ट्रम्प का भारत को दीवाली गिफ्ट
| Agency - 06 Nov 2018

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी भारतीय तीज-त्योहारों का महत्व समझते हैं और दीपावली के अवसर पर उन्होंने भारत को एक ऐसा गिफ्ट भी दिया है जिससे भारतीय खुश हो गये। हालांकि इस गिफ्ट के पीछे भी अमेरिका के राष्ट्रपति का राजनीतिक मकसद है। अमेरिका के मध्यावधि चुनाव मंे भारतीय मूल के लोगों का जिस तरह वर्चस्व बढ़ता जा रहा है, उससे श्री ट्रम्प जानते थे कि अमेरिका के मना करने के बाद भी भारत ईरान से तेल खरीदेगा इसलिए श्री ट्रम्प ने दीपावली से ठीक एक दिन पहले ही कहा कि भारत समेत 8 देश ईरान से तेल खरीद सकते हैं। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा है कि ईरान पर जारी यूएस के प्रतिबंध हालांकि सख्ती से लागू रहेंगे लेकिन भारत यदि ईरान से तेल खरीदता है तो अमेरिका उसे नहीं रोकेगा। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियों ने तेल आयात की छूट को अस्थायी बताया है लेकिन 6 नवम्बर को ही अमेरिका के मध्यावधि चुनाव मंे भारतीय मूल के लोगों ने जिस तरह से जन समर्थन प्राप्त किया है, उससे अमेरिका के राष्ट्रपति को दबाव वाली रणनीति बदलनी ही पड़ेगी। अमरीका में 6 नंवबर को अमरीकी कांग्रेस या प्रतिनिधि सभा और सीनेट की कुछ सीटों के लिए मतदान हो रहे हैं. इस चुनावी दंगल में अमरीका की प्रतिनिधि सभा के लिए सबसे अधिक भारतीय मूल के कुल 12 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें सबसे अहम एरिजोना प्रांत में हीरल तिपिर्नेनी डिस्ट्रिक्ट आठ से डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार हैं जो रिपब्लिकन पार्टी की मौजूदा सांसद डेबी सेल्को को कड़ी टक्कर दे रही हैं। एरिजोना प्रांत को रिपब्लिकन पार्टी का गढ़ माना जाता है तो ऐसे में एक भारतीय मूल के उम्मीदवार की हैसियत से हीरल तिपिर्नेनी अपना अनुभव बताते हुए कहती हैं कि एरिजोना में अब तक किसी ने रिपब्लिकन पार्टी को ऐसी चुनौती नहीं दी। हीरल तिपिर्नेनी कहती हैं, अभी भी एरिजोना में यह बहुत कम ही नजर आता है कि भारतीय मूल के लोग चुनाव में खड़े हों....लेकिन हम इस बार पिछले कई वर्षों में पहली बार रिपब्लिकन पार्टी को ऐसी चुनौती दे रहे हैं जो अब तक नहीं दी गई...हम कांटे की टक्कर दे रहे हैं। पेशे से डॉक्टर हीरल तिपिर्नेनी बताती हैं कि उनके मुख्य चुनावी मुद्दे हैं स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरी लाना और प्रवासी कानून में बेहतर सुधार करना। डॉक्टर हीरल तिपिर्नेनी बताती हैं कि उनके पति और तीन बच्चों समेत उनका पूरा परिवार चुनावी मुहिम में लगा हुआ है। इसके अलावा भारत में रह रहे उनके परिवार के सदस्य भी उनको प्रोत्साहन दे रहे हैं। वो बताती हैं कि अक्सर भारत का चक्कर लगा आती हैं। वो आंध्र प्रदेश और गुजरात में अपने परिवार वालों के साथ समय भी गुजारती हैं। इसी तरह भारतीय मूल की अनीता मलिक भी एरिजोना के डिस्ट्रिक्ट आठ से डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार हैं। उनका मुकाबला है रिपब्लिकन पार्टी के मौजूदा सांसद डेविड शवायकार्ट के साथ। अनीता मलिक बताती हैं कि एरिजोना में बहुत से लोग राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की नीतियों से नाराज होकर डेमोक्रेटिक पार्टी को वोट देना चाहते हैं। अनीता मलिक कहती हैं, एरिजोना में कुछ वोटरों में तो नाराजगी इस कदर है कि वो तो सिर्फ राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ वोट देने के लिए निकलना चाहते हैं। बहुत से ऐसे भी हैं जो स्थानीय मुद्दों पर अपना वोट देना चाहते हैं। अनीता मलिक के माता-पिता भारत में दिल्ली और पूना में रहते थे और वहां से अमरीका में आकर बस गए। अनीता ने पिछले साल तक एक टेक्नोलॉजी कंपनी में सीईओ की हैसियत से नौकरी की। नौकरी छोड़कर 2017 में ही राजनीति में आईं। अनीता मलिक बताती हैं कि अब धीरे-धीरे एरिजोना में भारतीय मूल के लोग राजनीति में बढ़-चढ़ कर भाग लेना शुरू कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनके लिए सबसे अहम चुनावी मुद्दे हैं स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार। इसके अलावा वो अमरीकी चुनावी प्रणाली में धन के बेतहाशा इस्तेमाल के बारे में भी कुछ करना चाहती हैं, जिससे आम लोगों को भी चुनाव में खड़े होने का मौका मिले। अनीता कहती हैं कि ऐसे लोग भी चुनाव लड़ना चाहते हैं जो लाखों डॉलर जुटाने की क्षमता नहीं रखते हैं। भारतीय मूल की मौजूदा कांग्रेस की सदस्या डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमिला जयपाल वॉशिंगटन प्रांत से फिर चुनाव लड़ रही हैं। इसके अलावा कैलिफोर्निया से मौजूदा कांग्रेस सदस्य डेमोक्रेटिक पार्टी के रो खन्ना और अमीबेरा फिर से चुनाव लड़ रहे हैं। इलिनाय प्रांत से मौजूदा कांग्रेस में डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य राजा कृष्णमूर्ति भी फिर से मैदान में हैं, जहां उनके प्रतिद्वंदी रिपब्लिकन पार्टी के भारतीय मूल के ही जीतेंद्र दिगांकर हैं। इन सभी डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों के जीतने की अच्छी संभावनाएं हैं। इसके अलावा भारतीय मूल के अमरीकी स्री प्रेस्टन कुलकर्णी ने अमरीकी विदेश सेवा की नौकरी छोड़कर राजनीति में प्रवेश किया और अब वो टेक्सास से कांग्रेस के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार की हैसियत से चुनाव लड़ रहे हैं.
फ्लोरिडा में संजय पटेल डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार हैं जो मौजूदा कांग्रेस सदस्य बिल पोसी के खिलाफ मैदान में हैं। कनेक्टीकट प्रांत में एक मात्र भारतीय मूल के रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार हैरी अरोड़ा डेमोक्रैट जिम हाइम्स के खिलाफ लड़ रहे हैं, लेकिन डेमोक्रेटिक उम्मीदवार इस सीट से पिछले 10 साल से चुनाव जीत रहे हैं।
हैरी अरोड़ा को फिर भी उम्मीद है कि वोटर अब उनको भी मौका दे सकते हैं। हैरी अरोड़ा कहते हैं, मुझे तो सभी तरह के लोग समर्थन दे रहे हैं। हमारे क्षेत्र में अधिकतर लोग चाहते हैं कि उनके मुद्दों को सुलझाने के लिए काम किया जाए न कि बस टालमटोल करके बात इधर की उधर कर दी जाए। मेरा तरीका यह है कि कैसे मामले सुलझाए जाएं, उसके बारे में पूरी योजना सामने रखें न कि सिर्फ उन पर बात करके आगे बढ़ जाएं।
एक मात्र भारतीय मूल के आजाद उम्मीदवार शिवा अय्यादुराई भी सीनेट की सीट के लिए मैसाचुसेट्स प्रांत में चुनावी मैदान में हैं और उनके सामने हैं डेमोक्रेटिक पार्टी की दिग्गज नेता और मौजूदा सीनेटर एलीजाबेथ वॉरेन।
अब ऐसे में शिवा अय्यादुराई के जीतने की कोई संभावना नजर नहीं आती। उम्मीद की जा रही है कि एलीजाबेथ वॉरेन सन 2020 में डेमोक्रेटिक पार्टी की राष्ट्रपति पद के चुनाव में उम्मीदवार हो सकती हैं। अमरीकी कांग्रेस के चुनाव के अलावा भारतीय मूल के दर्जनों लोग प्रांतीय और स्थानीय चुनावों में भी भाग ले रहे हैं। इसलिए अमेरिका को भारत के प्रति दृष्टिकोण बदलना होगा। 
 


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