चुनावी नाटक में नये किरदार
| Agency - 02 Nov 2018

चुनाव के समय एक दल से दूसरे दल में जाना और नाराज होकर निर्दलीय चुनाव लड़ना तो सामान्य बात है लेकिन कभी-कभी नये-नये नेता और राजनीतिक दल उभर आते हैं और तब यह कहना मुश्किल होता है कि चुनावी समीकरण को वे कितना प्रभावित कर सकते हैं। मध्य प्रदेश में 28 नवम्बर को चुनाव होना है और वहां नामांकन भी शुरू हो गया है। इसलिए सरगर्मियां ज्यादा बढ़ गयी हैं। चुनावी महासमर में एक चर्चित नाम देवकी नंदन ठाकुर का जुड़ गया है। उन्हें पहले शिवराज सिंह चैहान की सरकार का ही समर्थक माना जाता था। देवकी नंदन ठाकुर ने 31 अक्टूबर को भोपाल में ‘सर्व समाज कल्याण पार्टी’ नाम के राजनीतिक दल का साथ देने की घोषणा की है। सर्व समाज कल्याण पार्टी मध्य प्रदेश में काफी पहले से अस्तित्व में है लेकिन चर्चा में कम आती थी। देवकीनंदन ठाकुर के हाथों इसका नाम अब सार्वजनिक किया गया है और राज्य की सभी 230 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए प्रत्याशी तलाशे जा रहे हैं। देवकी नंदन ठाकुर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति ऐक्ट मंे बदलाव की मांग कर रहे हैं। उन्हांेने सरकार से इस ऐक्ट मंे बदलाव करने की मांग उठाकर सवर्णों का समर्थन पाने का प्रयास किया है। ठाकुर कथावाचक और आध्यात्मिक गुरू हैं। मध्य प्रदेश में इस बार बाबाओं और साधुओं की चर्चा ज्यादा हो रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान नेे भी चार बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा  दे दिया था। हालांकि उनमे से कम्प्यूटर बाबा जैसे लोग सरकार का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उन्हें मनपसंद जगह से टिकट नहीं दिया गया। यही स्थिति देवकी नंदन ठाकुर की भी है। मध्य प्रदेश में सवर्ण आंदोलन ने काफी जोर पकड़ा था। कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर ने दलित एक्ट के खिलाफ मुहिम चलाने के लिए अखंड इंडिया मिशन नामक दल भी बनवाया। इस दल का राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर को बनाया गया। देवकी नंदन ठाकुर मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के मथुरा मंे 12 सितम्बर 1978 को हुआ था। इसलिए उत्तर प्रदेश को भी वह अपनी कर्मलीला बनाते हैं। एससी/एसटी एक्ट के विरोध में  उन्होंने आगरा में गिरफ्तारी भी दी थी। केन्द्र सरकार को लेकर उन्होने एक विवादित बयान दिया था। देवकी नंदन ठाकुर ने सरकार को चेतावनी दी थी कि दलित एक्ट में बदलाव के लिए हमने सरकार को दो महीने का समय दिया है, अगर हमें हल मिल गया तो हम कुछ नहीं करेंगे लेकिन अगर हमें  समाधान नहीं मिला तो हम वह करेंगे जो भारत के इतिहास में कभी हुआ ही नहीं। इस प्रकार देवकी नंदन ठाकुर विवादों में घिरते रहे हैं लेकिन उनकी क्षमता और योग्यता की तारीफ करने वाले भी कम नहीं हैं। भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा के ओहावा गांव के एक ब्राह्मण परिवार से हैं और उनकी माता श्रीमद्भागवत गीता, महापुराण में बहुत विश्वास रखती थीं। देवकी नंदन पर इसका प्रभाव पड़ा और 6 साल की उम्र में ही वह घर छोड़कर वृंदावन पहुंचे। ब्रज के रासलीला संस्थान में हिस्सा लिया। यहां उन्होंने भगवान राम और कृष्ण की भूमिकाएं निभाईं। कृष्ण की भूमिका निभाने के कारण ही उन्हें लोग ठाकुर जी कहने लगे थे। उनकी स्मरण शक्ति गजब की है। उन्होंने 13 साल की उम्र में ही श्रीमद्भागवत पुराण कंठस्थ कर ली थी। निम्बार्क सम्प्रदाय के अनुयायी के रूप में गुरू-शिष्य की परम्परा के तौर पर दीक्षा ली थी। देवकी नंदन ठाकुर ने 18 साल की उम्र में दिल्ली के शाहदरा में भगवान श्रीराम के एक मंदिर का आश्रय पकड़ा। इसी मंदिर में वह श्रीमद्भागवत के उपदेश लोगों को देने लगे। इसके बाद उन्होंने कई स्थानों पर श्रीकृष्ण और राम कथा का वाचन किया। उनके अनुयायियों और प्रशंसकों की बड़ी संख्या है। बताते हैं कि ट्वीटर पर उनके तीन लाख 27 हजार फालोअर्स है जबकि फेसबुक पर 25 लाख से ज्यादा लोग उनके फालोअर बताए गये हैं। इस प्रकार देवकी नंदन ठाकुर के राजनीति में उतरने से भाजपा और कांग्रेस समेत अन्य राजनीतिक दल चैकन्ने हो गये हैं। मध्य प्रदेश में उन्होंने सक्रिय राजनीति में भाग लेने की घोषणा कर दी है। महाकाल की नगरी उज्जैन में एक नवम्बर को कथावाचक देवकी नंदन ने सफल रोड शो किया है। यह दिन मध्य प्रदेश के लिए विशेष महत्व रखता है। क्योंकि एक नवम्बर को ही मध्य प्रदेश अलग राज्य बना था और इस दिन राज्य का स्थापना दिवस भी मनाया जाता है। 


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