अमेठी को भगवामय बना रहीं ईरानी
| Agency - 20 Nov 2018

कुछ लोग नाम से जाने जाते हैं तो कुछ लोग काम से पहचान बनाते हैं। नाम वाले निश्चित रूप से चांदी का चम्मच मुंह में लेकर पैदा होते हैं। दूसरे शब्दों में  कह सकते हैं कि वे भाग्यशाली होते हैं और उन्हें एक मजबूत आधार बना-बनाया मिलता है, जबकि दूसरे प्रकार के लोग तिनका-तिनका जोड़कर आधार बनाते हैं तब उस पर खड़े होने का प्रयास करते हैं। ऐसे लोग कठिन परिश्रमी तो होते ही हैं, साथ ही दृढ़ इच्छाशक्ति के मालिक भी होते हैं। राजनीति में नाम कमा रहीं स्मृति ईरानी भी ऐसी ही नेता हैं जिन्होंने सब कुछ अपनी मेहनत से पाया है। पहले वे छोटे पर्दे पर धारावाहिकों में काम करती थीं और एक आदर्श बहू की भूमिका निभाकर वे घर-घर की चहेती बन गयी थीं। इसके बाद भाजपा ने उन्हें राजनीति में उतारा तो एक नई दुनिया में उन्होंने अपनी छाप छोड़ी है। मोदी सरकार ने स्मृति ईरानी को जो भी भूमिका सौंपी, उसका सम्यक निर्वहन उन्होंने किया है। इसके साथ ही उनका लगाव उस अमेठी से हमेशा बना रहा जहां का वे प्रतिनिधित्व करना चाहती है अमेठी, रायबरेली कांग्रेस के प्रमुख गढ़ हैं लेकिन अब अमेठी में भी स्मृति ईरानी भगवा फहराने की लगातार कोशिश कर रही है। अमेठी कभी संजय गांधी का कर्मक्षेत्र हुआ करता था। श्रीमती इन्दिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी ही राजनीति मंे रुचि रखते थे लेकिर नियति को कुछ और ही मंजूर था। संजय गांधी की एक हवाई दुर्घटना में मौत हो गयी। इस प्रकार के हादसे रायबरेली और अमेठी के प्रतिनिधित्व को तय करते रहे। रायबरेली का प्रतिनिधित्व श्रीमती सोनिया गांधी ने संभाला तो अमेठी राहुल गांधी के हिस्से में आ गयी। स्मृति ईरानी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में अमेठी की जनता का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया लेकिन वहां का प्रतिनिधित्व करने में उन्हें सफलता नहीं मिल पायी। इस असफलता के बावजूद स्मृति, ईरानी की दृढ़ इच्छाशक्ति अमेठी को भगवामय बनाने के लिए तत्पर है। वे अक्सर अमेठी क्षेत्र का दौरा करती हैं। वहां के लिए विका योजनाएं बनाती हैं हाल ही में स्मृति ईरानी अमेठी पहुंची थीं तो कुछ विरोधियों ने जनता को भड़काने का भी प्रयास किया लेकिन अब जनता यह समझने लगी है कि कौन विकास कार्य करने में सक्षम है और कौन सिर्फ वादे कर रहा है। स्मृति को इस बात का भी श्रेय दिया जाना चाहिए कि वे जब अमेठी के लिए कोई जनकल्याणकारी कार्य करती है तो कांग्रेस के राष्ट्रीय  अध्यक्ष और अमेठी से सांसद राहुल गांधी भी कोई न कोई योजना शुरू कर देते हैं। अमेठी की जनता इसके लिए स्मृति ईरानी का ही आभार मानती है। अभी पिछले दिनों स्मृति ईरानी अमेठी पहुंची थीं। उन्होंने अमेठी का दौरा भी एक विशेष अवसर पर किया था। यह अवसर था स्व. श्रीमती इन्दिरा गांधी के जन्मदिन का। इन्दिरा गांधी को देश ही नहीं पूरी दुनिया को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। उन्होंने भारत की बहुत अच्छी छवि बनायी थी। इसलिए रायबरेली से अमेठी तक इस अवसर पर विशेष कार्यक्रम होते हैं। स्मृति ईरानी ने भी वहां के लोगों को इस अवसर पर एक विशेष भेंट देने का कार्यक्रम बनाया था। स्मृति ईरानी लखनऊ से हेलिकाप्टर से डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा, राज्यमंत्री महेन्द्र सिंह, मोहिसिन रजा व सुरेश पासी के साथ अमेठी पहुंची। अमेठी मंे संसदीय प्रतिनिधित्व भले ही कांग्रेस के पास है लेकिन वहां विधानसभा क्षेत्रों मंे भाजपा का वर्चस्व है। इसलिए स्मृति ईरानी ने उन लोगों को अपने साथ रखा और तीन घंटे वहां बिताये।
स्मृति ईरानी अमेठी के गौरीगंज के हेलिपैड पर उतरीं तो स्थानीय भाजपा नेता उनके स्वागत मंे मौजूद थे। गौरीगंज से स्मृति ईरानी सड़क मार्ग से अमेठी के पिडोरिया गांव पहुंचीं। पिडोरिया मंे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला कार्यवाह सावित्री प्रसाद पांडेय रहा करते थे। जनता के बीच वे बहुत लोकप्रिय थे। गत दिनों सावित्री प्रसाद पांडेय का निधन हो गया था। स्मृति ईरानी ने उनके घर जाकर शोक व्यक्त किया और उनके परिजनों को हर प्रकार की सहायता देने का आश्वासन दिया। स्मृति ईरानी हमेशा इस तरह का व्यवहार करती हैं जिसमे लगे कि अमेठी उनका घर है। अमेठी के लोगों के सुख-दुख में वे हमेशा शामिल रहती हैं। इसके साथ ही अमेठी क्षेत्र के विकास की चिंता भी है। इसीलिए स्मृति ईरानी ने अमेठी में 77 करोड़ रुपये की योजनाओं का शिलान्यास किया है। उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि जिन योजनाओं का शिलान्यास हुआ है, उनका शीघ्र ही उद्घाटन भी वही करेंगी। स्मृति ईरानी ने मंत्रियों के साथ 1492 दिव्यांगों को कृत्रिम उपकरण बांटे हैं। उन्होंने  कहा दिव्यांगों को आपकी कोरी सहानुभूति नहीं बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत है। गौरीगंज के जवाहर नवोदय विद्यालय में कार्यक्रम में दिव्यांगों को उपकरण वितरण के साथ ही निम्बोली प्रोजेक्टर से महिलाओं को जोड़कर स्वावलम्बी बनाया गया। स्मृति ईरानी ने पहले शिक्षामंत्री का दायित्व संभाला था और अब कपड़ा उद्योग मंत्रालय क कार्य देख रही हैं। उन्होंने अमेठी क्षेत्र के युवाओं को तकनीकी शिक्षा का लाभ देने के लिए चार आईटीआई संस्थान खोलने की घोषणा की है। इस प्रकार स्मृति ईरानी अमेठी क्षेत्र को भगवामय के साथ रोजगार का केन्द्र भी बना रही हैं। स्मृति ईरानी ने अमेठी को इतनी सौगातें दीं तो अमेठी के संसदीय प्रतिनिधि राहुल गांधी को भी इस क्षेत्र के विकास की याद आयी। राहुल गांधी इन दिनों मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनावों में व्यस्त थे। छत्तीसगढ़ में दोनों चरणों में मतदान हो चुका है। मध्यप्रदेश और राजस्थान मंे अभी मतदान होना है। इसलिए राहुल गांधी का पूरा ध्यान इन्हीं राज्यों में लगा है। इसके बावजूद जब अमेठी में स्मृति ईरानी ने 77 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास किया तो राहुल ने अमेठी के किसानों के लिए 40 हजार केले के पौधे भिजवाए हैं। किसानों को खेती के साथ ही फलों और सब्जियों को उगाने से अतिरिक्त आमदनी हो सकती है। राहुल गांधी ने केले के जो पौधे भिजवाए हैं, वे इजरायली प्रजाति के हैं। खेतिहर मजदूर संघ के जिलाध्यक्ष अनिल शुक्ल के माध्यम से ये पौधे लोकसभा क्षेत्र की सभी ग्राम पंचायतों के किसानों को बंटवाये गये हैं। प्रति विधानसभा दस हजार पौधों का लक्ष्य रखा गया है। केले के ये पौधे नई तकनीक पर आधारित हैं। इजरायल वैसे भी तकनीकी दृष्टि से बहुत आगे बढ़ गया है। राहुल गांधी ने अमेठी के लिए जो केले के पौधे भिजवाये हैं, उनसे प्रति पौधा 50 से 60 किलो केले का उत्पादन होता है। राहुल गांधी के प्रतिनिधि चंद्रकांत दुबे की बात पर विश्वास करें तो केले के पौधों का वितरण पूरे लोकसभा क्षेत्र में हो रहा है। इस मामले को लेकर कांग्रेस वाले भले ही अपनी पीठ ठोक रहे हों लेकिन भाजपा के नेता यही कह रहे हैं कि यदि स्मृति ईरानी ने क्षेत्र में योजनाओं का शिलान्यास न किया होता तो राहुल गांधी को भी अमेठी के किसानों को केले के पौधे भिजवाने की याद नहीं आती। 


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