सिग्नेचर ब्रिज के उद्घाटन में मनोज तिवारी को नहीं मिला आमंत्रण 
| Agency - 02 Nov 2018

नई दिल्ली, दिल्ली के भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी नाराज है वजह 4 नवम्बर, 2018 को सिग्नेचर ब्रिज के उद्घाटन समारोह होने जा रहा है लेकिन दिल्ली सरकार द्वारा प्रोटोकाल का उल्लंघन कर निमंत्रण न देने पर प्रतिक्रिया करार देते हुए मनोज तिवारी ने कहा कि जिस सिग्नेचर ब्रिज को लेकर दिन-रात संघर्ष किया, खजूरी खास पर अनशन किया उसी समारोह में निमंत्रण न देकर कहीं न कहीं क्षेत्र के सांसद होने के नाते मुख्यमंत्री द्वारा प्रोटोकाल का उल्लंघन किया गया है. साथ ही तिवारी ने कहा कि सिग्नेचर ब्रिज का इतिहास बहुत पुराना है 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ तत्कालीन विधायक साहब सिंह चौहान के निमंत्रण पर ब्रिज बनाने को लेकर चर्चा की गई. उस समय 265 करोड़ रूपये की लागत से इसे बनाने की योजना तैयार की गई थी लेकिन 2004 में सत्ता परिवर्तन के साथ दिल्ली की मुख्यमंत्री और केन्द्र सरकार में तालमेल की कमी के कारण इस ब्रिज का बजट बढ़कर 400 करोड़ रूपये हो गया. वर्ष 2009 में सांसद जेपी अग्रवाल और मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की आपसी कलह की वजह से ब्रिज का कार्य अधर में लटका रहा. तिवारी ने कहा कि 2014 में उत्तर पूर्व संसदीय क्षेत्र से मैं सांसद निर्वाचित हुआ और सिग्नेचर ब्रिज पर पहली मीटिंग तत्कालीन विधायक साहब सिंह चैहान और करावल नगर के तत्कालीन विधायक मोहन सिंह बिष्ट के साथ हुई जिसमें मुझे बताया गया कि गैमन नाम की कम्पनी प्रोजेक्ट छोड़कर भाग चुकी है और अब ब्रिज का बजट बढ़कर 1100 करोड़ रूपये का हो गया है. अक्टूबर माह में रूके हुए प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए 33 करोड़ रूपये की आवश्यकता बताई गई जिस पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली में राष्ट्रपति शासन होते हुए मेरे अनुरोध पर केन्द्र सरकार ने 33 करोड़ रूपये आवंटित किए थे. 


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