कमलनाथ के पास सबसे ज्यादा विभाग
| Agency - 30 Dec 2018

मध्य प्रदेश में भी अंततः  मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंत्रियों के विभागों का बंटवारा कर दिया है। विभागों का बंटवारा मंत्रियों के शपथ लेने के 3 दिन बाद हुआ है कमलनाथ ने औद्योगिक नीति एवं निवेश, जनसम्पर्क, साइंस एंड टेक्नोलॉजी, विमानन, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास और रोजगार मंत्रालय अपने पास रखा है। बाला बच्चन को गृह मंत्री बनाया गया है। दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्धन सिंह को नगरीय विकास और आवास मंत्री बनाया गया है। सज्जन सिंह वर्मा लोक निर्माण व पर्यावरण विभाग देंखेंगे। आरिफ अकील को भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही बृजेंद्र सिंह राठौर वाणिज्यिक कर विभाग की जिम्मेदारी संभालेंगे. गोविंद सिंह राजपूत को राजस्व और परिवहन मंत्री बनाया गया है. इमरती देवी महिला एवं बाल विकास की जिम्मेदारी संभालेंगी. प्रियब्रत सिंह को ऊर्जा और तरूण भनोट को वित्त मंत्री बनाया गया है. उमंग सिंघार वन विभाग देखेंगे. सचिन यादव को किसान कल्याण एवं कृषि विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। डॉक्टर विजयलक्ष्मी साधो संस्कृति, चिकित्सा शिक्षा और आयुष विभाग देखेंगी. हुकुम सिंह कराड़ा को जल संसाधन विभाग, डॉक्टर गोविंद सिंह को सहकारिता और संसदीय कार्य विभाग, प्रदीप जायसवाल को खनिज साधन विभाग, लाखन सिंह यादव को पशुपालन, मछुआ कल्याण और मत्स्य विभाग, ओंकार सिंह मरकाम को जनजातीय कार्य विभाग, जनजाति कल्याण विभाग दिया गया है। प्रभुराम चैधरी को स्कूल शिक्षा विभाग, सुखदेव पांसे को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, हर्ष यादव को कुटीर ग्रामोद्योग, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग, जीतू पटवारी को खेल एवं युवा कल्याण विभाग, उच्च शिक्षा विभाग और कमलेश्वर पटेल को पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री बनाया गया है। माना जा रहा है कि अधिकांश को उनकी पसंद से उलट विभाग दिए गए हैं, लेकिन कांग्रेस को जीत का ताज पहनाने वाले मालवा-निमाड़ का पलड़ा मंत्रिमंडल में भी भारी रहा। यहां के नौ मंत्रियों को महत्वपूर्ण विभाग मिले हैं। जल संसाधन, चिकित्सा, लोकनिर्माण, लोकस्वास्थ्य, गृह, वन, उच्चशिक्षा, नर्मदा घाटी, पर्यावरण और पर्यटन जैसे बड़े मंत्रालय मालवा-निमाड़ के खाते में आए हैं। शपथ ग्रहण के बाद से ही मंत्रियों के विभाग वितरण का मामला उलझा हुआ था। सत्ता के तीनों खेमों के बीच अपने-अपने समर्थक मंत्रियों को महत्वपूर्ण विभाग दिलवाने के लिए जोर-अजमाइश चल रही थी। नवनियुक्त मंत्रियों ने भी शपथ के बाद से ही भोपाल में डेरा डाल रखा था। लंबी खींचतान के बाद भी मामला नहीं सुलझने की स्थिति बनी तो गेंद दिल्ली के पाले में डाल दी गई। केंद्रीय स्तर से मिले सुझाव के बाद मंत्रियों को अपने-अपने क्षेत्रों में जाने के निर्देश दे दिए गए। 
 


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