स्टैच्यू आॅफ यूनिटी से मोदी के कई संदेश
| Agency - 31 Oct 2018

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आजाद भारत के प्रथम गृहमंत्री और देश की पांच सौ से ज्यादा रियासतों को देश मंे विलय कराने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल की सबसे ऊँची प्रतिमा अपने गृहराज्य गुजरात मंे नर्मदा सरोवर के पास ही, नर्मदा माँ के आंचल मंे स्थापित करके एक साथ कई संदेश दिये हैं। अमेरिकी मीडिया मंे वाशिंगटन पोस्ट ने ठीक ही कहा है कि भारत को सबसे ऊंची प्रतिमा होने की शेखी झाड़ने का अधिकार स्टैच्यू आॅफ यूनिटी से मिलेगा। विश्व मंे सबसे ऊंची 600 फीट अर्थात् 182 मीटर ऊंची यह प्रतिमा भारत की वैश्विक महत्वाकांक्षा के साथ-साथ इसके नेता के पाॅलिटिकल ईगों के बारे मंे भी बताता है। वाशिंगटन पोस्ट के इसी लेख मंे आगे कहा गया है कि माना जा रहा है कि इस प्रतिमा से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को तीन मोर्चों पर जीत हासिल होगी। इनमंे सबसे पहले अपने हिन्दू राजनीतिक आधार की स्वीकृति क्योंकि सरदार पटेल ने ही सोमनाथ के मंदिर का स्वतंत्र भारत मंे निर्माण कराया था, दूसरा अपने गृहराज्य मंे एक ऐतिहासिक स्थल और बढ़ते वैश्विक शक्ति के रूप मंे भारत की पहचान भी इसी स्टैच्यू आॅफ यूनिटी से मिली है। अमेरिका के मीडिया मंे इस प्रतिमा के अनावरण को अनौपचारिक तौर पर भाजपा द्वारा 2019 के आम चुनावों के प्रचार की शुरुआत भी बताया गया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने संभवतः इसीलिए कहा भी कि हम महापुरुषों को सम्मान दे रहे हैं, इसे राजनीतिक चश्मे से न देखा जाए। श्री मोदी ने स्टैच्यू आॅफ यूनिटी के साथ ही उसी स्थल पर बनी वैली आफ फ्लावर्स और टेंट सिटी का भी उद्घाटन किया। उन्होंने यह भी कहा कि यह एक महान नेता को गरिमा ही नहंी राज्य के युवाओं को रोजगार का अवसर भी देगी क्योंकि इसे एक बेहतर पर्यटक स्थल के रूप मंे विकसित किया गया है। लौह पुरुष और देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की 143वीं जयंती के मौके पर 31 अक्टूबर 2018 को देशवासियों को स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की सौगात मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के नर्मदा जिले मंे स्थित केवडिया में विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा का उद्घाटन किया। 
सरदार पटेल की प्रतिमा के उद्घाटन के बाद पीएम मोदी ने यहां उपस्थित लोगों को संबोधित भी किया। मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत सरदार पटेल अमर रहे के नारे के साथ की। उन्होंने कहा कि आज पूरा देश राष्ट्रीय एकता दिवस मना रहा है। देश की एकता और अखंडता के लिए युवा दौड़ रहे हैं। मैं उनके इस जज्बे को नमन करता हूं। श्री मोदी ने कहा कि आज जो हुआ वो इतिहास में दर्ज हो गया है और इसे इतिहास से कोई मिटा नहीं पाएगा। आज जब धरती से लेकर आसमान तक सरदार सहाब का अभिषेक हो रहा है तब भारत ने न सिर्फ अपने लिए नया इतिहास रचा है बल्कि भविष्य के लिए प्रेरणा का गगनचुंबी आधार भी तैयार किया है। पीएम मोदी ने कहा सरदार की प्रतिमा को समर्पित करने का अवसर सौभाग्य की बात है। जब मैंने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर इसकी कल्पना की थी, तो अहसास नहीं था कि एक दिन प्रधानमंत्री के तौर पर मुझे ही यह पुण्य काम करने का मौका मिलेगा। 
सरदार पटेल की 182 मीटर ऊंची इस प्रतिमा को बनाने में हजारों मजदूर व सैकड़ों इंजीनियर तो महीनों तक जुटे ही साथ ही अमेरिका, चाइना से लेकर भारत के शिल्पकारों ने भारी मेहनत की। सरदार का चेहरा कैसा हो और भावभंगिमा कैसी हो इसे तय करने में काफी समय लग गया। करीब 44 माह के रिकार्ड समय में निर्मित इस प्रतिमा पर करीब 2332 करोड़ रुपये की लागत आई।
प्रतिमा के निर्माण में 70,000 टन सीमेंट, 22,500 टन स्टील व 1,700 मीट्रिक टन तांबा लगा है।
प्रतिमा भूकंप रोधी है जो 6.5 तीव्रता के भूकंप को सहन कर सकती है और 220 किमी प्रति घंटा की तेज हवा का सामना कर सकती है।
चार धातुओं से बनी इस प्रतिमा को जंग छू भी नहीं सकेगा। निर्माण में 85 फीसद तांबा का उपयोग किया गया है। ध्यान रहे कि अमेरिका की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माण में पांच साल लगे थे। चीन में बुद्ध की प्रतिमा के निर्माण में करीब 90 साल लगे थे। स्टैचू आॅफ यूनिटी ऊंचाई मंे अमेरिका की स्टैच्यू आॅफ लिबर्टी (93 मीटर) से दोगुनी है। 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज पूरा देश राष्ट्रीय एकता दिवस मना रहा है। किसी भी देश के इतिहास में ऐसे अवसर आते हैं, जब वो पूर्णता का अहसास कराते हैं। आज वही पल है जो देश के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो जाता है, जिसे मिटा पाना मुश्किल है। श्री मोदी ने कहा कि हम आजादी के इतने साल तक एक अधूरापन लेकर चल रहे थे, लेकिन आज भारत के वर्तमान ने सरदार के विराट व्यक्तित्व को उजागर करने का काम किया है। आज जब धरती से लेकर आसमान तक सरदार साहब का अभिषेक हो रहा है, तो ये काम भविष्य के लिए प्रेरणा का आधार है। उन्होंने कहा कि ये मेरा सौभाग्य है कि मुझे सरदार साहब की इस विशाल प्रतिमा को देश को समर्पित करने का अवसर मिला है। जब मैंने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर इसकी कल्पना की थी, तो कभी अहसास नहीं था कि प्रधानमंत्री के तौर पर मुझे ये पुण्य काम करने का मौका मिलेगा। इस काम में जो गुजरात की जनता ने मेरा साथ दिया है, उसके लिए मैं बहुत आभारी हूं। नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं जिस मिट्टी में पला बढ़ा, जिनके बीच में मैं बड़ा हुआ उन्होंने ही मुझे सम्मान पत्र दिया। ये वैसा ही जैसे कोई मां अपने बेटे की सिर पर हाथ रखती है। उन्होंने कहा कि मुझे लोहा अभियान के दौरान मिले, लोहे का पहला टुकड़ा भी दिया गया है। हमने इस अभियान में लोगों से मिट्टी भी मांगी थी। देश के लाखों किसानों ने खुद आगे बढ़कर इस शुभ काम के लिए लोहा और मिट्टी दी। 
प्रधानमंत्री बोले कि आज मुझे वो पुराने दिन याद आ रहे हैं, जी भरकर बहुत कुछ कहने का मन भी कर रहा है। किसानों ने इस प्रतिमा के निर्माण को आंदोलन बना दिया। जब मैंने ये विचार आगे रखा था, तो शंकाओं का वातावरण बना था। जब ये कल्पना मन में चल रही थी, तब मैं सोच रहा था कि यहां कोई ऐसा पहाड़ मिल जाए जिसे तराशकर मूर्ति बना दी जाए। लेकिन वो संभव नहीं हो पाया, फिर इस रूप की कल्पना की गई। सरदार पटेल ने उस समय खंडित पड़े देश को एक सूत्र में बांधा, तब मां भारती 550 से अधिक रियासतों में बंटी हुई थी। दुनिया में भारत के भविष्य के प्रति बहुत निराशा था, तब भी कई निराशावादी थे। उन्हें लगता था कि भारत अपनी विविधताओं की वजह से बिखर जाएगा। तब सभी को सिर्फ एक ही किरण दिखती थी, ये किरण थी सरदार वल्लभभाई पटेल। उस समय सभी रजवाड़ों को एक साथ लाए थे पटेल। उन्होंने 5 जुलाई 1947 में रियासतों को कहा था कि विदेशी आक्रांताओं के सामने हमारे आपसी झगड़े, आपसी दुश्मनी, बैर का भाव हमारी हार की बड़ी वजह थी। अब हमें इस गलती को नहीं दोहराना है और न ही किसी का गुलाम होना है। देखते ही देखते भारत एक हो गया, सरदार साहब के कहने पर सभी रजवाड़े एक साथ आए। सरदार पटेल में कौटिल्य की कूटनीति और शिवाजी के शौर्य का समावेश था। यह हमें स्टैच्यू आॅफ यूनिटी याद दिलाती रहेगी। 
 


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