हवन में इसलिए बोला जाता है स्वाहा हिन्दू नहीं जानते होंगे इसकी असली वजह
| Agency - 29 Mar 2019

वैसे तो हिंदू धर्म में पूजा पाठ को लेकर कई सारी अनुष्ठान किए जाते हैं परंतु हवन एक ऐसा अनुष्ठान है जो हिंदू धर्म में काफी तैयारी एवं शुद्धता के साथ किया जाता है। कोई भी शादी हो या धार्मिक अनुष्ठान उसकी शुरुआत हवन से ही की जाती है। इसमें खास बात तो यह है कि हवन के दौरान हर मंत्र के अंत में स्वाहा बोला जाता है। आप और हम में से ना जाने कितने लोगों ने स्वाहा बोला भी होगा परंतु हमें इसका सही अर्थ नहीं मालूम होता कि आखिर स्वाहा का मतलब होता क्या है।

दरअसल पुराणों के अनुसार स्वाहा अग्निदेव की पत्नी का नाम था इसीलिए हर मंत्र के अंत में इनका उच्चारण किया जाता है। स्वाहा का मतलब होता है कि किसी वस्तु को सही रीति से पहुँचाना। यानी किसी भी वस्तु को उसके प्रिय तक सुरक्षित और सही तरीके से पहुंचाना। तब तक कोई भी यज्ञ सफल नहीं माना जा सकता जब तक की हवन का ग्रहण देवता नहीं कर लेते हैं और देवता हवन का ग्रहण तभी करते हैं जब यह स्वाहा के माध्यम से अर्पण किया जाता है।

प्रजापति दक्ष की बेटी थी 'स्वाहा'

स्वाहा के बारे में कहा जाता है कि वह प्रजापति दक्ष की बेटी थी। उनका विवाह अग्नि देव के साथ हुआ था और अग्निदेव अपनी पत्नी स्वाहा के साथ ही एवं उनके माध्यम से ही हविष्य का ग्रहण करते हैं इसीलिए स्वाहा के माध्यम से किया गया आह्वान देवता को प्राप्त हो जाता है। बता दे कि हवन से सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक लाभ भी बहुत ज्यादा जुड़े हुए हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि हवन के दौरान उठने वाले धुए से 95% हानिकारक जीवाणु हवा में ही नष्ट हो जाते हैं साथ ही इसके धुंए के सुगंध से वातावरण एकदम शुद्ध हो जाता है जिससे बीमारी फैलने की आशंका काफी कम हो जाती है।


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