दीपावली पुंज का प्रथम पर्व धनतेरस
| Agency - 02 Nov 2018

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम हमारे मार्गदर्शक रहे हैं। द्वापर में भगवान कृष्ण भी रहे। राजा बनकर राज किया, द्वारिकाधीश थे लेकिन अच्छे शासन के लिए रामराज्य की बात कही जाती है। इन्हीं भगवान राम की लंका विजय के बाद अयोध्या में वापसी की खुशी में दीपावली मनायी जाती है। दीपावली सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि त्योहार पुंज है जो कार्तिक कृष्णपक्ष की त्रयोदशी से प्रारम्भ होता है। इसके बाद नरक चतुर्दशी अर्थात् छोटी दीपावली, फिर अमावस की रात को दीपमालाओं से जगमगाने का पर्व दीपावली, इसके अगले दिन गोवर्द्धन पूजा और फिर भइयादूज तक दीपावली का त्योहार मनाया जाता है। धनतेरस पर हम अपने घर में विभिन्न रूपों में लक्ष्मी जी को ले आते हैं। मान्यता है कि क्षीर सागर के मंथन के दौरान धनतेरस के दिन ही माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर प्रकट हुए थे। यह भी कहा जाता है कि इसी दिन आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वंतरि का जन्म हुआ था। यही वजह है कि इस दिन माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा का विधान है। भगवान धन्वंतरि के जन्मदिन को भारत सरकार का आयुर्वेद मंत्रालय राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के नाम से मनाता है। इसके अलावा धनतेरस के दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा भी की जाती है। इस दिन सोने-चांदी के आभूषण और बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। धनतेरस का पर्व दीपावली से दो दिन पहले मनाया जाता है। हिन्दू कैलेंडर के मुताबिक कार्तिक मास की तेरस यानी कि 13वें दिन धनतेरस मनाया जाता है। इस बार धनतेरस 5 नवंबर को है। धनतेरस पर सामान्य रूप से सोने-चांदी के सिक्के और बर्तन खरीदे जाते हैं। इस बार धनतेरस 05 नवंबर 2018 को सुबह 01 बजकर 24 मिनट से रात 11 बजकर 46 मिनट तक है। धनतेरस पूजा मुहूर्त 05 नवंबर 2018 को शाम 06 बजकर 20 मिनट से रात 08 बजकर 17 मिनट तक है। धनतेरस का दिन धन खरीददारी के लिए शुभ माना जाता है. इस दिन लोग अपने घर के लिए नया सामान जोड़ते हैं। मान्यता है कि इस दिन खरीदा गया सामान कभी खराब नहीं होता और बेहद शुभ होता है। फिर भी धनतेरस के दिन इन चीजों को जरूर खरीदना चाहिए। आमतौर पर लोग इस दिन सोने-चांदी के आभूषण खरीदते हैं. लेकिन यह जरूरी नहीं कि आपकी जेब भी इसकी अनुमति दे। त्योहार है तो उसे मनाना भी जरूरी है। ऐसे में आप सोने या चांदी का सिक्का खरीद सकते हैं। धनतेरस के दिन धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है और उन्हें चांदी अति प्रिय है। ऐसे में इस दिन चांदी खरीदना अच्छा माना जाता है। कहते हैं कि धनतेरस के मौके पर चांदी खरीदने से यश, कीर्ति और ऐश्वर्य की वृद्धि होती है. यही नहीं चांदी को चंद्रमा का प्रतीक भी माना जाता है, जो मनुष्य के जीवन में शीतलता लेकर आती है। इस दिन धातु के बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। विशेषकर चांदी और पीतल को भगवान धन्वंतरि का प्रिय धातु माना जाता है. ऐसे में इस दिन चांदी या पीतल के बर्तन जरूर खरीदने चाहिए। मान्यता है कि भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन के दौरान हाथ में कलश लेकर जन्मे थे। इसलिए धनतेरस के दिन पानी भरने वाला बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। इस दिन व्यापारी नए बही-खाते खरीदते हैं, जिनकी पूजा दीपावली के मौके पर की जाती है। इस दिन गणेश और लक्ष्मी की अलग-अलग मूर्तियां जरूर खरीदें. दीपावली के दिन इन मूर्तियों की पूजा का विधान है। इस दिन खील-बताशे और मिट्टी के छोटे दीपक खरीदें. एक बड़ा दीपक भी खरीदें। इस दिन लक्ष्मी जी का श्री यंत्र खरीदना भी शुभ माना जाता है। इसके अलावा आप अपनी घर की जरूरत का दूसरा सामान जैसे कि फ्रिज, वॉशिंग मशीन, मिक्सर-ग्राइंडर, डिनर सेट और फर्नीचर भी ले सकते हैं। इस दिन वाहन खरीदना शुभ होता है. लेकिन मान्यताओं के मुताबिक राहु काल में वाहन नहीं खरीदना चाहिए। मान्यता है कि मां लक्ष्मी को कौड़ियां अति प्रिय हैं। इसलिए धनतेरस के दिन कौड़ियां खरीदकर रखें और शाम के समय इनकी पूजा करें.। दीपावली के बाद इन कौड़ियों को अपने घर की तिजोरी में रखें। मान्यता है कि ऐसा करने से धन-धान्य की कमी नहीं रहती। मां लक्ष्मी को धनिया अति प्रिय है। धनतेरस के दिन धनिया के बीज जरूर खरीदने चाहिए। मान्यता है कि जिस घर में धनिया के बीज रहते हैं वहां कभी धन की कमी नहीं रहती। दीपावली के बाद धनिया के इन बीजों को घर के आंगन में लगाना चाहिए। धनतेरस के दिन नया झाड़ू खरीदना चाहिए। मान्यता है कि झाड़ू दरिद्रता को दूर करता है। कहते हैं कि लक्ष्मी स्वच्छ घर में ही निवास करती हैं और झाड़ू सफाई करने का सर्वोत्तम साधन है। धनतेरस के दिन नया सामान खरीदना शुभ माना जाता है, लेकिन मान्यताओं के अनुसार इस दिन कुछ चीजों को खरीदने से बचना चाहिए। मान्यताओं के मुताबिक धनतेरस के दिन कांच का सामान नहीं खरीदना चाहिए। हिन्दू धर्म में काले रंग को शुभ नहीं माना जाता है। ऐसे में कहा जाता है कि धनतेरस के दिन काले रंग की चीजें नहीं खरीदनी चाहिए। इस दिन नुकीली चीजें जैसे कि कैंची और चाकू नहीं खरीदना चाहिए। धनतेरस से पहले घर की साफ-सफाई का काम पूरा कर लें. धनतेरस के दिन स्वच्छ घर में ही भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर का स्वागत करें.। धनतेरस के दिन बर्तन खरीदने के बाद घर लाते समय उसे खाली न लाएं और उसमें कुछ मीठा जरूर डालें. अगर बर्तन छोटा हो या गहरा न हो तो उसके साथ मीठा लेकर आएं। धनतेरस के दिन तिजोरी में अक्षत रखे जाते हैं। ध्यान रहे कि अक्षत खंडित न हों यानी कि टूटे हुए अक्षत नहीं रखने चाहिए। इस दिन उधार लेना या उधार देना सही नहीं माना जाता है।  धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और यमराज की पूजा का विधान है। इसी दिन आरोग्य के देवता और आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन धन्वंतरि की पूजा करने से आरोग्य और दीर्घायु प्राप्त होती है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा को धूप और दीपक दिखाएं। साथ ही फूल अर्पित कर सच्चे मन से पूजा करें। धनतेरस के दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा भी की जाती है। इस दिन संध्या के समय घर के मुख्य दरवाजे के दोनों ओर अनाज के ढेर पर मिट्टी का बड़ा दीपक रखकर उसे जलाएं। दीपक का मुंह दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए।


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