अर्जुन ने कहा कि मैं कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से कहना चाहता हूं कि अर्जुन आर्य पर भरोसा करें, शिवराज सिंह चैहान मध्यप्रदेश के जिस भी कोने से चुनाव लड़ें और कांग्रेस यदि उन्हें चुनौती के रूप में पेश करे, तो शिवराज सरकार को समाप्त करके ही दम लेंगे। इस प्रकार समाजवादी पार्टी को भी अप्रत्यक्ष संदेश वहां की जनता दे रही है कि उसे कांग्रेस के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ना चाहिए। कांग्रेस और बसपा के साथ चुनाव लड़ने की चर्चा पहले से हो रही थी लेकिन सुश्री मायावती ने जब छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी की पार्टी से समझौता करके मध्यप्रदेश में भी अपने 22 प्रत्याशी घोषित कर दिये थे, तभी यह तय होगा कि कांग्रेस और बसपा का गठबंधन नहीं होगा। इसके बाद भी सपा के साथ समझौते की उम्मीद थी। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी 6 अक्टूबर को मध्य प्रदेश की आधा दर्जन सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर दिये थे।
अर्जुन आर्य के इस व्यवहार से भी क्या अखिलेश यादव यह कह सकते हैं कि कांग्रेस के घमंड से गठबंधन की गुंजाइश खत्म हुई है। समाजवादी पार्टी ने गाोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) और बसपा से गठबंधन की बात कही है। बसपा 22 उममीदवारों की घोषणा पहले ही कर चुकी है। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गौरव यादव ने 6 उम्मीदवारों की घोषणा करते हुए कहा था कि बुधनी से ए. आर्य को प्रत्याशी बनाया गया है। इसी प्रकार सीधी विधानसभा सीट से के.के. सिंह, परस बाड़ा सीट से कंकर मुंजारे, बालाघाट विधान सभा सीट से अनुभा मंुजारे, निवाड़ी सीट से मीरा यादव और पन्ना विधानसभा सीट से दशरथ सिंह यादव को प्रत्याशी घोषित किया था। अखिलेश यादव ने 2 प्रत्याशी यादव बिरादरी के उतारे हंै। वह कहते है कि कांग्रेस का हमने बहुत इंतजार किया, आखिर हम कितने दिन और इंतजार करते। हालांकि श्री अखिलेश यादव अब भी यह कह रहे हैं कि गोण्डवाना गणतंत्र पार्टी और बसपा से बात करके कांग्रेस से चुनावी तालमेल किया जाएगा। अखिलेश यादव ने पहले भी कहा था कि आने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को अपना दिल बड़ा करना होगा। अगर पार्टी निर्णय लेने में इसी तरह देर करती रही तो छोटी पार्टियां राज्य में अपने अपने प्रत्याशी घोषित कर देंगी। मध्यप्रदेश में यही हो रहा है।
राजनीतिक पंडितों के अनुसार कांग्रेस अपनी क्षमता को परखने की कोशिश कर रही है। इसके साथ ही कांग्रेस को सहयोगी दलों के पाप का भी भागीदार होना पड़ेगा, इससे पार्टी बचना चाहती है। यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस के लिए विपक्षी दलों की यह नाराजगी भारी पड़ सकती है। दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल भी कांग्रेस से नाराज हैं। उन्होंने नार्थ-वेस्ट दिल्ली के रोहिणी इलाके में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि जो लोग नरेन्द्र मोदी को हटाना चाहते हैं, वे कांग्रेस को वोट न दें। इससे पता चलता है कि वे भी कांग्रेस से नाराज हैं। कांग्रेस इससे पहले कर्नाटक विधानसभा चुनाव में अकेले उतरी थी। वहां जेडीएस और बसपा ने मिलकर चुनाव लड़ा। कांग्रेस ने जेडीएस से हाथ मिलकर सरकार बनायी। कांग्रेस के सामने भी समस्या हैं। पंजाब में केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ही मुख्य विपक्षी दल है। इसी प्रकार तेलंगाना में कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल है तो चंद्रशेखर राव की टीआरएस के सामने घुटने किस तरह टेक दे। अखिलेश यादव आज नसीहत दे रहे हैं जब भाजपा ने सपा और बसपा दोनों को पैदल कर दिया है। अगर इनमें से कोई भी एक सत्ता में होता तो गठबंधन का राग कभी नहीं अलापता। फिलहाल, पांच राज्यों में विधान सभा चुनावों की घोषणा के बाद जो सर्वे आ रहे है, उसमें मध्यप्रदेश में कांग्रेस की अच्छी संभावना जतायी गयी है। ज्योतिरादित्य सिंधिया को मुख्यमंत्री के रूप में पहली पसंद बताया जा रहा है। वर्ष 2013 में हुए विधान सभा चुनाव में भाजपा ने 230 सीटों में 165 पर जीत हासिल की थी और कांग्रेस को 58 विधायक ही मिल पाये थे जबकि इस बार कांग्रेस को 122 विधायक मिलने की संभावना जतायी जा रही है। 
 


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